गया: समाजवादी लोक परिषद के बैनर तले 8 अगस्त से गया के गांधी मैदान में आमरण अनशन की शुरुआत हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार महेंद्र प्रसाद देहाती ने की, जबकि मंच संचालन मणिकांत मणि ने किया।
इस आमरण अनशन में मगही साधिका एवं समाजवादी लोक परिषद की प्रधान महासचिव ऋचा झा ने अन्न-जल त्याग कर आंदोलन का नेतृत्व संभाला है। खास बात यह है कि ऋचा झा मुख्य रूप से मिथिला भाषी हैं, लेकिन मगही भाषा के प्रति उनका समर्पण मगही भाषी समाज के लिए अनुकरणीय माना जा रहा है।
मगही चिंतक डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मगही भाषा को अष्टम अनुसूची में शामिल करवाना है। अखिल भारतीय मगही प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष सच्चिदानंद प्रेमी ने कहा कि मगही बुद्ध की भाषा है और इसे मानक दर्जा मिलना चाहिए।
समाजवादी लोक परिषद के अध्यक्ष हिमांशु शेखर ने कहा कि लगभग 36 वर्षों तक मगही भाषी मुख्यमंत्री बिहार में रहे, बावजूद इसके मगही भाषा के साथ सौतेला व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं, मगध विश्वविद्यालय की डॉ. किरण शर्मा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भावुक अपील करते हुए कहा कि मगही को अष्टम अनुसूची में शामिल किया जाए।
आमरण अनशन के पहले दिन बिहार के विभिन्न जिलों से आए मगही साहित्यकार, भाषा प्रेमी और रंगकर्मी शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से प्रो. अवधेश कुमार सिन्हा, डॉ. राम सिंहासन सिंह, डॉ. जयनंदन सिंह, पवन तनय, ‘रेल मैन’ चंदन वर्मा, अरविंद अजांश, गौतम पराशर, रंगकर्मी रजनीकांत, बजरंगी, लोकेश भूषण, पुनम कुमारी, डॉ. सुदर्शन शर्मा, डॉ. रघुवंशी कुमार मिश्रा, सलोप के राष्ट्रीय प्रवक्ता पंकज मिश्रा, युवा अध्यक्ष मुकेश मिश्रा, विकास सिन्हा, प्रियांशु कुमारी, लवली कुमारी, सावित्री सुमन, धर्मेंद्र रंगकर्मी, डॉ. अनुराधा, सतेन्द्र मांझी समेत कई कला-साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।
सभी ने अपने-अपने तरीके से मगही के सम्मान और विकास के लिए समर्थन व्यक्त किया और आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
Gaya ji News: Hunger Strike begins at Gandhi Maidan in Gaya demanding inclusion of Magahi language in the Eighth Schedule
Author: AK
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