
Finance Minister Nirmala Sitharaman Presents Economic Survey Report Ahead of Budget in Parliament
बजट से एक दिन पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज सदन में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की। इससे पहले सदन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने भाषण में मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ ही भविष्य की तैयारियों की रूपरेखा पेश की। आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में कहा गया है कि रिटेल महंगाई के लक्षित स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। महंगाई दर की स्थिति संतुलित स्तर पर बरकरार है। ट्रेड आउटलुक में अनिश्चितता बरकरार रहना संभव है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में बदलाव के आधार पर मापी जाने वाली खुदरा महंगाई वित्त वर्ष 2024 के 5.4 फीसदी से घटकर अप्रैल-दिसंबर 2024 में 4.9 फीसदी पर रही है। इकोनॉमिक सर्वे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता है। इसमें सरकार इस वित्त वर्ष यानी 2024-25 में देश की जीडीपी का अनुमान और महंगाई समेत कई जानकारियां होती है। ठीक हमारे घर की डायरी की तरह ही होता है इकोनॉमिक सर्वे।
इससे पता चलता है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था की हालत कैसी है। वित्त मंत्री के पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में मुख्य यह रही बड़ी बात। 2025-2026 में इकोनॉमी 6.3% से 6.8% की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2024-2025 में रिटेल महंगाई 5.4% थी जो अप्रैल-दिसंबर 2024 में 4.9% हो गई। खराब मौसम, कम उपज के चलते सप्लाई चेन में बाधा आने से खाने-पीने की महंगाई बढ़ी। वित्त वर्ष 2025-2026 की पहली छमाही में अच्छे रबी उत्पादन से खाने-पीने की चीजों की कीमतें नियंत्रण में रह सकती हैं। वित्त वर्ष 2024-2025 की चौथी तिमाही में महंगाई में कमी की उम्मीद है। लेबर मार्केट के हालात 7 साल में बेहतर हुए है। FY24 में बेरोजगारी दर गिरकर 3.2% पर आई। EPFO में नेट पेरोल पिछले 6 साल में दोगुना हुआ जो संगठित क्षेत्र में रोजगार का अच्छा संकेत है। AI के चलते होने वाले बदलाव के विपरीत प्रभावों को कम करने की जरूरत है।
भारत को विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए हर संभव कोशिश करना चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में प्राइवेट पार्टिसिपेशन बढ़ाने की जरूरत है।शनिवार को वित्त मंत्री सीतारमण मोदी 3.0 सरकार का पहला पूर्ण बजट पेश करेंगी, जिसमें आयकर स्लैब में बदलाव, बुनियादी ढांचा क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा, ग्रामीण विकास और शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़े आवंटन की उम्मीदें हैं। बजट दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए नीतिगत बढ़ावा दे सकता है, जिसकी शहरी मांग में कमी और कमजोर मुद्रा के कारण मुद्रास्फीति के जोखिम के बीच चार साल में सबसे धीमी वृद्धि दर दर्ज होने की उम्मीद है।
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Author: AK
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