रवि, अप्रैल 12, 2026

जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र के दौरान 370 मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के विधायकों के बीच सदन में जमकर मारपीट

Fierce fight between the ruling and opposition MLAs in Jammu and Kashmir Assembly on the issue of 370

जम्मू-कश्मीर में सत्ता और विपक्ष के विधायकों के बीच 370 मुद्दे पर आज मारपीट हो गई। तीन दिनों से यह मामला गर्माया हुआ था। गुरुवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों के बीच जमकर हाथापाई हुई। अनुच्छेद-370 की वापसी के मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के विधायकों में भिड़ंत हो गई। बीजेपी विधायकों की इस मुद्दे पर पक्ष में खड़े विधायकों के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई तक हो गई। सदन में हंगामे के बाद पहले विधानसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में एक दिन पहले भी हंगामा हुआ था। तमाम विवाद के बाद सदन स्थगित कर दिया गया था। दरअसल, यह पूरा मामला अनुच्छेद 370 की वापसी से जुड़ा है। लोकसभा सांसद राशिद इंजीनियर के भाई और विधायक खुर्शीद अहमद शेख ने सदन में अनुच्छेद-370 का बैनर दिखाया, जिसके बाद पक्ष और विपक्ष के बीच धक्का मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई है। इस बैनर के दिखाए जाने का बीजेपी विधायक और नेता विपक्ष सुनील शर्मा ने कड़ा विरोध किया। बीजेपी नेता रविंद्र रैना ने कहा कि अनुच्छेद 370 अब इतिहास बन गया है लेकिन उमर अब्दुल्ला सरकार पाकिस्तान का हौंसला बढ़ा रही है। 370 ने जम्मू कश्मीर में आतंकवाद, अलगाववाद और पाकिस्तान की मानसिकता को जन्म दिया। रविंद्र रैना ने कहा कि 370 के प्रस्ताव को गैर संवैधानिक तरीके से विधानसभा में लाकर चोरों की तरह छिपकर जल्दबाजी में पेश करना दिखाता है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस दोबारा जम्मू कश्मीर में हालात खराब करना चाहती है।हालांकि, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रस्ताव को ‘प्रतीकात्मक’ बताते हुए खारिज कर दिया, यह सुझाव देते हुए कि इसे वास्तविक इरादे से नहीं बल्कि जनता का ध्यान आकर्षित करने के लिए पेश किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि अगर इस मुद्दे को लेकर गंभीरता थी, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस के परामर्श से प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था। बता दें कि 2019 के निरस्तीकरण के बाद विधानसभा के पहले सत्र के दौरान अनुच्छेद 370 को लेकर बहस तेज हो गई है। विधानसभा की कार्यवाही बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक दशक के लंबे अंतराल के बाद निर्वाचित सरकार की वापसी का प्रतीक है। हाल के चुनावों में कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन ने 90 सदस्यीय विधानसभा में 49 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को 29 सीटें मिलीं, जिससे विभाजित जनादेश सामने आया।

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Author: AK

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