अहमदाबाद की रथयात्रा में एक हाथी बेकाबू हो गया, वन विभाग ने समय रहते काबू पाया, कोई जनहानि नहीं हुई। जानिए पूरी घटना।
Elephant Runs Amok in Ahmedabad Rath Yatra, Later Controlled
अहमदाबाद की रथयात्रा में हाथी ने मचाया हड़कंप
अहमदाबाद में आयोजित भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा में इस बार एक अप्रत्याशित घटना ने सभी को चौंका दिया। यात्रा में शामिल एक हाथी अचानक बेकाबू हो गया और रथयात्रा की निर्धारित दिशा से अलग होकर भाग निकला। गनीमत यह रही कि समय रहते वन विभाग और महावतों की सक्रियता से हाथी को काबू कर लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई।

वीडियो में कैद हुई पूरी घटना
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे हाथी रथ और श्रद्धालुओं से आगे निकलकर दौड़ने लगता है और पीछे महावत उसे रोकने का प्रयास करते हैं।
कैसे हुआ हादसा: घटना की पृष्ठभूमि
हाथी क्यों हुआ बेकाबू?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद की रथयात्रा में कुल 18 सजे-धजे हाथी शामिल किए गए थे। यह हाथी यात्रा की शोभा बढ़ाने के साथ-साथ धार्मिक महत्व का भी प्रतीक होते हैं। रथयात्रा के दौरान अचानक शोरगुल बढ़ने से सबसे आगे चल रहा एक हाथी डर के कारण बेकाबू हो गया।
हाथी को काबू करने में कितनी देर लगी?
वन विभाग की टीम और जू अथॉरिटी के विशेषज्ञों ने तेजी से प्रतिक्रिया दी और कुछ ही मिनटों में हाथी को नियंत्रित कर लिया गया। घटना में किसी भी व्यक्ति या पशु को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
अन्य हाथियों का व्यवहार
हाथी के बेकाबू होने के बाद अन्य हाथी भी थोड़े समय के लिए असामान्य व्यवहार करने लगे थे। हालांकि महावतों ने पूरी सतर्कता बरतते हुए स्थिति को नियंत्रित रखा।
रथयात्रा से हटाए गए तीन हाथी
इस अप्रत्याशित घटना के बाद एहतियातन तीन हाथियों को रथयात्रा से हटा दिया गया। यह फैसला महावतों, वन विभाग और जू अथॉरिटी द्वारा मिलकर लिया गया ताकि आगे किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
अहमदाबाद रथयात्रा का महत्व
पुरी (ओडिशा) की रथयात्रा के बाद अहमदाबाद की रथयात्रा भारत की दूसरी सबसे बड़ी रथयात्रा मानी जाती है। 148वीं रथयात्रा 27 जून 2025 को सुबह 7 बजे जमालपुर स्थित 400 साल पुराने जगन्नाथ मंदिर से शुरू हुई। यात्रा लगभग 18 किलोमीटर लंबी रही और यह रात 8:30 बजे वापस मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
मार्ग और प्रमुख पड़ाव
रथयात्रा जमालपुर से शुरू होकर रायपुर, कालुपुर, शाहपुर, दरियापुर, मोसल सरसपुर, प्रेम दरवाजा, दिल्ली चकला और माणेक चौक होते हुए संपन्न हुई। इस मार्ग पर लाखों श्रद्धालु शामिल हुए और भक्ति में डूबे दिखे।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
इतने सुरक्षाकर्मी और निगरानी उपकरण तैनात
रथयात्रा की भव्यता और भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने पुख्ता इंतजाम किए थे:
- 23,884 सुरक्षाकर्मी तैनात
- 41 ड्रोन कैमरे निगरानी के लिए सक्रिय
- 130 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए
- AI आधारित निगरानी प्रणाली लागू
- 25 वॉच टावर बनाए गए
सांस्कृतिक और धार्मिक रंग
इस यात्रा में 101 आकर्षक झांकियां, 30 अखाड़े, 18 भजन मंडलियां और 3 बैंड-बाजे शामिल हुए। हर गली, हर नुक्कड़ भक्ति के रंग में रंगा हुआ नजर आया।
निष्कर्ष: सजगता से टली बड़ी दुर्घटना
अहमदाबाद रथयात्रा 2025 की इस अप्रत्याशित घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि धार्मिक आयोजनों में सजगता और त्वरित प्रतिक्रिया कितनी जरूरी है। हाथी के बेकाबू होने जैसी घटना कभी भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती थी, लेकिन प्रशासन की मुस्तैदी और वन विभाग की तत्परता से सब कुछ सुरक्षित रहा।
यह घटना हमें यह भी सिखाती है कि परंपराओं के साथ-साथ आधुनिक सुरक्षा तकनीक और पशु-मनःस्थिति की समझ भी उतनी ही आवश्यक है, ताकि ऐसे बड़े आयोजन बिना किसी व्यवधान के संपन्न हो सकें।
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Author: AK
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