
हाथरस की घटना के बाद सीएम योगी के लिए हर दिन मुश्किल बढ़ती जा रही है । अब उत्तर प्रदेश में लाखों बिजली कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री योगी से सड़क पर उतर के दो-दो हाथ कर रहे हैं । दिल्ली कर्मचारियों में आक्रोश इसलिए है कि पिछले दिनों ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने यूपी में बिजली को निजी कारण करने की घोषणा की थी । उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पिछले 2 दिनों से बिजली नहीं आई है जिससे लोग पानी के लिए तरस गए हैं । उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में सूबे के 15 लाख से ज्यादा कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल पर हैं । गुस्साए बिजली कर्मचारियों ने कई जिलों में सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया । सोमवार शाम ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के साथ विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों की बैठक हुई थी, जिसमें ऊर्जा मंत्री ने निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की घोषणा की और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। हालांकि यूपीपीसीएल और विद्युत कर्मचारियों के बीच अभी सहमति नहीं बन पाई है। कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से उत्तर प्रदेश के देवरिया, आजमगढ़, बाराबंकी, गोरखपुर, मिर्जापुर, मऊ, गाजीपुर सहित कई जिले और शहर अंधेरे में डूबे हुए हैं। हड़ताली कर्मचारियों का कहना था कि सरकार ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए बिजली विभाग को निजी हाथों में जो सौंपने का फैसला किया है, जो सही नहीं है। बिजलीकर्मियों की घोषित अनिश्चिकालीन हड़ताल को लेकर अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोर्चा संभाल लिया है। योगी हड़ताली बिल्ली कर्मचारियों से बात कर रहे हैं अगर आज यह वार्ता सफल नहीं हो पाई तो एक बार फिर कई जिलों के लोगों को अंधेरे में रहना होगा ।
Author: AK
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