DW Samachar – Header
ब्रेकिंग

महाराष्ट्र की सरकार में ” एकनाथ शिंदे को नंबर दो” बनाने में भाजपा हाईकमान को तेरह दिन लगे

Eknath Shinde Elevated to "Number Two" in Maharashtra Government After 13 Days of BJP High Command Deliberation
Eknath Shinde Elevated to "Number Two" in Maharashtra Government After 13 Days of BJP High Command Deliberation

(पांच दिसंबर को देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 13 दिनों बाद एकनाथ शिंदे को आखिरकार समझौता करना पड़ा और डिप्टी सीएम बन गए। एकनाथ शिंदे नई महायुति सरकार में ‘नंबर दो’ की भूमिका स्वीकार करने को राजी हो गए । इस बार देवेंद्र फडणवीस ने भी मुख्यमंत्री बनने की ठान थी। साल 2022 में बीजेपी हाईकमान के दबाव में फडणवीस को उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार करना पड़ा था। वहीं एकनाथ शिंदे के पास भी कम ही विकल्प बचे थे। बीजेपी के पास इतने नंबर हैं कि सपोर्ट करने वाले विधायकों की लाइन लग जाती। महाराष्ट्र की महायुति गठबंधन के तीसरे साझेदार अजित पवार ने परिपक्वता दिखाई और भाजपा हाईकमान के आदेशों का पालन करते रहे। अजित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा ने दूरगामी सोच के साथ अपनी पार्टी और दोनों साझेदारों को किसी स्तर पर असंतुष्ट और नाराज होने का अवसर नहीं दिया।)

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नतीजों के लगभग दो सप्ताह बाद राज्य की राजनीति पटरी पर आ गई । गुरुवार, 5 दिसंबर को देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 13 दिनों बाद एकनाथ शिंदे को आखिरकार समझौता करना पड़ा और डिप्टी सीएम बन गए। शिंदे नई महायुति सरकार में ‘नंबर दो’ की भूमिका स्वीकार करने को राजी हो गए । इस बार देवेंद्र फडणवीस ने भी मुख्यमंत्री बनने की ठान थी। देवेंद्र फडणवीस ने पहली बार 2014 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और पूरे पांच साल राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। इसके बाद 2019 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने लेकिन सिर्फ तीन दिन मुख्यमंत्री रह सके थे। साल 2022 में बीजेपी हाईकमान के दबाव में फडणवीस को उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार करना पड़ा था।

Eknath Shinde Elevated to "Number Two" in Maharashtra Government After 13 Days of BJP High Command Deliberation

वहीं एकनाथ शिंदे के पास भी कम ही विकल्प बचे थे। वहीं बीजेपी के पास इतने नंबर हैं कि सपोर्ट करने वाले विधायकों की लाइन लग जाती। इसके साथ अजित पवार की भी महाराष्ट्र की सियासत में महत्वपूर्ण भूमिका रही और वह भी डिप्टी सीएम पद पर विराजमान हुए। महाराष्ट्र चुनाव परिणाम के बाद सरकार गठन करने में इतनी देर इसलिए हुई क्योंकि फडणवीस को नेता के रूप में स्वीकार करने के लिए शिंदे को तैयार करना था या कहें कि उन्हें तैयार होना था। वहीं दूसरी ओर तीसरे साझेदार अजित पवार ने परिपक्वता दिखाई और भाजपा हाई कमान के आदेशों का चुपचाप पालन करते रहे। अजित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा ने दूरगामी सोच के साथ अपनी पार्टी और दोनों साझेदारों को किसी स्तर पर असंतुष्ट और नाराज होने का अवसर नहीं दिया। संघ की भी प्रभावी सक्रियता रही। यही कारण था कि सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन में हल्के-फुल्के मतभेद होते हुए भी तीनों दल और प्रमुख नेता एकजुट होकर चुनाव लड़ते रहे।

अजित पवार के साथ भाजपा को बहुमत मिल गया था और इस कारण शिंदे का दबाव बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं रह गया। मुश्किल ये था कि एकनाथ शिंदे आखिर तक पीछे हटने को तैयार नहीं थे। बैठकें होती रहीं, बात नहीं अटक जा रही थी। एकनाथ शिंदे अपनी दावेदारी जता रहे थे, बीजेपी बार बार यही दोहराती रही कि मुख्मंत्री तो बीजेपी का ही बनेगा। 28 नवंबर को दिल्ली में हुई एक मीटिंग में एकनाथ शिंदे यहां तक बोल दिये थे कि छह महीने के लिए ही सही, लेकिन उनको मुख्यमंत्री बनने दिया जाए, बीजेपी ने ये मांग भी नामंजूर कर दी। बीजेपी की तरफ से कहा गया, ‘छह महीने के लिए मुख्यमंत्री बनाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ये एक गलत फैसला होगा और शासन-प्रशासन पर भी गलत असर पड़ेगा। दरअसल महायुति में सीएम पद की तस्वीर बुधवार को साफ हो गई। देवेंद्र फडणवीस को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया। ये साफ हो गया कि अब अगले सीएम फडणवीस ही होंगे। इसके बाद राज्यपाल से महायुति के नेताओं ने मुलाकात की।

इस दौरान एकनाथ शिंदे ने ही राज्यपाल को सरकार बनाने के लिए जरूरी विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा। इसके बाद महायुति के तीनों नेता मीडिया से मुखातिब हुए। इस दौरान तीनों नेताओं के चेहरे पर हंसी दिखाई दी। मुख्यमंत्री की कुर्सी एकनाथ शिंदे को बेशक प्यारी थी, लेकिन अब तो उनके उद्धव ठाकरे जैसी गलती दोहराने का कोई मतलब भी नहीं था। उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनने के लिए बीजेपी का साथ छोड़ा, और एकनाथ शिंदे से सब कुछ छुड़ा दिया। जाहिर है शिवसेना विधायकों की तरफ से भी भारी दबाव था। और ऐसा दबाव महसूस न करना या उस पर गंभीर नहीं होना तो एक और एकनाथ शिंदे को पैदा होने देने जैसा ही होगा। जैसे एकनाथ शिंदे दावेदारी बीजेपी के लिए अपनी अहमियत समझते हुए पेश कर रहे थे, बीजेपी ने चुनावों में हासिल नंबर के बल पर ही मुख्यमंत्री के लिए मोलभाव कर रही थी।

जिस तरह शिंदे ने शिवसेना में बगावत का झंडा उठाकर उद्धव ठाकरे को सीएम पद से हटाने में अहम भूमिका निभाई थी, वैसे ही अजित पवार ने अपने चाचा और महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार के खिलाफ बगावत करके उनकी पार्टी एनसीपी को अपने कब्जे में ले लिया था और महायुति सरकार में उप-मुख्यमंत्री बन गए थे। वे एक बार फिर से उपमुख्यमंत्री बने हैं, जबकि चुनाव के बाद बदले सियासी हालात में शिंदे को भी मुख्यमंत्री के पद से नीचे उतरकर उपमुख्यमंत्री बनना पड़ा है। उनके शपथ लेने से पहले ऐसी अटकलें चल रही थीं कि शिंदे उप-मुख्यमंत्री बनने को तैयार होंगे या नहीं। लेकिन शपथ ग्रहण समारोह के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है। वहीं बीजेपी की ओर से एकनाथ शिंदे के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया गया। हर कदम पर संयम बरतते देखा गया और ये बाद तो एकनाथ शिंदे ने भी महसूस की ही होगी। बीजेपी को भले ही महाराष्ट्र में बड़ी जीत हासिल हुई हो, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूती से पांव जमाने के लिए अभी बहुत सारे पापड़ बेलने हैं, और शिवसेना की मदद के बगैर ये मुमकिन भी नहीं है। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद देवेंद्र फडणवीस ने दिए गए इंटरव्यू में बताया कि वह आखिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कैसे चुने गए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र चुनाव में हमारे गठबंधन को निर्णायक जीत मिली थी। इसका पूरा श्रेय महाराष्ट्र की जनता को जाता है। उन्होंने निर्णायक जनादेश दिया। लेकिन हमारी पहली बैठक में ही एकनाथ शिंदे ने इसे मान लिया था कि मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा।

यह भी पढ़े: बिहार: सीएम नीतीश के कार्यक्रम में विधायकों की No Entry, गार्ड्स ने धक्का देकर भगाया; हाथ में गुलदस्ता लेकर खड़े रह गए विधायक

यह भी पढ़ेस्वामीनाथन रिपोर्ट: पहले भारत रत्न का सम्मान,अब उन्हीं स्वामीनाथन की कृषि रिपोर्ट कृषि मंत्रालय की वेबसाइट से गायब, जानें कौन हैं स्वीनाथन क्या है इनकी रिपोर्ट

AK
Author: AK

! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !

Relates News