कोरल सागर में 6.0 तीव्रता के भूकंप से वानुआतु, जापान, म्यांमार और भारत में झटके महसूस किए गए। भारत में कर्नाटक व लद्दाख में हल्का कंपन दर्ज हुआ।
Earthquake Tremors Hit Four Nations; 6.0 Magnitude in Coral Sea
भूकंप के झटकों से कांपे चार देश, कोरल सागर में 6 तीव्रता का कंपन
26 अक्टूबर की सुबह धरती फिर हिली
रविवार, 26 अक्टूबर की सुबह धरती एक बार फिर कांप उठी जब कोरल सागर (Coral Sea) में आए भूकंप के झटके वानुआतु, जापान, म्यांमार और भारत तक महसूस किए गए।
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, कोरल सागर में भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई। यह झटका सुबह 4:58 बजे दर्ज हुआ। भूकंप का केंद्र वानुआतु के पास धरती से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
हालांकि इस भूकंप से अब तक किसी भी देश में जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं मिली है, लेकिन कई इलाकों में लोगों में डर और बेचैनी का माहौल है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इतनी तीव्रता का भूकंप संभावित रूप से सुनामी या द्वितीयक झटकों (aftershocks) का कारण बन सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
EQ of M: 6.0, On: 26/10/2025 04:58:07 IST, Lat: 12.34 S, Long: 166.46 E, Depth: 10 Km, Location: Coral Sea.
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) October 25, 2025
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कोरल सागर का भूकंपीय इतिहास और खतरा
कोरल सागर, जो ऑस्ट्रेलिया और वानुआतु के बीच स्थित है, भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यह इलाका “Pacific Ring of Fire” का हिस्सा है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय और ज्वालामुखीय क्षेत्रों में से एक है।
यह वही क्षेत्र है जहाँ 2018 में भी 7.0 तीव्रता का भूकंप आया था और 2009 में एक बड़ी सुनामी चेतावनी जारी की गई थी।
वैज्ञानिक मानते हैं कि इस क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेट्स (tectonic plates) की लगातार हलचल के कारण ऊर्जा का अत्यधिक संचय होता है, जो समय-समय पर भूकंप के रूप में मुक्त होती है।
जापान में 5.9 तीव्रता का भूकंप, पर नहीं आई सुनामी
भूकंप का असर जापान में भी देखा गया, जहाँ उत्तरी जापान के पूर्वी होक्काइडो (Hokkaido) क्षेत्र में 5.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया।
स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 5:15 बजे धरती हिली, जिससे लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।
हालांकि जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने कहा कि सुनामी की कोई संभावना नहीं है और भूकंप का केंद्र समुद्र तल से नीचे करीब 40 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
फिर भी कई शहरों में ट्रेन सेवाएं और बिजली आपूर्ति कुछ समय के लिए बाधित रहीं।
टोक्यो विश्वविद्यालय के भू-वैज्ञानिक प्रो. मसानोरी ताकाहाशी के अनुसार,
“जापान के उत्तरी क्षेत्र में इस प्रकार के झटके सामान्य हैं, लेकिन लगातार बढ़ती गतिविधि इस बात का संकेत है कि प्लेट्स के बीच ऊर्जा संचय हो रहा है।”
म्यांमार में भी महसूस हुए झटके
म्यांमार में सुबह 4:42 बजे आए भूकंप की तीव्रता 3.0 मापी गई। इसका केंद्र भी धरती से 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
यांगून और उसके आसपास के इलाकों में हल्के कंपन महसूस किए गए।
हालांकि, किसी तरह के नुकसान या हताहत की सूचना नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह इंडो-बर्मा प्लेट की हलचल का परिणाम है, जो उत्तर-पूर्व भारत तक प्रभाव डालती है।
इसी कारण असम, मणिपुर और नागालैंड जैसे राज्य मध्यम भूकंपीय जोन (Seismic Zone IV) में आते हैं।
EQ of M: 3.6, On: 26/10/2025 07:30:04 IST, Lat: 36.53 N, Long: 74.52 E, Depth: 10 Km, Location: Leh, Ladakh.
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) October 26, 2025
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भारत के दो राज्यों में भी हिली धरती
कर्नाटक में सुबह 3:47 पर झटके
भारत में रविवार सुबह भूकंप के झटके कर्नाटक में महसूस किए गए।
NCS के अनुसार, 3.1 तीव्रता का हल्का भूकंप कलबुर्गी जिले के पास दर्ज किया गया।
भूकंप का केंद्र धरती के 5 किलोमीटर की गहराई में था।
स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की कि किसी भी प्रकार की क्षति नहीं हुई, लेकिन कुछ ग्रामीण इलाकों में लोग घरों से बाहर निकल आए।
लद्दाख में 3.6 तीव्रता का भूकंप
इसके कुछ घंटे बाद, सुबह 7:30 बजे, लद्दाख में भी 3.6 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया।
भूकंप का केंद्र लेह से लगभग 60 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व दिशा में 10 किलोमीटर की गहराई में था।
लद्दाख प्रशासन ने कहा कि यह एक हल्का भूकंप था और इसकी तीव्रता इतनी नहीं थी कि किसी प्रकार की क्षति हो।
NCS की रिपोर्ट: भूकंपों की बढ़ती आवृत्ति
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार,
पिछले एक महीने में दक्षिण-पूर्व एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में 10 से अधिक मध्यम तीव्रता के भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्लेटों की सतत हलचल का परिणाम है।
NCS निदेशक डॉ. ए.के. शुक्ला के अनुसार,
“6.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप को ‘मॉडरेट टू स्ट्रॉन्ग’ श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे भूकंप समुद्र के अंदर आते हैं तो सुनामी जैसी आपदाओं की आशंका बढ़ जाती है।”
क्या सुनामी का खतरा टला है?
हालांकि कोरल सागर में भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर था, फिर भी विशेषज्ञों ने सुनामी का खतरा नहीं बताया है।
ऑस्ट्रेलियाई मौसम विभाग (BOM) ने कहा कि पानी का स्तर सामान्य है और किसी बड़े समुद्री उतार-चढ़ाव का संकेत नहीं मिला है।
वानुआतु भूविज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि
“आने वाले 24 घंटे में आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) की संभावना बनी हुई है, इसलिए तटीय क्षेत्रों में सतर्क रहना जरूरी है।”
भूकंप क्यों आते हैं? एक वैज्ञानिक व्याख्या
भूकंप धरती के भीतर स्थित टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधियों के कारण आते हैं।
धरती कुल सात बड़ी और कई छोटी प्लेटों में बंटी हुई है। जब ये प्लेटें आपस में टकराती या फिसलती हैं, तो ऊर्जा के रूप में झटके उत्पन्न होते हैं, जिन्हें हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं।
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है —
- 0 से 2.9: बहुत हल्का
- 3 से 4.9: हल्का
- 5 से 6.9: मध्यम
- 7 से ऊपर: गंभीर और विनाशकारी
आज कोरल सागर का भूकंप 6.0 तीव्रता का था, जो मध्यम-से-जोरदार श्रेणी में आता है।
हालिया वर्षों में ऐसे बड़े भूकंप
| वर्ष | स्थान | तीव्रता | प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|---|
| 2018 | इंडोनेशिया | 7.5 | सुनामी और 4000 मौतें |
| 2021 | जापान (फुकुशिमा) | 6.9 | सैकड़ों घायल |
| 2023 | नेपाल | 6.4 | 153 मौतें |
| 2025 | कोरल सागर | 6.0 | बिना नुकसान लेकिन चेतावनी जारी |
यह आँकड़ा बताता है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र भूकंपीय रूप से लगातार सक्रिय बना हुआ है।
लोगों में दहशत, लेकिन जागरूकता से टल सकती है त्रासदी
भूकंप की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण है सतर्कता और तैयारी।
सरकारें और संस्थाएं अब “भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली” विकसित करने पर काम कर रही हैं ताकि जान-माल का नुकसान कम किया जा सके।
भारत में भी IMD और NCS संयुक्त रूप से ऐसी प्रणाली पर शोध कर रहे हैं, जिससे सेकंडों पहले ही भूकंप की जानकारी दी जा सके।
निष्कर्ष: धरती की हलचल, लेकिन राहत की खबर
26 अक्टूबर का दिन भले ही चार देशों के लिए चिंताजनक रहा हो, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी देश में कोई बड़ी क्षति नहीं हुई।
कोरल सागर में आए 6.0 तीव्रता के भूकंप ने एक बार फिर यह याद दिलाया कि धरती की गहराइयों में होने वाली हलचलें इंसान की सुरक्षा को हमेशा चुनौती देती हैं।
भूवैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में आफ्टरशॉक्स की संभावना बनी रहेगी, इसलिए सतर्कता और वैज्ञानिक जागरूकता ही इस आपदा से निपटने का सबसे बड़ा उपाय है।
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Author: AK
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