देवघर के जमुनिया में ट्रक और बस की टक्कर में 18 कांवड़ियों की मौत, 20 से ज्यादा घायल। बाबा बैद्यनाथ धाम जा रहे थे सभी श्रद्धालु।
Deoghar Bus Tragedy: 18 Kanwariyas Killed in Collision
दुखद शुरुआत: आस्था के सफर में मातम की दस्तक
सावन का महीना श्रद्धा और आस्था से जुड़ा होता है, जब देशभर से लाखों कांवड़िए भगवान शिव को जल अर्पित करने बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर निकलते हैं। लेकिन झारखंड के देवघर जिले में मंगलवार सुबह एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। 18 कांवड़ियों की जान इस हादसे में चली गई, जबकि दर्जनों घायल हो गए।
कैसे हुआ हादसा? – घटनास्थल का विवरण
जमुनिया जंगल के पास हुआ टक्कर
मंगलवार सुबह करीब 4:30 बजे देवघर के मोहनपुर थाना क्षेत्र के जमुनिया मोड़ के पास एक तेज रफ्तार बस, जो कांवड़ियों से भरी हुई थी, सामने से आ रहे गैस सिलेंडर लदे ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस के परखच्चे उड़ गए और अधिकांश यात्री मौके पर ही मौत के शिकार हो गए।
बस में कितने श्रद्धालु सवार थे?
बस में करीब 32 कांवड़िए सवार थे। सभी उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों से बाबा बैद्यनाथ धाम जल चढ़ाने के लिए जा रहे थे।
प्रशासन और राहत कार्य की स्थिति
मौके पर पहुंचे अधिकारी और पुलिस बल
हादसे की सूचना मिलते ही झारखंड पुलिस, स्थानीय प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन टीम मौके पर पहुंची। घायलों को देवघर सदर अस्पताल और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया।
आईजी शैलेन्द्र कुमार सिन्हा का बयान
दुमका क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक शैलेन्द्र कुमार सिन्हा ने बताया कि राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है और घायलों की स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया और शोक की लहर
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने जताया दुख
देवघर के सांसद निशिकांत दुबे ने ट्वीट कर हादसे पर गहरा शोक जताया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने राज्य सरकार से पीड़ित परिवारों को त्वरित मुआवजा और राहत पहुंचाने की मांग की।
स्थानीय लोगों का सहयोग
घटना के बाद आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचे और प्रशासन की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। कई लोगों ने बताया कि बस की हालत देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल था कि उसमें लोग सवार थे।
कांवड़ यात्रा और सुरक्षा की चिंता
हर साल होते हैं हादसे
कांवड़ यात्रा के दौरान हादसे होना कोई नई बात नहीं है। हर साल कहीं न कहीं वाहन टक्कर, करंट लगना, या अन्य वजहों से श्रद्धालुओं की जान जाती है। इस साल झारखंड की यह दुर्घटना एक कड़ी चेतावनी है कि आस्था के इस पर्व में सुरक्षा इंतजामों की कमी आज भी गंभीर समस्या है।
प्रशासनिक तैयारियां नाकाफी
इस यात्रा में लाखों लोग शामिल होते हैं, फिर भी सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण, वाहन फिटनेस जांच और आपातकालीन व्यवस्था जैसी बुनियादी चीज़ों पर प्रशासनिक नजर कमजोर दिखती है।
पीड़ितों के परिवारों की स्थिति
एक ही परिवार के कई सदस्य मृत
हादसे में कुछ परिवारों के दो या तीन सदस्य एकसाथ मारे गए हैं। इससे उनके घरों में मातम पसरा हुआ है। पीड़ितों के गांवों में हर तरफ शोक की लहर है। लोगों को अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि आस्था की यह यात्रा इतनी भीषण त्रासदी में बदल जाएगी।
सरकार से क्या उम्मीद की जाए?
1. पीड़ितों को आर्थिक सहायता
राज्य और केंद्र सरकार को मृतकों के परिजनों को कम से कम ₹10 लाख की सहायता देनी चाहिए। घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार को उठाना चाहिए।
2. दोषियों की पहचान और कार्रवाई
प्राथमिक जांच में पता चला है कि ट्रक ओवरलोड था और तेज रफ्तार में चल रहा था। ऐसे मामलों में वाहन मालिक और ड्राइवर पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
3. कांवड़ यात्रा के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल
भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए हर राज्य सरकार को विशेष कांवड़ यात्रा योजना तैयार करनी चाहिए, जिसमें यात्री वाहनों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट, रूट मैनेजमेंट और मेडिकल टीम की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
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Author: AK
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