दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। ग्रेप-4 लागू, स्कूल हाइब्रिड मोड में और दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम का आदेश जारी।
Delhi Pollution Emergency: GRAP-4 Imposed, Schools on Hybrid Mode
प्रस्तावना: दम घोंटती दिल्ली की हवा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर इलाकों में एक बार फिर वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सर्दी की शुरुआत के साथ ही स्मॉग और कोहरे की मोटी चादर ने पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। रविवार की सुबह दिल्ली की सड़कों पर दृश्यता इतनी कम थी कि लोग हेडलाइट जलाकर गाड़ियों को रेंगते हुए चलाने को मजबूर दिखे। हालात ऐसे बन गए कि प्रशासन को ग्रेप-4 जैसे सख्त प्रतिबंध लागू करने पड़े हैं। इसका सीधा असर स्कूलों, दफ्तरों, निर्माण कार्यों और ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ा है।
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की मौजूदा स्थिति
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार दिल्ली के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई 500 के करीब पहुंच गया है। रविवार सुबह सात बजे दिल्ली का औसत एक्यूआई 462 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
दिल्ली के सभी 40 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता लाल निशान पर बनी हुई है। इसका मतलब है कि राजधानी की हवा इस समय स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो चुकी है।
किन इलाकों में सबसे खराब हवा
सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी और एनसीआर के कई इलाकों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
प्रमुख इलाकों का एक्यूआई
आनंद विहार – 491
आईटीओ – 484
पहाड़गंज – 488
रोहिणी – 499
जहांगीरपुरी – 495
विवेक विहार – 495
बवाना – 497
बुराड़ी – 474
चांदनी चौक – 466
आरकेपुरम – 471
गाजियाबाद (वसुंधरा) – 481
इंदिरापुरम – 476
नोएडा सेक्टर-62 – 433
गुरुग्राम (विकास सदन) – 293
इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के कई हिस्से भी प्रदूषण की चपेट में हैं।
एक्यूआई क्या होता है और इसका मतलब
एयर क्वालिटी इंडेक्स हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर को दर्शाता है।
सीपीसीबी के अनुसार:
0–50 : अच्छा
51–100 : संतोषजनक
101–200 : मध्यम
201–300 : खराब
301–400 : बहुत खराब
401–500 : गंभीर
401 से ऊपर का एक्यूआई सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।
ग्रेप-4 लागू होने का मतलब क्या है
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पहले ग्रेप-3 और फिर उसी दिन ग्रेप-4 लागू करने का फैसला लिया।
ग्रेप यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के चौथे चरण में सबसे सख्त पाबंदियां लागू की जाती हैं। इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों को तुरंत नियंत्रित करना होता है।
ग्रेप-4 के तहत लगी प्रमुख पाबंदियां
वाहनों पर प्रतिबंध
बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल चार पहिया वाहनों के संचालन पर सख्त रोक लगाई गई है।
हालांकि दिव्यांग व्यक्तियों को निजी इस्तेमाल के लिए इन वाहनों की अनुमति दी गई है।
दिल्ली में केवल बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को ही प्रवेश की इजाजत होगी।
ट्रकों की एंट्री पर रोक
दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-आवश्यक हल्के वाणिज्यिक वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है।
जरूरी सामान लेकर आने वाले ट्रक, सीएनजी, ई-ट्रक और बीएस-6 इंजन वाले ट्रकों को छूट दी गई है।
निर्माण कार्य और औद्योगिक गतिविधियां
ग्रेप-4 के तहत सभी तरह के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है।
हालांकि सड़क, बिजली वितरण और जरूरी सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।
स्वच्छ ईंधन पर नहीं चलने वाले ईंट भट्ठे, हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर को भी बंद करने का आदेश दिया गया है।
स्कूल हाइब्रिड मोड में, दफ्तरों में WFH
प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने बड़ा फैसला लिया है।
नौवीं तक और 11वीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूलों में हाइब्रिड मोड में पढ़ाई कराने का आदेश जारी किया गया है।
हाइब्रिड मोड का मतलब है कि छात्र चाहें तो स्कूल जाकर या फिर ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कर सकते हैं।
सरकारी और निजी दफ्तरों के 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया है। इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करने की कोशिश की जा रही है।
प्रदूषण बढ़ने के कारण
दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं।
सर्दियों में तापमान गिरने से हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे प्रदूषक नीचे ही फंस जाते हैं।
वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने का असर मिलकर हालात को और बिगाड़ देता है।
इसके अलावा हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषण फैलने के बजाय जमा हो जाता है।
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
गंभीर श्रेणी का एक्यूआई बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक होता है।
लंबे समय तक ऐसी हवा में सांस लेने से आंखों में जलन, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि लोग अनावश्यक बाहर निकलने से बचें और मास्क का इस्तेमाल करें।
आगे क्या है समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थायी उपायों के साथ-साथ स्थायी समाधान पर भी ध्यान देना जरूरी है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करना, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और पराली प्रबंधन जैसे कदम लंबे समय में ही असर दिखा सकते हैं।
निष्कर्ष
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर संकट बनकर सामने आया है। ग्रेप-4 के तहत सख्त पाबंदियां यह दिखाती हैं कि हालात कितने बिगड़ चुके हैं।
स्कूलों का हाइब्रिड मोड में जाना और दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू होना जरूरी कदम हैं, लेकिन जब तक प्रदूषण के मूल कारणों पर काम नहीं होगा, तब तक राहत अस्थायी ही रहेगी।
स्वच्छ हवा के लिए सरकार, प्रशासन और आम लोगों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी, तभी दिल्ली फिर से खुली सांस ले पाएगी।
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Author: AK
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