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आरोप- 2018 में भ्रष्टाचार की पोल खुली लेकिन बावजूद उसके केजरीवाल ने कांट्रैक्ट को 2020 तक बढ़ाया
दिल्ली जलबोर्ड में एक और भ्रष्टाचार सबके सामने आया है और इसमें आरोप है कि जल बोर्ड में 20 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। अब यह घोटाला कैसे हुआ कौन किया यह सब जांच का विषय है लेकिन फिलहाल भाजपा का आरोप है कि यह सारा कुछ अरविंद केजरीवाल के संरक्षण में हुआ है इसलिए उनके ऊपर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
यह मांग नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने किया है और साथ ही इस पूरे भ्रष्टाचार की कहानी कैसे बुनी गई वह भी मीडिया के सामने रखा। बताया जा रहा है कि के मुख्यमंत्री और जलबोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए। दिल्ली सरकार ने सीएजी के अनेक पत्रों के बाद भी लगभग 2015-16 से दिल्ली जल बोर्ड के खातों का ऑडिट नही करवा रही है जबकि दिल्ली जलबोर्ड पर कर्ज भी बढ़ता जा रहा है। आज जलबोर्ड भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। उन्होंने कहा कि जलबोर्ड में ताजा 20 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार तब सामने आया जब माननीय उपराज्यपाल ने हस्तक्षेप किया कारण अब सामने आया है।
जलबोर्ड में लगभग 2015 से एक घोटाला चल रहा था जिसके अंतर्गत – जल बोर्ड के कर्मचारियों, जल बोर्ड के द्वारा नियुक्त फंड कलेक्टर एजेंट और एक निजी बैंक के अधिकारियों की सांठ-गांठ से करोड़ों रूपए का गबन किया गया। उन्होंने कहा कि जो उपभोक्ता जल बोर्ड कार्यालयों में निजी कम्पनियों के किओस्क किसी पर बिल जमा कराने आते थे। यह कम्पनी उनके आये नकद को एवं चेकों को फर्जी खातों में जमा करा देते थे जिसकी जानकारी जल बोर्ड कर्मियों को रहती थी लेकिन यह बात इसलिए बाहर नहीं आ सकी क्योंकि उसमें सभी का हिस्सा फिक्स था।
बताया जा रहा है कि दिल्ली सरकार ने जिस बैंक को कंट्रैक्ट दिया गया था वह सबका जलबिल वसूल कर जलबोर्ड के खातों में ना डालकर फर्जी अकाउंट में डालता रहा औह यह घोटाला साल 2018 में सामने आया तो इसपर कार्रवाई करने की जगह केजरीवाल ने निजी कम्पनी के कॉन्ट्रैक्ट को दो साल के लिए बढाने के साथ-साथ निजी कम्पनी को दी जाने वाली कमीशन जो पहले 5 फीसदी थी उसको बढ़ाकर 6 फीसदी कर दिया गया। भाजपा का तो आरोप यह भी है कि अगर केजरीवाल को सब कुछ की जानकारी थी तो उन्होंने पुलिस में शिकायत क्यों नहीं कराई। इससे साफ है कि इस पूरे प्रकरण में उनकी भी मिली भगत है।
भाजपा मांग करती है कि इस मामले में पुलिस यह भी जांच करे की आखिर अरविंद केजरीवाल ने पुलिस प्राथमिकी क्यों नही दर्ज करवाई। केजरीवाल सरकार को 2018 में स्कैम की जानकारी मिलने के बाद इस पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज करानी चाहिए थी जो ना कराना उनके संरक्षण का सबूत है।
Author: AK
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