देहरादून में भारी बारिश और भूस्खलन से अब तक 21 लोगों की मौत, 14 लापता। मसूरी और सहस्रधारा का संपर्क टूटा, यलो अलर्ट जारी।
Dehradun Rains Havoc: Death Toll Rises, Many Missing
देहरादून में आपदा का तांडव
देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में हाल के दिनों में हुई भारी बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। राजधानी देहरादून में नदियों के उफान और भूस्खलन से अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। यह आपदा न केवल लोगों की जान ले रही है बल्कि पूरे इलाके की बुनियादी संरचना को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
भूस्खलन और नदियों के उफान से तबाही
नदियों ने लिया विकराल रूप
देहरादून के रायपुर क्षेत्र में सोंग नदी और आसन नदी में कई शव बरामद हुए हैं। ये शव बारिश और बाढ़ के कारण बहकर दूर-दराज इलाकों तक पहुंच गए।
मसूरी और सहस्रधारा का संपर्क टूटा
भारी भूस्खलन और जलभराव के कारण मसूरी, सहस्रधारा और विकासनगर का राजधानी से सीधा संपर्क टूट गया है। इससे वहां फंसे लोग प्रशासन की मदद के इंतजार में हैं।
मौसम विभाग का अलर्ट
देहरादून और नैनीताल पर खतरा बरकरार
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले दिनों में भी देहरादून और नैनीताल में भारी वर्षा हो सकती है। इसके लिए यलो अलर्ट घोषित किया गया है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
मौसम विभाग और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी किनारे न जाएं और अनावश्यक यात्रा से बचें।
पेयजल संकट गहराया
लाखों लोग प्रभावित
भारी बारिश और भूस्खलन से पेयजल की लाइनों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। दो लाख से अधिक लोग पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। कई इलाकों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है।
जल संस्थान पर पड़ा बोझ
जल संस्थान ने क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों को जोड़ने के लिए अस्थायी व्यवस्था की है, लेकिन तबाही का स्तर इतना बड़ा है कि स्थायी समाधान में समय लगेगा।
सिर्फ छह घंटे की बारिश ने दिया 100 करोड़ का घाव
देहरादून में छह घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ने बिजली, पानी, सड़कों और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बारिश से शहर को करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
स्थानीय लोगों की आपबीती
देहरादून और मसूरी के कई इलाकों में लोग अब भी मलबे और पानी से जूझ रहे हैं। कई परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं, जबकि किसान अपनी फसलों के नुकसान से परेशान हैं। जिन इलाकों में नदियां उफान पर हैं, वहां लोग पलायन करने पर मजबूर हो रहे हैं।
प्रशासन की चुनौतियां और प्रयास
राहत और बचाव कार्य जारी
राज्य प्रशासन, आपदा प्रबंधन बल और एनडीआरएफ की टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं। लापता लोगों की तलाश की जा रही है और प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
संचार और परिवहन पर असर
कई क्षेत्रों में सड़कें टूट जाने और पुल बह जाने से राहत कार्यों में भी दिक्कत आ रही है। मोबाइल नेटवर्क और बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को संपर्क में भी कठिनाई हो रही है।
देहरादून और उत्तराखंड के लिए सबक
बार-बार आने वाली इस तरह की आपदाएं बताती हैं कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों को ठोस आपदा प्रबंधन रणनीति की जरूरत है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अनियोजित शहरीकरण, अवैध खनन और पर्यावरण की अनदेखी ने इन आपदाओं की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
आगे का रास्ता
भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए आवश्यक है कि:
- पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्य नियंत्रित किए जाएं।
- नदियों और झीलों के किनारे अवैध कब्जों को रोका जाए।
- आपदा प्रबंधन बलों को और अधिक संसाधन और तकनीकी साधन उपलब्ध कराए जाएं।
- स्थानीय लोगों को आपदा प्रबंधन और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जाए।
निष्कर्ष
देहरादून में हाल की आपदा ने दिखा दिया है कि कुदरत के सामने इंसान की तैयारी कितनी भी बड़ी क्यों न हो, कमजोर पड़ जाती है। लेकिन प्रशासन और समाज मिलकर इस संकट से बाहर निकल सकते हैं। आज जरूरत है कि हम न केवल तात्कालिक राहत कार्यों पर ध्यान दें, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन उपायों को प्राथमिकता बनाएं।

Author: AK
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