बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात मोंथा के कारण आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु में हाई अलर्ट जारी। 110 किमी/घं की रफ्तार से बढ़ रहा तूफान।
Cyclone Montha Alert: 110 km/h Winds Threaten 3 Indian States
चक्रवात मोंथा से 3 राज्यों में हाई अलर्ट, 110 किमी/घं की रफ्तार से बढ़ रही तबाही
परिचय: बंगाल की खाड़ी से उठी तबाही की लहर
बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर समंदर मंथन मचा हुआ है। चक्रवात मोंथा (Cyclone Montha) के रूप में यह उथल-पुथल अब आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु के तटीय इलाकों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इसे “गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm)” की श्रेणी में रखा है और तीनों राज्यों में हाई अलर्ट जारी किया गया है।
थाईलैंड द्वारा नामित यह चक्रवात, जिसकी थाई भाषा में अर्थ है ‘सुगंधित या सुंदर फूल’, वर्तमान में बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में केंद्रित है। लेकिन इसकी खूबसूरत व्याख्या के पीछे एक भयावह वास्तविकता छिपी है — 110 किमी/घंटा की रफ्तार से चलती हवाएं और भारी बारिश की चेतावनी।
आईएमडी की रिपोर्ट: 28 अक्टूबर को तट से टकराएगा तूफान
IMD के मुताबिक, चक्रवात मोंथा फिलहाल पोर्ट ब्लेयर से 460 किमी पश्चिम-दक्षिण पश्चिम, चेन्नई से 950 किमी पूर्व-दक्षिणपूर्व, और काकीनाडा से 970 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
पूर्वानुमान के अनुसार, 28 अक्टूबर की शाम या रात को यह तूफान आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम और कालींगपट्टनम के बीच काकीनाडा तट से टकराएगा।
IMD के वरिष्ठ वैज्ञानिक एस. करुणासागर के अनुसार:
“26 अक्टूबर से आंध्र तट के पास 45 से 55 किमी/घंटा की हवाएं चलने लगेंगी, जो धीरे-धीरे 90 से 110 किमी/घंटा तक पहुंच सकती हैं। बारिश का दायरा बेहद व्यापक रहेगा।”
आंध्र प्रदेश में व्यापक तैयारियां, हेल्पलाइन नंबर जारी
चक्रवात मोंथा के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश प्रशासन ने अपनी पूरी मशीनरी को अलर्ट पर रखा है।
सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं और अधिकारियों को 24 घंटे चौकसी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
विशाखापट्टनम कलेक्टरेट में विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है।
मदद के लिए दो हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं —
0891-2590102 और 0891-2590100।
कलेक्टर एमएन हरेंद्र प्रसाद ने बताया कि:
“कर्मचारी चौबीसों घंटे शिफ्ट में काम करेंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। तटीय इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।”
मुख्यमंत्री नायडू ने की आपात बैठक
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को एक आपात बैठक बुलाई और स्थिति की समीक्षा की।
उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि
- आवश्यक सेवाओं में किसी भी तरह की बाधा न आए,
- जरूरत पड़ने पर स्कूल-कॉलेज बंद किए जाएं,
- और NDRF व SDRF की टीमें तुरंत तैनात की जाएं।
काकीनाडा में “हॉस्पिटल ऑन व्हील्स” की व्यवस्था की जा रही है ताकि जरूरतमंदों को तुरंत चिकित्सीय सहायता मिल सके।
राज्य सरकार ने गुंटूर, नेल्लोर, चित्तूर, कडप्पा, बापटला और काकीनाडा जिलों में विशेष निगरानी टीमों को सक्रिय कर दिया है।
रायलसीमा और तटीय जिलों में रेड अलर्ट
IMD की चेतावनी के अनुसार, 27 से 29 अक्टूबर तक आंध्र प्रदेश के तटीय और रायलसीमा जिलों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा (210 मिमी तक) होने की संभावना है।
इस वजह से 27 और 28 अक्टूबर को सभी स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे।
मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान के चलते
- पेड़ों के गिरने,
- बिजली आपूर्ति बाधित होने,
- और निचले इलाकों में जलभराव जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
ओडिशा में आपदा प्रबंधन की तैयारी
ओडिशा सरकार ने भी चक्रवात मोंथा को लेकर सभी जिलों में आपदा प्रबंधन तंत्र सक्रिय कर दिया है।
राज्य के 16 जिलों पर तूफान का असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा,
“लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। प्रशासन हर संभव एहतियाती कदम उठा रहा है। साइक्लोन शेल्टर तैयार हैं और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।”
सरकार ने
- कोरापुट, मलकानगिरी, रायगढ़ा, कालाहांडी, गंजाम और गजपति जिलों में रेड अलर्ट
- जबकि नौ अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है।
समुद्र तटों पर पुलिस और आपदा प्रबंधन टीमें गश्त कर रही हैं। मछुआरों को अगले 4 दिन समंदर में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
तमिलनाडु में भी तबाही वाली बारिश का खतरा
तमिलनाडु के तटीय जिलों में शनिवार शाम से ही तेज हवाओं और बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है।
IMD के अनुसार,
- दक्षिण ओडिशा और तमिलनाडु तट पर 35 से 45 किमी/घंटा की हवाएं चलेंगी,
- रविवार को यह बढ़कर 65 किमी/घंटा,
- और सोमवार शाम तक 80 किमी/घंटा तक पहुंच सकती हैं।
चेन्नई, नागपट्टिनम और कुड्डालोर जिलों में अगले 4 से 5 दिन तक लगातार बारिश की संभावना है।
सरकार ने आपात सेवाओं को सतर्क कर दिया है और निचले इलाकों में निकासी ड्रिल शुरू कर दी गई है।
चक्रवात मोंथा की गति और दिशा
| स्थान | दूरी | अनुमानित समय | स्थिति |
|---|---|---|---|
| पोर्ट ब्लेयर | 460 किमी | 26 अक्टूबर | दक्षिण-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है |
| चेन्नई | 950 किमी | 27 अक्टूबर | तेज हवाओं की शुरुआत |
| काकीनाडा | 970 किमी | 28 अक्टूबर रात | टकराने की संभावना |
| ओडिशा तट | 1100 किमी | 29 अक्टूबर | आंशिक प्रभाव |
IMD के अनुसार, चक्रवात की गति और दिशा में लगातार बदलाव देखा जा रहा है।
इसकी केंद्रिय गति 18 किमी/घंटा है, लेकिन हवाओं की अधिकतम रफ्तार 110 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है।
कैसे रखा गया मोंथा नाम?
थाईलैंड ने इस चक्रवात का नाम “मोंथा (Montha)” रखा है।
थाई भाषा में इसका अर्थ है — “सुगंधित या सुंदर फूल।”
हालांकि इस नाम की मधुरता के विपरीत, यह तूफान अपने साथ विनाश की संभावनाएं लेकर आ रहा है।
यह चक्रवात बंगाल की खाड़ी में बन रहे गहरे दबाव (Deep Depression) से उत्पन्न हुआ है और हर घंटे तीव्र होता जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय: क्यों बढ़ रहे हैं चक्रवात
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और समुद्र के तापमान में वृद्धि के कारण बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की संख्या और तीव्रता दोनों बढ़ रही हैं।
डॉ. के. जयशंकर, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक, के अनुसार:
“समुद्र की सतह का तापमान पिछले दशक में 1.2 डिग्री बढ़ा है। यही कारण है कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवात पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली हो रहे हैं।”
पिछले 10 वर्षों में भारत में औसतन हर साल 6–8 चक्रवात दर्ज किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश का प्रभाव दक्षिण और पूर्वी राज्यों पर पड़ा है।
सरकारी प्रयास और नागरिकों के लिए सुझाव
सरकार की पहलें
- तटीय जिलों में NDRF और SDRF की 30 से अधिक टीमें तैनात की गई हैं।
- रेलवे और पोर्ट अथॉरिटीज को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
- सभी नौकाओं और मछुआरों को तट पर लौटने के निर्देश जारी।
- बिजली और पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त जनरेटर भेजे गए हैं।
नागरिकों के लिए सावधानियां
- समुद्र तटों या खुले क्षेत्रों में जाने से बचें।
- घरों के बाहर ढीली वस्तुएं सुरक्षित करें।
- सरकारी हेल्पलाइन और आपदा ऐप्स से जुड़े रहें।
- जरूरत पड़ने पर स्थानीय कंट्रोल रूम से संपर्क करें।
निष्कर्ष: मोंथा का खतरा और तैयारी की परीक्षा
चक्रवात मोंथा (Cyclone Montha) भारत के पूर्वी तट के लिए एक और चेतावनी है कि प्रकृति की ताकत को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
हालांकि प्रशासन की तैयारियां मजबूत हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब यह तूफान 28 अक्टूबर की रात तट से टकराएगा।
फिलहाल राहत की बात यह है कि वैज्ञानिकों के मुताबिक यह तूफान “अत्यधिक गंभीर चक्रवात” में नहीं बदलेगा, लेकिन इसकी रफ्तार और बारिश कई इलाकों में जीवन को प्रभावित कर सकती है।
सतर्कता, तैयारी और संयम ही इस प्राकृतिक आपदा से बचने के तीन सबसे बड़े हथियार हैं।
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Author: AK
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