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भ्रष्ट देशों की रिपोर्ट जारी, पीएम मोदी के दावों की खुली पोल, भारत में भ्रष्टाचार को लेकर नहीं हुआ कोई सुधार

Corruption Report Released: No Improvement in India, Know the Most Honest and Corrupt Countries Globally

आज 12 फरवरी दिन बुधवार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस और अमेरिका के दौरे पर हैं। वहीं दूसरी ओर माघी पूर्णिमा पर स्नान चल रहा है। राजधानी दिल्ली में बजट सत्र के पहले चरण का समापन भी कल गुरुवार को हो जाएगा। बजट सत्र का दूसरा चरण मार्च में शुरू होगा। दिल्ली में भाजपा नया मुख्यमंत्री बनने के लिए लगातार मंथन करने में लगी हुई है। इन सब घटनाओं के बीच लिए जान लेते हैं हमारे देश में भ्रष्टाचार की क्या स्थिति है, कुछ सुधार हुआ की स्थिति जस की तस बनी हुई है। देश में इस साल भी भ्रष्टाचार के मामले में सुधार नहीं हुआ बल्कि और ज्यादा स्थिति खराब हो गई है।

Countries List of Corruption Percepion Index by Transparency International
Countries List of Corruption Percepion Index by Transparency International

हम इसका दावा नहीं कर रहे बल्कि “ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल” की रिपोर्ट के मुताबिक आंकड़े बता रहे हैं। मंगलवार 11 फरवरी को ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने 180 देशों की साल 2025 की भ्रष्टाचार (करप्शन) को लेकर रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कोई सुधार नहीं हुआ । भारत की रैंकिंग में गिरावट आई है। वह 2024 की लिस्ट में 3 पायदान गिरकर 96वें नंबर पर आ गया है। 2023 में भारत 93वें नंबर पर था। इसका मतलब हमारे यहां करप्शन बढ़ा है। पड़ोसी देश चीन 76वें नंबर पर बरकरार है। उसकी रैंकिंग में 2 साल से बदलाव नहीं आया है। वहीं, पाकिस्तान में भी करप्शन बढ़ा है। वह 133 से 135वें नंबर पर आ गया है। श्रीलंका 121वें और बांग्लादेश 149वें नंबर पर है ।

India Stand on Corruption Percepion Index by Transparency International
India Stand on Corruption Percepion Index by Transparency International

डेनमार्क पहले नंबर पर बना हुआ है। वहां सबसे कम भ्रष्टाचार है। फिनलैंड दूसरे और सिंगापुर तीसरे नंबर पर है। जबकि साउथ सूडान (180) सबसे करप्ट देश है। इसके बाद सोमालिया 179वें और वेनेजुएला 178वें स्थान पर है। लिस्ट में सीरिया 177वें और यमन, लीबिया, इरीट्रिया, इक्वाटोरियल गिनी 13 अंकों के साथ 173वें स्थान पर हैं। निकारागुआ 14 अंकों के साथ 172वीं रैंक पर है। जारी की गई रैंकिंग में 1 नंबर पर रहने वाले देश में कम भ्रष्टाचार है और 180वें नंबर पर रहने वाले देश में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है।


बहुत कम देशों में ही भ्रष्टाचार में कमी आई है। एशिया के अधिकतर देशों में धीरे-धीरे भ्रष्टाचार बढ़ा है। भारत समेत एशिया के 71 देशों का स्कोर यहां के औसत स्कोर (45) से नीचे है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन देशों के नेताओं ने भ्रष्टाचार के मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया है। साथ ही इन देशों में स्वतंत्र प्रेस पर भी हमले हुए हैं। इससे भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। वैश्विक भ्रष्टाचार का स्तर चिंताजनक रूप से उच्च बना हुआ है।

Corruption Percepion Index by Transparency International
Corruption Percepion Index by Transparency International

रिपोर्ट में दुनिया भर में गंभीर भ्रष्टाचार सामने आया है। दो तिहाई से अधिक देशों का स्कोर 100 में से 50 से नीचे है। लगभग 6.8 अरब लोग ऐसे देशों में रहते हैं, जिनका सीपीआई स्कोर 50 से कम है, जो दुनिया की कुल आबादी के 85 प्रतिशत के बराबर है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के एक्सपर्ट्स हर देश के पब्लिक सेक्टर में भ्रष्टाचार का आकलन करते हैं। इसके बाद हर देश को 0 से 100 के बीच स्कोर दिया जाता है। जिस देश में जितना ज्यादा भ्रष्टाचार, उसे उतना कम स्कोर दिया जाता है। इसी आधार पर इंडेक्स में रैंकिंग निर्धारित होती है।

करप्शन परसेप्शन इंडेक्स के मुताबिक, भ्रष्टाचार दुनिया के हर हिस्से में एक खतरनाक समस्या है, लेकिन कई देशों में बेहतरी के लिए बदलाव हो रहा है। शोध से यह भी पता चला है कि भ्रष्टाचार जलवायु कार्रवाई के लिए एक बड़ा खतरा है। यह उत्सर्जन को कम करने और ग्लोबल वार्मिंग के अपरिहार्य प्रभावों के अनुकूल होने की प्रगति को बाधित करता है।साल 2012 से 32 देशों ने अपने भ्रष्टाचार के स्तर को काफी कम किया है। लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है। क्योंकि 148 देश इसी समय के दौरान अपनी पोजिशन पर स्थिर रहे हैं या उनकी हालत और खराब हो गई है।

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AK
Author: AK

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