
आज बात करेंगे देश के तमाम उन कोचिंग संस्थानों की जो विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं छात्र-छात्राओं को बड़े-बड़े सपने दिखाकर नामचीन इंस्टिट्यूट्स में दाखिला करवाने का दावा करते हैं। अब ऐसे कोचिंग इंस्टिट्यूट्स की खैर नहीं है। ऐसे कोचिंग संस्थानों पर केंद्र सरकार ने अब लगाम कस दी है। पिछले दो दशक से कोटा, देहरादून, पटना, लखनऊ, दिल्ली, प्रयागराज, आगरा और जयपुर समेत तमाम शहरों में हजारों की संख्या में कोचिंग संस्थान खुल गए हैं। इन कोचिंग संस्थानों का उद्देश्य पैसा कमाना रह गया है। यह कोचिंग सेंटर्स विद्यार्थियों और अभिभावकों से झूठ बोलकर और विज्ञापन के सहारे बड़े स्थान में एडमिशन दिलाने के नाम पर बड़े-बड़े वादे करते हैं।
इसके साथ विद्यार्थियों को सफलता के नाम पर सौ फीसदी गारंटी देते हैं। इसी को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने अब कोचिंग इंस्टीट्यूट्स के विज्ञापनों को लेकर गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत कोचिंग सेंटर्स 100% सिलेक्शन और नौकरी का वादा नहीं कर सकेंगे। गाइलाइन में ‘कोचिंग’ को एकेडमिक सपोर्ट, एजुकेशन, गाइडेंस, स्टडी प्रोग्राम और ट्यूशन को शामिल करने के लिए परिभाषित किया गया है, लेकिन इसमें काउंसलिंग, स्पोर्ट्स और क्रिएटिव एक्टीविटीज को शामिल नहीं किया गया है। कोचिंग सेंटर सेलेक्शन के बाद लिखित सहमति हासिल किए बिना सफल उम्मीदवारों के नाम, फोटो या प्रशंसापत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। उन्हें अस्वीकरणों को प्रमुखता से दिखाना चाहिए और कोर्सों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा करना चाहिए। भ्रामक और गुमराह करने वाले विज्ञापन देने पर कोचिंग सेंटर्स पर जुर्माना लगेगा। ये गाइडलाइंस सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने जारी की हैं।
सीसीपीए ने शिकायतें मिलने के बाद अब तक 18 कोचिंग सेंटर्स पर 54 लाख 60 रुपए का जुर्माना लगाया है। सीसीपीए मुख्य आयुक्त और उपभोक्ता मामले विभाग सचिव, निधि खरे ने नई दिल्ली में बताया कि कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम के लिए दिशा-निर्देश, 2024, का उद्देश्य छात्रों और आम जनता को कोचिंग केंद्रों द्वारा आमतौर पर अपनाए जाने वाले भ्रामक विपणन तौर-तरीकों से बचाना है।कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापन रोकथाम के लिए दिशा-निर्देशों पर तत्कालीन सीसीपीए मुख्य आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी और उसमें केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, शिक्षा मंत्रालय, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में), राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) दिल्ली, विधि फर्म और उद्योग हितधारकों जैसे संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। सीसीपीए द्वारा कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापन रोकथाम के लिए दिशानिर्देश लाने की आवश्यकता पर समिति के सदस्यों में आम सहमति बनी थी। समिति ने पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद अपने सुझाव प्रस्तुत किए और उनके आधार पर सीसीपीए ने 16 फरवरी 2024 को मसौदा दिशानिर्देश सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए रखे। शिक्षा मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), एएलएलईएन करियर इंस्टीट्यूट प्राइवेट लिमिटेड, इंडिया एडटेक कंसोर्टियम और इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई), एफआईआईटीजेईई, करियर 360 कोचिंग प्लेटफॉर्म, चिर्रावुरी रिसर्च फाउंडेशन फॉर ह्यूमन एंड ग्लोबल रिफॉर्म्स, सिविक इनोवेशन फाउंडेशन, वाधवानी फाउंडेशन और कंज्यूमर एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर (सीईआरसी) सहित 28 विभिन्न हितधारकों ने सार्वजनिक सुझाव भेजे थे।
ये दिशानिर्देश कोचिंग में लगे प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होंगे, जिसका मतलब सिर्फ कोचिंग सेंटर ही नहीं है, बल्कि विज्ञापनों के माध्यम से अपनी सेवाओं को बढ़ावा देने वाले किसी भी एंडोर्सर या सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित व्यक्ति पर भी लागू होंगे। कोचिंग सेंटरों को अपना नाम या प्रतिष्ठा देने वाले एंडोर्सर के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि वे जिन दावों का समर्थन करते हैं वे सटीक और सत्य हैं। कोचिंग संस्थानों का समर्थन करने वाले एंडोर्सर को अब अपने बढ़ावा देने वाले दावों को सत्यापित करना होगा। यदि वे झूठी सफलता दर या भ्रामक गारंटी का समर्थन करते हैं, तो कोचिंग सेंटरों के साथ-साथ उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाएगा।
Author: AK
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