हिमाचल में बादल फटने और भारी बारिश से तबाही, 3 की मौत, 21 लापता। 7 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी, प्रशासन सतर्क।
Cloudburst Devastation in Himachal: 3 Dead, 21 Missing
प्रकृति का प्रकोप: हिमाचल में बादल फटने से मची भारी तबाही
मानसून के आगमन के साथ ही हिमाचल प्रदेश एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया है। पहाड़ों की गोद में बसा यह खूबसूरत राज्य इन दिनों भारी वर्षा, भूस्खलन और बादल फटने जैसी आपदाओं का सामना कर रहा है। हाल ही में राज्य के कांगड़ा, कुल्लू और चंबा जिलों में बादल फटने और भारी बारिश के कारण तीन लोगों की मौत हो गई और 21 से अधिक लोग लापता हैं।
घटनाएं इतनी भयावह हैं कि सैकड़ों लोग प्रभावित हुए हैं, घर उजड़ गए हैं, पुल और सड़कें बह गई हैं, और लोग अपने प्रियजनों की तलाश में बेसुध हैं।
कांगड़ा जिले में जलप्रलय: जलविद्युत परियोजना में तबाही
मनूनी खड्ड बनी संकट की धारा
कांगड़ा जिले के धर्मशाला क्षेत्र में खनियारा नामक स्थान पर बादल फटने से मनूनी खड्ड में अचानक बाढ़ आ गई। इस बाढ़ की चपेट में निर्माणाधीन इंदिरा प्रियदर्शिनी जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे करीब 20 मजदूर आ गए। इनमें से दो मजदूरों के शव बरामद कर लिए गए हैं जबकि अन्य की तलाश जारी है।
बाढ़ के दौरान मजदूरों के शेड खड्ड के मुहाने के पास बने हुए थे, जहां अवैज्ञानिक तरीके से मलबा डंप किया गया था। इससे बहाव की दिशा बदल गई और मजदूरों के शेड इसकी चपेट में आ गए।
प्रशासन और SDRF का युद्धस्तर पर अभियान
स्थानीय प्रशासन, SDRF और NDRF की टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं। कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा और पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्निहोत्री खुद घटनास्थल पर मौजूद हैं।
अभी तक की जानकारी के अनुसार, परियोजना स्थल पर 280 मजदूर मौजूद थे, जिनमें से 220 को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
कुल्लू में चार स्थानों पर फटा बादल, भारी तबाही
बंजार, सैंज, मनाली और गड़सा में नुकसान
कुल्लू जिले में चार प्रमुख स्थानों – सैंज, बंजार, मनाली और गड़सा – में बादल फटने से भारी तबाही हुई है। इन इलाकों में तीन लोगों के बहने की सूचना है, जबकि दो वाहन, एक पुल, चार मकान, एक अस्थायी दुकान और एक पशुशाला क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
मनाली के अटल टनल मार्ग पर भी स्नो गैलरी के पास अचानक बाढ़ आ गई जिससे यातायात बाधित हुआ।
ब्रह्मगंगा में फंसे वाहन
मणिकर्ण घाटी के ब्रह्मगंगा नाले में बाढ़ से 12 से अधिक वाहन फंस गए हैं। इस घटना ने न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय लोगों की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
चंबा में कार खाई में गिरी, पंचायत सचिव की मौत
चंबा जिले के डलहौजी क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण बोंखरी मोड़-नगाली मार्ग पर एक कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। इस हादसे में पंचायत सचिव मनोज की मौके पर ही मौत हो गई।
यह दुर्घटना तब हुई जब कार चालक पहाड़ी से गिरते पत्थरों से बचने की कोशिश कर रहा था। यह घटना बताती है कि किस तरह छोटे-छोटे प्रयास भी जीवन पर भारी पड़ सकते हैं।
हवाई उड़ानों पर भी पड़ा असर
प्रमुख जिलों में उड़ानें रद्द
कुल्लू, कांगड़ा और शिमला जिलों में खराब मौसम के कारण हवाई उड़ानों पर भी असर पड़ा है। यात्रियों को रद्द और विलंबित उड़ानों की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
खनियारा क्षेत्र में जलविद्युत परियोजना का काम भी वर्षा के कारण ठप पड़ा हुआ है। यहां रह रहे मजदूरों को शेडों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
7 जिलों में अलर्ट, मौसम विभाग ने दी चेतावनी
बिलासपुर से ऊना तक भारी बारिश का खतरा
मौसम विभाग ने हिमाचल के 7 जिलों – बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर, सोलन और ऊना – में अगले 24 घंटों के भीतर अति भारी वर्षा की चेतावनी दी है।
लोगों को दी गई सावधानी बरतने की सलाह
प्रशासन और पुलिस विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें। अनावश्यक यात्रा करने से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।
भूस्खलन और नदियों का कहर
लाहुल स्पीति जिले में जाहलमा नाले में बाढ़ के कारण चंद्रभागा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। नदी पर बनी कृत्रिम झील से पानी निकलना शुरू हो गया है जिससे निचले क्षेत्रों में जलभराव और भूमि कटाव का खतरा बढ़ गया है।
जसरथ गांव को जोड़ने वाला झूला पुल भी बह गया है, जिससे गांव का संपर्क टूट गया है।
क्या कहता है यह सब? प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की जरूरत
पर्यावरण संतुलन की अनदेखी बनी तबाही का कारण
हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में जलवायु परिवर्तन और अनियोजित विकास कार्य बड़े पैमाने पर प्राकृतिक आपदाओं की वजह बनते जा रहे हैं।
अवैज्ञानिक निर्माण कार्य, अवैध खनन, वनों की कटाई और कंक्रीटीकरण ने पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ दिया है। इसके परिणामस्वरूप हर साल मानसून के दौरान राज्य को भारी क्षति उठानी पड़ती है।
सरकार और प्रशासन की भूमिका
सरकार को चाहिए कि:
- पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के लिए सख्त दिशानिर्देश बनाए जाएं।
- जल निकासी व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
- SDRF और NDRF की तैयारियों को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाए।
- आम जनता के बीच आपदा प्रबंधन की जागरूकता फैलाई जाए।
निष्कर्ष: सावधानी और समझदारी ही बचा सकती है जान
हिमाचल प्रदेश एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। बादल फटना, भूस्खलन, बाढ़ और लापता लोग हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या हम आपदा के लिए तैयार हैं?
सिर्फ सरकारी प्रयास ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा। जब तक हम सतर्क नहीं होंगे, तब तक प्राकृतिक आपदाएं हर साल यूं ही हमारी जिंदगियों को छीनती रहेंगी।
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Author: AK
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