चीन ने एक बार फिर भारत समेत कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चीन में ही पहली बार कोविड-19 महामारी सामने आई थी। अब एक बार फिर चीन में तेजी से फैल रही रहस्यमयी बीमारी से भारत समेत दुनिया की टेंशन बढ़ने लगी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी अलर्ट हो गया है।वैज्ञानिकों का कहना है कि इस हालात पर कड़ी निगरानी की जरूरत है। चीन में फैल रही रहस्यमयी बीमारी को लेकर भारत सरकार ने सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी की है। हेल्थ मिनिस्ट्री ने पब्लिक हेल्थ सिस्टम को अपडेट करने के लिए कहा है। किसी बड़ी बीमारी के फैलने को लेकर अस्पतालों में ऑक्सीजन और दवाएं तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले दिनों चीनी मीडिया ने स्कूलों में एक बीमारी फैलने की बात कही थी। इससे पीड़ित बच्चों के फेफड़ों में जलन, तेज बुखार, खांसी और जुकाम जैसे लक्षण दिख रहे हैं।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने चीन से इस बीमारी से जुड़ी जानकारी मांगी है। चीनी अधिकारियों का कहना है कि मार्च तक इस बीमारी का खतरा ज्यादा है। इस बीमारी के बढ़ते प्रकोप के चलते चीन के उत्तरी हिस्से में स्कूलों को बंद करना पड़ा है। चीन के स्वास्थ्य आयोग ने कहा कि रोगाणुओं का संयोजन तीव्र श्वसन संक्रमण में वृद्धि का कारण बन रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के प्रवक्ता मी फेंग का कहना है कि इन्फ्लुएंजा, मामलों में बढ़ोतरी के मुख्य कारणों में से एक है। रहस्यमयी बीमारी के चलते चीन की राजधानी बीजिंग और उसके आसपास सभी अस्पताल मरीजों से भर गए हैं। बीजिंग के एक अस्पताल में इस बीमारी से पीड़ित करीब 1200 मरीज हर दिन इमरजेंसी में भर्ती हो रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के अधिकारियों ने 13 नवंबर को श्वसन संबंधी बीमारियों में वृद्धि की सूचना दी थी। उसके अनुसार, आयोग के अधिकारियों ने कहा था कि श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि कोविड-19 से निपटने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन से संबंधित पाबंदियां हटा दी गई हैं। महामारी संबंधी प्रतिबंध हटाए जाने पर अन्य देशों में भी श्वसन संबंधी बीमारियों जैसे ‘रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस’ या आरएसवी के मामलों में वृद्धि देखी गई थी। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि लगभग एक सप्ताह बाद मीडिया की खबरों में उत्तरी चीन में बच्चों में अज्ञात निमोनिया के मामलों की सूचना दी गई। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि उसने चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक बैठक की, जिसमें वह आंकड़े मुहैया कराए गए, जिसका उसने अनुरोध किया था। आंकड़ों में अक्टूबर के बाद से जीवाणु संक्रमण, आरएसवी, इन्फ्लूएंजा और सामान्य सर्दी वायरस समेत विभिन्न बीमारियों के कारण बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में वृद्धि देखी गई है।
Author: AK
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