गुरु, जनवरी 15, 2026

Chhath Puja 2025 Sandhya Arag Time: छठ पूजा 2025 संध्या अर्घ्य समय – जानिए आपके शहर का सही समय

Chhath Puja 2025 Sandhya Arag Time – Know Your City’s Timing

छठ पूजा 2025 के संध्या अर्घ्य का महत्व और प्रमुख शहरों में सूर्यास्त का सटीक समय जानिए।

Chhath Puja 2025 Sandhya Arag Time – Know Your City’s Timing


छठ पूजा का पर्व बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और देश के कई हिस्सों में बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित यह त्योहार चार दिनों तक चलता है और इसका हर दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। छठ पूजा में तीसरे दिन संध्या अर्घ्य का विशेष महत्व होता है, जब श्रद्धालु अस्त होते सूर्य को जल अर्पित करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं।

इस वर्ष छठ पूजा का पर्व 25 अक्टूबर 2025 से आरंभ होकर 28 अक्टूबर 2025 तक मनाया जाएगा। पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य का अनुष्ठान होगा। 27 अक्टूबर 2025 को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा, जो सूर्यास्त के समय संपन्न किया जाता है। यह वह क्षण होता है जब भक्त सूर्य देव को दिनभर के प्रकाश, ऊर्जा और जीवन के लिए धन्यवाद देते हैं।

संध्या अर्घ्य का धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व है। माना जाता है कि अस्त होते सूर्य को जल अर्पित करने से व्यक्ति अपने जीवन के अंधकार को दूर करने की शक्ति प्राप्त करता है। वहीं उगते सूर्य को अर्घ्य देने का अर्थ है नए जीवन, नई शुरुआत और ऊर्जा का स्वागत करना। छठ पूजा में सूर्य की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि सूर्य ही जीवन और प्रकृति के संतुलन का आधार है।

देशभर के लाखों लोग इस अवसर पर घाटों, नदियों और तालाबों के किनारे एकत्रित होते हैं। हर कोई संध्या अर्घ्य का इंतजार करता है ताकि समय पर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जा सके। नीचे प्रमुख शहरों के सूर्यास्त का समय दिया गया है, जिसके अनुसार श्रद्धालु अर्घ्य देंगे।

Chhath Puja 2025 Sandhya Arag Time – Know Your City’s Timing

देश के प्रमुख शहरों में सूर्यास्त का समय – छठ पूजा 2025 संध्या अर्घ्य समय

बिहार के प्रमुख शहरों में सूर्यास्त का समय
पटना – शाम 05 बजकर 12 मिनट
भागलपुर – शाम 05 बजकर 05 मिनट
मुजफ्फरपुर – शाम 05 बजकर 10 मिनट
गया – शाम 05 बजकर 13 मिनट
दरभंगा – शाम 05 बजकर 08 मिनट
बेगूसराय – शाम 05 बजकर 08 मिनट
सीतामढ़ी – शाम 05 बजकर 09 मिनट
सीवान – शाम 05 बजकर 14 मिनट
कटिहार – शाम 05 बजकर 02 मिनट
सहरसा – शाम 05 बजकर 06 मिनट

झारखंड के प्रमुख शहरों में सूर्यास्त का समय
रांची – शाम 05 बजकर 13 मिनट
देवघर – शाम 05 बजकर 07 मिनट
जमशेदपुर – शाम 05 बजकर 11 मिनट
बोकारो – शाम 05 बजकर 10 मिनट
धनबाद – शाम 05 बजकर 08 मिनट
हजारीबाग – शाम 05 बजकर 13 मिनट
दुमका – शाम 05 बजकर 05 मिनट
जामताड़ा – शाम 05 बजकर 07 मिनट
चतरा – शाम 05 बजकर 15 मिनट
रामगढ़ – शाम 05 बजकर 15 मिनट

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में सूर्यास्त का समय
लखनऊ – शाम 05 बजकर 27 मिनट
गोरखपुर – शाम 05 बजकर 18 मिनट
आगरा – शाम 05 बजकर 38 मिनट
वाराणसी – शाम 05 बजकर 20 मिनट
प्रयागराज – शाम 05 बजकर 25 मिनट
कानपुर – शाम 05 बजकर 30 मिनट

अन्य राज्यों के प्रमुख शहरों में सूर्यास्त का समय
दिल्ली – शाम 05 बजकर 40 मिनट
नोएडा – शाम 05 बजकर 40 मिनट
मुंबई – शाम 06 बजकर 08 मिनट
कोलकाता – शाम 05 बजकर 04 मिनट
चैन्नई – शाम 05 बजकर 44 मिनट
बेंगलुरु – शाम 05 बजकर 55 मिनट
जयपुर – शाम 05 बजकर 45 मिनट
भोपाल – शाम 05 बजकर 40 मिनट
गांधीनगर – शाम 06 बजकर 03 मिनट

हर शहर में सूर्यास्त का समय अलग-अलग होने के कारण श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय पंचांग या कैलेंडर से भी सही समय की पुष्टि करें। अर्घ्य सूर्यास्त के लगभग पांच मिनट पहले से लेकर सूर्य के क्षितिज से पूरी तरह छिपने तक दिया जाता है।

संध्या अर्घ्य के समय घाटों पर भक्तजन पीत वस्त्र पहनकर सूर्य को जल अर्पित करते हैं। उनके साथ परिवार के सदस्य भी व्रती के चारों ओर दीप जलाते हैं और छठ गीतों की गूंज से वातावरण भक्ति में सराबोर हो जाता है। जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देना श्रद्धा, संयम और आस्था की प्रतीक परंपरा है।

इस दिन छठी मैया की पूजा की जाती है और फलों, ठेकुआ, गुड़, नारियल, सिंघाड़ा, केला, ईख और चावल से बनी प्रसाद की टोकरी सूर्य देव को अर्पित की जाती है। व्रती दिनभर निर्जला उपवास रखकर शाम को सूर्यास्त के समय अर्घ्य देते हैं। ऐसा माना जाता है कि सूर्य को अर्घ्य देने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

संध्या अर्घ्य का एक गहरा वैज्ञानिक पक्ष भी है। सूर्यास्त के समय जब सूर्य की किरणें क्षितिज के समीप होती हैं, तो उनका पराबैंगनी प्रभाव कम होता है और लाल-पीले रंग की किरणें मानव शरीर के लिए लाभकारी मानी जाती हैं। यह ऊर्जा शरीर में संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। इसलिए छठ पूजा के दौरान डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा को स्वास्थ्य और विज्ञान से भी जोड़ा जाता है।

छठ पूजा की एक और खासियत यह है कि यह किसी जाति या वर्ग विशेष का त्योहार नहीं है। यह लोक आस्था का पर्व है जिसमें हर व्यक्ति समान भाव से भाग लेता है। घाटों पर कोई भेदभाव नहीं होता, हर कोई एक साथ सूर्य की आराधना करता है। यह सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर उदाहरण है।

2025 में छठ पूजा के अवसर पर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और देशभर में विशेष तैयारी की जा रही है। प्रशासन ने घाटों की सफाई, सुरक्षा और प्रकाश व्यवस्था के लिए विशेष योजनाएं बनाई हैं। नदी किनारों पर साफ-सफाई और प्लास्टिक निषेध के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि यह पर्व पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाया जा सके।

संध्या अर्घ्य के समय श्रद्धालु जब हाथों में सूप लेकर जल में खड़े होते हैं, तो पूरा वातावरण सूर्यास्त की लालिमा में नहाया हुआ दिखाई देता है। यह दृश्य न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी भारत की विविधता और एकता का प्रतीक है।

छठ पूजा 2025 में जब 27 अक्टूबर की शाम सूर्यास्त होगा, तो हर घाट पर लाखों दीपक जलेंगे, गीत गूंजेंगे और आस्था का समुद्र उमड़ पड़ेगा। यही है छठ पूजा का वास्तविक स्वरूप — संयम, श्रद्धा और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व।

इस वर्ष संध्या अर्घ्य के समय सूर्यास्त के ये अनुमानित समय आपके लिए मार्गदर्शक हैं। व्रती महिलाएं और पुरुष अपने क्षेत्र के सटीक समय का पालन करते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे और परिवार की खुशहाली, संतान की उन्नति और जीवन में शांति की प्रार्थना करेंगे।

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Author: AK

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