आज अक्षय तृतीया है। इस पर्व से कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। वैसे तो यह त्योहार पूरे देश भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन देवभूमि उत्तराखंड में अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाते हैं। आखिरकार वह दिन आ गया है जब इस साल चार धाम यात्रा की आज से शुरुआत हो चुकी है। गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट आज पूरे विधि विधान के साथ खोल दिए गए। इसके साथ ही करीब 6 महीने तक चलने वाली चार धाम यात्रा की विधिवत शुरुआत हो गई। यात्रा के लिए यमुनोत्री व गंगोत्री धाम की फूलों से भव्य सजावट की गई है और पड़ावों पर खासी चहल-पहल है। इससे यात्रा रूट के होटल व अन्य व्यवसायियों के चेहरे खिले हुए हैं। उत्तरकाशी व बड़कोट से लेकर गंगोत्री-यमुनोत्री धाम तक गंगा-यमुना की जय-जयकार गूंज रही है। कपाट खुलने के मौके पर यमुनोत्री में करीब 7,000 और गंगोत्री में करीब 5,000 तीर्थ यात्रियों के मौजूद रहे। बुधवार सुबह 10 बजकर 30 मिनट के अभिजीत मुहूर्त पर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए गंगोत्री धाम के कपाट खोले गए।
कपाटोद्धघाटन मौके पर समूचा गंगोत्री धाम मां गंगे के जयकारों से गूंज उठा। कपाटोद्धघाटन मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री धाम पहुंचकर माँ गंगा के दर्शन किए। गंगोत्री धाम के कपाट खुलने से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद वहां पहुंचे। सीएम धामी के हेलीकॉप्टर ने हर्षिल हेलीपैड पर लैंड किया. हर्षिल से मुख्यमंत्री कार से गंगोत्री धाम पहुंचे. गंगोत्री धाम में आज कपाट खुलने पर भक्तों की अपार भीड़ मौजूद रही। मंदिर को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है।उसके बाद दोपहर 11 बजकर 57 मिनट पर यमुनोत्री धाम के कपाट 6 माह के लिए श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का आगाज हो गया है। श्रद्धालु अब गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों में दर्शन कर सकेंगे । केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई और बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई को खुलेंगे। अभी तक 22 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने पंजीकरण कराया है।
उत्तराखंड में चार धाम में गंगोत्री और यमुनोत्री आते हैं
चारधाम यात्रा के दूसरे पड़ाव में गंगोत्री की यात्रा करने का विधान है। तीन अन्य धाम यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ हैं। गंगोत्री गंगा नदी का उद्गम स्थल है। आसान शब्दों में समझें तो उत्तराखंड के गढ़वाल में गंगोत्री हिमनद से गंगा नदी निकलती है। समुद्रतल से इसकी ऊंचाई 3042 मीटर है। नदी की धारा को भागीरथी कहा जाता है। सभी नदियों का सबसे पवित्र गंगा है। गंगा शुद्धता का प्रतीक है। यह सभी पापों को दूर करती है यह एक मां देवी की रुप में जानी जाती है जो जीवन के जन्म से मृत्यु तक सभी पापो को दूर करती है। माना जाता है कि नदी को विष्णु के बड़े पैर से पैदा हुई थी। कहा जाता है कि आसमान के माध्यम से (आकाशगंगा की तरह) प्रवाह होता है। वहीं यमुना नदी हिमालय की बंदरपूंछ पर्वत श्रेणी में मौजूद यमुनोत्री ग्लेशियर से लगभग 6,387 मीटर की ऊंचाई पर निकलती है। यमुनोत्री धाम चार धाम यात्रा का एक प्रमुख हिस्सा है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। यमुना नदी उत्तराखंड से निकलकर हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों से होकर बहती है। आखिर में यह नदी प्रयागराज (इलाहाबाद) में गंगा नदी से संगम करती है। यमुना नदी धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इन्हें गंगा नदी की बहन के रूप में भी पूजा जाता है। इस समय यमुनोत्री धाम का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस है। हल्की धूप खुली हुई है जिससे लोगों को ठंड का एहसास काम हो रहा है। मौसम विभाग ने चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले मौसम में बदलाव की चेतावनी जारी की है। विभाग ने 1 और 2 मई को गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवा चलने की आशंका जताई है। 3 से 5 मई के बीच बारिश के साथ आंधी भी आ सकती है। ऐसे में ऊनी कपड़े, छतरी, रेनकोट साथ रखें। सरकार ने जगह-जगह मेडिकल कैंप बना रखे हैं, फिर भी फर्स्ट एड किट और जरूरी दवाएं साथ रखना की सलाह दी गई है।
धामी सरकार ने चार यात्रा शुरू होने से पहले गाइडलाइन जारी की
धामी सरकार ने यात्रा शुरू होने से पहले गाइडलाइन जारी की है। यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करवाते समय मेडिकल हिस्ट्री बतानी जरूरी है। यात्रा के समय रजिस्ट्रेशन प्रूफ, आईडी कार्ड, मंदिर पास, ट्रैवल परमिट, मेडिकल सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस पेपर जैसे डॉक्यूमेंट साथ रखना जरूरी है। चारधाम यात्रा मार्ग को 15 सुपर जोन, 41 जोन और 217 सेक्टरों में बांटा गया है। पुलिस ने यात्रा मार्ग पर इस बार कुल 624 सीसीटीवी कैमरों को भी सक्रिय किया है। यात्रा मार्ग पर नौ एएसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारियों को अलग-अलग स्थानों पर कैंप करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही इस साल पहली बार 10 कंपनी अर्द्धसैनिक बलों की मांग भी केंद्र सरकार से की गई है। सबसे महत्वपूर्ण यातायात प्लान को लेकर बार बड़ी तैयारियों का दावा किया गया है। इस साल पहले से ही प्लान ए, बी और सी के आधार पर यातायात प्रबंधन किया जाएगा। इसके तहत विभिन्न मार्गों पर भीड़ और अत्यधिक भीड़ होने पर वैकल्पिक मार्गों को चिह्नित किया गया है। इन पर अधिकारियों और कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है।
चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य है
चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य है और इसके लिए उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन पंजीकरण की भी व्यवस्था की है। यात्रा के लिए आप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करने का भी विकल्प है। यात्रा के शुरुआती प्वांइट हरिद्वार में ऑफलाइन पंजीकरण केंद्र हैं। हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए 20 काउंटर बनाये गये हैं। विकलांग और विदेशी नागरिकों के लिए अलग से कांउटर बनाये गये हैं। वहीं ऑनलाइन पंजीकरण 20 मार्च से ही शुरू है। इसके लिए आपको वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in पर लॉगइन करना होगा. रजिस्ट्रेशन करते समय सही मोबाइल नंबर दर्ज करें, ताकि आपको यात्रा से संबंधित सूचना मिल सके। चारों धाम में से दो- गंगोत्री एवं बदरीनाथ धाम तक सड़क है, वहीं यमुनोत्री एवं केदारनाथ के लिए आपको कुछ दूर पैदल ट्रैकिंग या घोड़े या पालकी के माध्यम से जाना होगा या फिर आप हेलीकॉप्टर की बुकिंग करवा सकते हैं। लेकिन हेलीकॉप्टर बुक करते समय किसी भी तरह की धोखाधड़ी से सावधान रहें। हेलीकॉप्टर बुक करने के लिए आईआरसीटीसी की वेबसाइट https://heliyatra.irctc.co.in/ पर जा सकते हैं।
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Author: AK
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