चारधाम यात्रा 2025 पर आपदा का असर, गंगोत्री-यमुनोत्री बंद। अब केवल केदारनाथ और बदरीनाथ धाम खुले, भूस्खलन बना बड़ी चुनौती।
Chardham Yatra 2025: Disaster Impact, Kedarnath-Badrinath Continue Amid Challenges
प्रस्तावना
भारत की आध्यात्मिक धरोहरों में चारधाम यात्रा का अपना विशेष महत्व है। हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए उत्तराखंड की कठिन पहाड़ियों की ओर रुख करते हैं। लेकिन वर्ष 2025 की यात्रा प्राकृतिक आपदाओं और भारी बारिश के कारण बड़ी चुनौती बन गई है। उत्तरकाशी जिले में आई आपदा ने गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा को पूरी तरह रोक दिया है। ऐसे में इस बार श्रद्धालुओं की आस्था फिलहाल केवल केदारनाथ और बदरीनाथ धाम पर टिकी हुई है। हालांकि इन दोनों धामों तक पहुंचने का मार्ग भी भूस्खलन की वजह से बार-बार बाधित हो रहा है।
आपदा का असर: दो धामों पर लगा ब्रेक
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम बंद
भारी बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में आई आपदा के कारण उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा को रोक दिया गया है। आमतौर पर मानसून सीजन में यात्रा धीमी हो जाती है, लेकिन इस बार हालात अधिक गंभीर हैं। जहां आम दिनों में जयकारों से गूंजते धाम होते थे, वहीं आज वहां सन्नाटा पसरा हुआ है।
श्रद्धालुओं की निराशा
दूर-दराज से आए कई श्रद्धालु गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन नहीं कर पा रहे। हालांकि, सरकार और प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से यात्रा पर रोक लगाना उचित समझा है ताकि कोई अप्रिय हादसा न हो।
केदारनाथ और बदरीनाथ पर आस्था कायम
लाखों श्रद्धालु कर रहे दर्शन
पर्यटन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 30 अप्रैल से शुरू हुई चारधाम यात्रा में अब तक 42.54 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
- केदारनाथ धाम में अब तक लगभग 14.80 लाख तीर्थयात्री पहुंचे।
- बदरीनाथ धाम में 12.78 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
यात्रा में बाधा बने भूस्खलन
बदरीनाथ धाम मार्ग पर कमेड़ा और लामबगड़ क्षेत्रों में लगातार भूस्खलन हो रहा है। वहीं केदारनाथ जाने के रास्ते में सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच यात्रा कई बार रुक जाती है। इससे श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मानसून और यात्रा की चुनौती
बारिश बनी बड़ी समस्या
हर साल मानसून के समय चारधाम यात्रा प्रभावित होती है। लेकिन इस बार की भारी बारिश ने स्थिति और भी गंभीर कर दी है। सड़कों पर पानी भरना, पहाड़ों से पत्थर गिरना और मार्ग बंद होना आम समस्या बन चुकी है।
यात्रियों के लिए चेतावनी
मौसम विभाग ने बार-बार चेतावनी दी है कि तीर्थयात्री यात्रा पर निकलने से पहले मौसम की जानकारी लें। खासकर भूस्खलन-प्रभावित क्षेत्रों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
पर्यटन मंत्री का बयान
उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि इस आपदा के कारण चारधाम यात्रा की रफ्तार थमी है। जैसे ही मौसम सामान्य होगा, यात्रा फिर से गति पकड़ेगी। उन्होंने यह भी बताया कि भारी बारिश से भूस्खलन की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए यात्रियों को सुरक्षित माहौल देखकर ही धामों की ओर निकलना चाहिए।
श्रद्धालुओं की संख्या (चारधाम व हेमकुंड साहिब)
| धाम | दर्शन कर चुके तीर्थयात्री (लाख में) |
|---|---|
| केदारनाथ | 14.80 |
| बदरीनाथ | 12.78 |
| गंगोत्री | 6.69 |
| यमुनोत्री | 5.86 |
| हेमकुंड साहिब | 2.49 |
चारधाम यात्रा का धार्मिक महत्व
चारधाम यात्रा केवल पर्यटन नहीं बल्कि आस्था और विश्वास की यात्रा है।
- केदारनाथ धाम भगवान शिव को समर्पित है।
- बदरीनाथ धाम भगवान विष्णु का प्रमुख मंदिर है।
- गंगोत्री धाम गंगा नदी के उद्गम से जुड़ा है।
- यमुनोत्री धाम यमुना नदी की उत्पत्ति का प्रतीक है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि चारधाम यात्रा करने से जीवन के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
आपदा प्रबंधन और प्रशासन की तैयारी
सुरक्षा पर जोर
राज्य सरकार और प्रशासन लगातार यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। आपदा प्रबंधन दल, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी यात्रा मार्गों पर तैनात हैं।
डिजिटल निगरानी
अब यात्रियों को ऑनलाइन पंजीकरण और SMS अलर्ट के जरिए मौसम और यात्रा की जानकारी दी जा रही है। इससे लोगों को पहले ही सावधानी बरतने का अवसर मिल रहा है।
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Author: AK
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