चमोली के थराली में पुल गिरने पर सीएम धामी ने तीन इंजीनियरों को निलंबित किया, ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज की गई। भ्रष्टाचार पर कड़ा एक्शन।
Chamoli Bridge Collapse: Strict Action on Corruption
चमोली पुल हादसा: लापरवाही और भ्रष्टाचार पर सीएम धामी का बड़ा एक्शन
उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली क्षेत्र में एक निर्माणाधीन पुल के अचानक टूटने की घटना ने शासन और जनता को हिला कर रख दिया है। यह हादसा सिर्फ एक पुल के गिरने का नहीं, बल्कि तंत्र में व्याप्त लापरवाही और भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए तीन इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है और ठेकेदार पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया है।
घटना का विवरण: कैसे गिरा करोड़ों का पुल
60 मीटर लंबा बेली ब्रिज, 2.80 करोड़ की लागत
यह हादसा चमोली जिले के थराली तहसील के ढाढरबगड़ इलाके में हुआ, जहां 60 मीटर लंबा एक बेली ब्रिज लगभग पूरा बन चुका था। इस ब्रिज की कुल लागत 2.80 करोड़ रुपये थी। पुल का निर्माण कार्य शासन ने वर्ष 2024 में स्वीकृत किया था और कार्य दो महीने पहले ही शुरू हुआ था।
निर्माण में गंभीर लापरवाही
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, निर्माण के अंतिम चरण में जब ब्रिज को सपोर्ट किया जा रहा था, उस वक्त ठेकेदार के श्रमिकों ने एक साथ रस्से और सहारे हटा दिए। इसके कारण पुल अपने वजन को नहीं सह पाया और सीधे गदेरे (छोटी नदी) में जा गिरा। सौभाग्य से इस दौरान कोई व्यक्ति पुल पर मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
सीएम धामी का सख्त संदेश: जिम्मेदारी से काम करें अधिकारी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में साफ कर दिया कि सरकार भ्रष्टाचार और लापरवाही को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा:
“हर अधिकारी और कर्मचारी को अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी निष्ठा से कार्य करना चाहिए। यदि कोई अपने दायित्वों में लापरवाही करता है या भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।”
सस्पेंड हुए अधिकारी: कौन हैं जिम्मेदार?
लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडेय ने जिन तीन इंजीनियरों को निलंबित किया है, उनके नाम निम्नलिखित हैं:
- दिनेश मोहन गुप्ता – अधिशासी अभियंता, थराली
- नवीन लाल – अधिशासी अभियंता, कर्णप्रयाग
- आकाश हुड़िया – सहायक अभियंता, थराली
इन सभी अधिकारियों पर कार्य की गुणवत्ता की निगरानी न करने, सुरक्षा मानकों का पालन न करने और विभागीय लापरवाही का आरोप है।
ठेकेदार पर दर्ज हुआ मुकदमा
चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी के निर्देश पर पुल निर्माण से जुड़े ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि निर्माण में सुरक्षा के मानकों की अनदेखी की गई और गुणवत्ता से समझौता किया गया।
स्थानीय जनता की नाराजगी और मांग
4000 से अधिक लोगों का संपर्क कटा
इस पुल के टूटने से रतगांव की लगभग 4000 की आबादी का मुख्य सड़क मार्ग से संपर्क टूट गया है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों में आक्रोश है और उन्होंने मांग की है कि:
- दोषियों को कड़ी सजा मिले
- जल्द से जल्द पुल का पुनर्निर्माण किया जाए
- निर्माण कार्य की जांच हो
ग्रामीणों की आवाज
रतगांव के निवासी किशन सिंह का कहना है,
“हमने पहले भी पुल निर्माण में घटिया सामग्री की शिकायत की थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब जब पुल गिर गया, तब सबको होश आया है।”
भ्रष्टाचार पर कार्रवाई: उत्तराखंड में बढ़ता सख्त रवैया
सीएम धामी का यह कदम कोई पहली बार नहीं है। इससे पहले भी कई मामलों में भ्रष्टाचारियों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की गई है। यह दिखाता है कि प्रदेश सरकार अब पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दे रही है।
भ्रष्टाचार पर पिछली कार्रवाइयां
- स्वास्थ्य विभाग में घोटाले पर जांच
- शिक्षा विभाग में फर्जी डिग्री प्रकरण में निलंबन
- नगर निगमों में निर्माण कार्यों की जांच शुरू
पुल हादसों से सबक: क्या सुधार जरूरी हैं?
इस प्रकार की घटनाएं केवल प्रशासनिक लापरवाही का ही नहीं, बल्कि प्रणालीगत खामियों का भी संकेत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि:
- निर्माण कार्यों में थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य हो
- सामग्री की गुणवत्ता की नियमित जांच हो
- हर स्तर पर जवाबदेही तय हो
- भ्रष्टाचार निरोधक इकाइयों को और सशक्त बनाया जाए
उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे की चुनौतियां
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में बुनियादी ढांचा विकसित करना चुनौतीपूर्ण होता है। पुल, सड़क और जलनिकासी जैसे कार्यों में तकनीकी दक्षता, पर्यावरणीय संतुलन और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। चमोली की घटना दर्शाती है कि यदि थोड़ी भी लापरवाही होती है तो इसका असर हजारों लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ता है।
निष्कर्ष: जवाबदेही और ईमानदारी ही भविष्य का रास्ता
चमोली में निर्माणाधीन पुल का गिरना केवल एक इंजीनियरिंग विफलता नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। सरकार द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली समाधान तब मिलेगा जब हर सरकारी परियोजना में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जनहित को प्राथमिकता दी जाएगी।
भ्रष्टाचार पर कार्रवाई तभी असरदार होगी जब यह रुक-रुक कर नहीं, बल्कि निरंतर और व्यवस्थित हो। सीएम धामी का यह निर्णय केवल एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरे राज्य की जनता के लिए भरोसा बढ़ाने वाला कदम है।
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Author: AK
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