
लोकसभा चुनाव के दौरान ऐसा बहुत कम होता है जब बिना मतदान के किसी उम्मीदवार की जीत हो जाए। इस लोकसभा चुनाव में पहली बार बिना वोटिंग के गुजरात की सूरत सूरतसीट से से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी मुकेश दलाल निर्विरोध चुने गए। दरअसल यहां से कांग्रेस कैंडिडेट नीलेश कुंभाणी का पर्चा रद हो गया था। उनके पर्चे में गवाहों के नाम और हस्ताक्षर में गड़बड़ी थी। इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस समेत 10 प्रत्याशी मैदान में थे। बाकी बचे 8 उम्मीदवारों ने भी अपने नाम वापस ले लिए हैं, जिसके बाद बीजेपी की निर्विरोध जीत हुई है। वहीं कांग्रेस ने नामांकन खारिज का आरोप सरकार पर मढ़ दिया है। कांग्रेस ने कहा कि सरकार की धमकी के सामने सब डरे हुए हैं। कांग्रेस के नेता और एडवोकेट बाबू मांगुकीया ने कहा हमारे तीनों प्रस्तावकों का अपहरण हुआ है, चुनाव अधिकारी को अभी फॉर्म पर हस्ताक्षर हुए हैं या नहीं, इसकी नहीं बल्कि अपहरण की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हस्ताक्षर टेली किए बगैर फॉर्म रद करना गलत है, प्रस्तावकों के हस्ताक्षर सही हैं या गलत उसकी जांच के बगैर फॉर्म रद करना गलत है।कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे मैच फिक्स करार दिया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “लोकतंत्र खतरे में है। आप कालक्रम समझिए। सूरत जिला चुनाव अधिकारी ने सूरत लोकसभा के लिए कांग्रेस के उम्मीदवार नीलेश कुम्भानी का नामांकन तीन प्रस्तावकों के हस्ताक्षर के सत्यापन में विसंगतियों” के कारण खारिज कर दिया। समान आधार पर, अधिकारियों ने सूरत से कांग्रेस के स्थानापन्न उम्मीदवार सुरेश पडसाला के नामांकन को खारिज कर दिया। कांग्रेस पार्टी बिना उम्मीदवार के रह गई है। बीजेपी प्रत्याशी मुकेश दलाल को छोड़कर बाकी सभी उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया। 7 मई 2024 को मतदान से लगभग दो सप्ताह पहले 22 अप्रैल, 2024 को सूरत लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार को “निर्विरोध निर्वाचित” घोषित किया गया। बता दें कि, देश के पूर्व पीएम मोरारजी देसाई 5 बार गुजरात की सूरत लोकसभा सीट से सांसद रहे थे, लेकिन साल 1989 से सूरत लोकसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा है।
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Author: AK
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