बिहार में वोटर लिस्ट SIR पर चुनाव आयोग ने कहा कि 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.11% के दस्तावेज उपलब्ध हैं। जानें पूरी जानकारी।
Bihar Voter List SIR: EC’s Big Statement Before Elections
बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा बयान
प्रस्तावना
बिहार की राजनीति इन दिनों बेहद गर्म है। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बहस तेज हो गई है। इस बीच भारत निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा बयान जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.11 प्रतिशत मतदाताओं के दस्तावेज पहले से ही उपलब्ध हैं। यह बयान तब आया है जब विपक्ष लगातार SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा था और राहुल गांधी अपनी राजनीतिक यात्रा के दौरान इसे मुद्दा बना रहे थे।
SIR क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
SIR का मतलब
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (विशेष गहन पुनरीक्षण)। यह एक प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची की गहन जांच और सत्यापन किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी मतदाता का नाम छूटे नहीं और डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ हटाई जा सकें।
बिहार चुनाव में इसकी अहमियत
- बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की सटीकता बेहद जरूरी है।
- विपक्ष का आरोप था कि मतदाता सूची में गड़बड़ी है।
- चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी दलों को शामिल किया।
चुनाव आयोग का बयान
भारत निर्वाचन आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि
- 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के अनुसार 99.11% दस्तावेज पहले ही उपलब्ध हैं।
- बिहार के 7.24 करोड़ मतदाताओं में से केवल एक छोटा हिस्सा ऐसा है, जिनके दस्तावेज की पुष्टि बाकी है।
यह बयान विपक्ष के आरोपों को खारिज करता है और यह दर्शाता है कि आयोग ने SIR को लगभग सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
चुनाव आयोग की तैयारी और बैठकों का विवरण
व्यापक परामर्श प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने पिछले छह महीनों में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से कई दौर की बातचीत की।
- कुल 4,719 बैठकें आयोजित की गईं।
- इनमें 40 बैठकें सीईओ (मुख्य निर्वाचन अधिकारी) ने कीं।
- 800 बैठकें डीईओ (जिला निर्वाचन अधिकारी) ने आयोजित कीं।
- 3,879 बैठकें ईआरओ (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) स्तर पर हुईं।
इन बैठकों में करीब 28,000 से अधिक राजनीतिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
राष्ट्रीय और राज्य दलों के साथ संवाद
- सभी 6 राष्ट्रीय दलों के प्रमुखों को आमंत्रित किया गया।
- मई 2025 में आयोग ने 5 राष्ट्रीय दलों के नेताओं से मुलाकात की।
- जुलाई और अगस्त में आयोग ने 17 मान्यता प्राप्त राज्य स्तरीय दलों के साथ बैठक की।
- शेष राजनीतिक दलों के साथ बातचीत की प्रक्रिया जारी है।
इन बैठकों ने राजनीतिक दलों को सीधे आयोग के सामने अपने सुझाव रखने का मौका दिया। यह पहले की प्रक्रिया से अलग था, जब केवल लिखित सुझाव ही स्वीकार किए जाते थे।
विपक्ष के आरोप और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया
विपक्ष का रुख
विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियां हैं और कई नाम मतदाता सूची से गायब हो सकते हैं। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष चुनाव को प्रभावित कर सकती है।
राहुल गांधी की यात्रा और बयान
राहुल गांधी ने अपनी बिहार यात्रा के दौरान SIR को एक बड़ा मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची में पारदर्शिता नहीं होगी तो आम जनता का विश्वास चुनावी प्रक्रिया से उठ जाएगा।
उन्होंने चुनाव आयोग से पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।
बिहार की राजनीतिक पृष्ठभूमि और महत्व
क्यों चर्चा में है बिहार?
- बिहार की राजनीति हमेशा राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डालती रही है।
- यहां जातिगत समीकरण और युवा मतदाता बड़ा असर डालते हैं।
- विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सभी दल अपनी रणनीति बना रहे हैं।
वोटर लिस्ट का महत्व
- चुनाव में वोटर लिस्ट ही सबसे अहम दस्तावेज है।
- यदि इसमें गड़बड़ी हो तो परिणाम की वैधता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
- इसलिए आयोग SIR को बेहद गंभीरता से ले रहा है।
SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मार्च 2025 में सीईओ सम्मेलन के दौरान यह प्रक्रिया शुरू करने की रूपरेखा दी थी।
इसके बाद चुनाव आयोग ने इस पहल को सभी स्तरों पर लागू किया और राजनीतिक दलों को शामिल कर इसे अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया।
आगे की राह
चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि
- 99.11% दस्तावेज प्राप्त होने के बाद SIR लगभग पूरा हो चुका है।
- शेष मतदाताओं के दस्तावेज भी जल्द ही अपडेट कर दिए जाएंगे।
- आयोग का लक्ष्य है कि बिहार चुनाव से पहले 100% सटीक मतदाता सूची तैयार की जाए।
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Author: AK
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