बुध, फ़रवरी 4, 2026

Tej Pratap Yadav’s ‘Jaichand’ Remark: तेज प्रताप यादव के “जयचंद” बयान से बढ़ी सियासी हलचल

Bihar Politics: Tej Pratap Yadav’s ‘Jaichand’ Remark Triggers Political Buzz

तेज प्रताप यादव के “जयचंद” वाले बयान से बिहार की राजनीति गरमा गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर आकाश यादव सहित कई नेताओं पर सीधा हमला बोला।

Bihar Politics: Tej Pratap Yadav’s ‘Jaichand’ Remark Triggers Political Buzz


परिचय

बिहार की राजनीति हमेशा से बयानों और सियासी वार-पलटवारों से गर्म रहती है। हाल ही में आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे और निष्कासित नेता तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा बयान दिया जिसने सूबे की राजनीति में हलचल मचा दी। उन्होंने कहा कि “पांच जयचंदों में से एक आज बिहार छोड़कर भागने वाला है।”
तेज प्रताप का यह बयान न केवल उनकी नाराज़गी को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि बिहार की राजनीति में अंदरखाने गहरे मतभेद और खींचतान जारी है।


जयचंद का राजनीतिक संदर्भ

“जयचंद” शब्द भारतीय राजनीति में गद्दारी और विश्वासघात का प्रतीक माना जाता है। इतिहास में राजा जयचंद को विदेशी आक्रमणकारियों से हाथ मिलाने वाला शासक कहा जाता है। तेज प्रताप यादव ने इस शब्द का प्रयोग करते हुए संकेत दिया है कि उनकी पार्टी या राजनीति से जुड़े कुछ लोग विश्वासघात कर रहे हैं और उन्हें जनता के सामने बेनकाब किया जाएगा।


सोशल मीडिया पर तेज प्रताप का हमला

तेज प्रताप यादव ने अपने बयान में सीधे तौर पर नाम लिए बिना लिखा –
“आज शाम एक जयचंद पटना जंक्शन से अपने परिवार समेत भागने की तैयारी कर चुका है। जब चुनाव का समय आया तो मैदान छोड़कर भागना क्या दर्शाता है, यह जनता तय करेगी।”

उन्होंने आगे कहा कि कोई भी जयचंद उनकी नजरों से बच नहीं सकता और धीरे-धीरे बाकी चेहरों का भी पर्दाफाश होगा।
यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और मीडिया में इसकी गूंज सुनाई देने लगी।


आकाश यादव पर सीधा निशाना

तेज प्रताप यादव ने हाल ही में आकाश यादव को भी जयचंद कहकर संबोधित किया था। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा –
“आकाश यादव और कुछ जयचंदों ने मेरी फोटो वायरल कर मेरी राजनीति खत्म करने की साजिश की। लेकिन इन्हें यह नहीं पता कि मेरा नाम तेज प्रताप यादव है। मैं ऐसे लोगों की चालों से टूटने वाला नहीं हूं।”

यह बयान साफ संकेत देता है कि तेज प्रताप की नाराजगी पार्टी के कुछ नेताओं और संगठन से जुड़ी है, जिन्हें वे अपने खिलाफ काम करने वाला मानते हैं।


राजनीति को खत्म करने की साजिश का आरोप

तेज प्रताप का कहना है कि कुछ लोग उनकी राजनीतिक जमीन कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दावा है कि इन प्रयासों से उनका राजनीतिक जीवन खत्म नहीं होगा, बल्कि वे और मजबूत होकर उभरेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि वे बिहार की राजनीति में अपने “टीम तेज प्रताप यादव” और सोशल मीडिया के जरिए जनसंवाद करेंगे और चुनावी मैदान में उतरेंगे।


तेज प्रताप यादव का राजनीतिक सफर

  • राजद से शुरुआत – तेज प्रताप ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव और मां राबड़ी देवी की विरासत के साथ राजनीति में कदम रखा।
  • मंत्री पद – नीतीश कुमार के साथ महागठबंधन सरकार में वे स्वास्थ्य मंत्री भी बने।
  • विवादों में घिरे – अक्सर अपने बयानों, जीवनशैली और विवादास्पद घटनाओं की वजह से सुर्खियों में रहे।
  • निष्कासन – हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व से टकराव बढ़ने पर उन्हें आरजेडी से निष्कासित कर दिया गया।

बिहार की राजनीति पर असर

विपक्ष की नजर

तेज प्रताप यादव के इस बयान ने विपक्ष को भी हमला करने का मौका दिया है। विपक्षी दल यह कह रहे हैं कि राजद के भीतर गहरी फूट है और लालू परिवार के भीतर मतभेद अब सार्वजनिक हो चुके हैं।

जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर जनता के बीच भी इस बयान पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग तेज प्रताप को साफ-साफ बोलने वाला नेता मान रहे हैं तो कुछ इसे उनकी राजनीतिक रणनीति बता रहे हैं।


“जयचंद” बयान क्यों है अहम?

तेज प्रताप का यह बयान सिर्फ एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह उनके भीतर गहराए असंतोष का प्रतीक है।

  • इससे यह साफ होता है कि वे अपने विरोधियों को खुलकर चुनौती देने से पीछे नहीं हटेंगे।
  • यह बयान बिहार की राजनीति में गुटबाजी और विश्वासघात की ओर इशारा करता है।
  • आने वाले चुनाव में तेज प्रताप का अगला कदम कई समीकरण बदल सकता है।

लालू परिवार और सियासी विरासत

लालू यादव की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी तेजस्वी यादव के हाथ में है। लेकिन तेज प्रताप यादव लगातार अपनी अलग राह चुनते नजर आ रहे हैं।
इस वजह से राजद की राजनीति में दो ध्रुव बन गए हैं:

  1. तेजस्वी गुट – जो संगठन और चुनावी राजनीति पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
  2. तेज प्रताप गुट – जो अधिक भावनात्मक और सोशल मीडिया आधारित राजनीति कर रहा है।

यह विभाजन न केवल राजद बल्कि बिहार की राजनीति के लिए भी बड़ा मायने रखता है।


क्या होगा आगे?

तेज प्रताप यादव ने साफ संकेत दिया है कि वे हार मानने वाले नहीं हैं। वे संगठन खड़ा करने और जनता से सीधे जुड़ने की रणनीति बना रहे हैं।
आगामी विधानसभा चुनाव में उनका रुख बेहद अहम होगा।

  • क्या वे अलग संगठन खड़ा करेंगे?
  • क्या वे स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेंगे?
  • या फिर किसी नए राजनीतिक गठबंधन में शामिल होंगे?

इन सवालों के जवाब आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा तय करेंगे।


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Author: AK

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