सोम, अप्रैल 6, 2026

Bihar News: प्राच्य-साहित्य के महान अध्येता और साहित्य-ऋषि थे पं. राम नारायण शास्त्री : प्रेम कुमार


राम कुमार व राकेश प्रवीर को स्मृति सम्मान, साक्षी कुमारी को ‘ईश्वरी देवी मेधा सम्मान’
पटना संस्कृत एवं प्राच्य-साहित्य के महान अध्येता तथा ऋषि-तुल्य साहित्य-साधक पंडित राम नारायण शास्त्री न केवल हिन्दी के समर्पित सेवक थे, बल्कि एक उच्चकोटि के चिंतक भी थे। उनका तपस्वी जीवन और विद्वता आज भी प्रेरणा का स्रोत है। ये बातें बिहार विधान सभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने शनिवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित पं. राम नारायण शास्त्री स्मृति-सह-सम्मान समारोह के उद्घाटन अवसर पर कहीं।


यह समारोह पं. राम नारायण शास्त्री स्मारक न्यास के तत्त्वावधान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध समाजसेवी एवं विचारक राम कुमार तथा वरिष्ठ पत्रकार राकेश प्रवीर को ‘अक्षर-पुरुष पं. राम नारायण शास्त्री स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वहीं, माध्यमिक बोर्ड परीक्षा-2025 में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाली जे.पी.एन.एस. उच्च विद्यालय, नरहन (समस्तीपुर) की मेधावी छात्रा साक्षी कुमारी को ‘ईश्वरी देवी सर्वश्रेष्ठ गणितज्ञ छात्रा पुरस्कार’ प्रदान किया गया। पुरस्कार स्वरूप उन्हें ₹2551 की राशि भी दी गई।


समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि शास्त्री जी की विद्वता और विनम्रता सबको अपनी ओर आकर्षित करती थी। वे ज्ञान और मानवीय मूल्यों के सजीव प्रतीक थे, जिनके ज्ञान से समाज निरंतर लाभान्वित होता रहा।
मुख्य अतिथि और बिहार विधान परिषद के उप सभापति डॉ. राम वचन राय ने कहा कि वे 1961 से शास्त्री जी को जानते थे, जब वे राष्ट्रभाषा परिषद में सेवा दे रहे थे। वे ओजस्वी वक्ता, कट्टर आर्यसमाजी तथा सनातन और आधुनिक चिंतन के सुंदर संगम थे।
झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि रंजन ने कहा कि शास्त्री जी ने शास्त्रों का गहन अध्ययन कर उसका समाज-सेवा में सार्थक उपयोग किया। वे ज्ञान के ऐसे दीप-स्तंभ थे, जिनसे आने वाली पीढ़ियाँ सदैव प्रकाश प्राप्त करती रहेंगी।
सभा की अध्यक्षता करते हुए बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि पं. राम नारायण शास्त्री एक प्रणम्य साहित्य-साधु पुरुष थे। प्राच्य साहित्य की दुर्लभ पोथियों और पांडुलिपियों का अन्वेषण, अनुशीलन और सूचीकरण कर उन्होंने हिन्दी साहित्य को अमूल्य धरोहर दी। उन्होंने यह भी कहा कि शास्त्री जी का जन्म और निधन एक ही तिथि—24 जनवरी—को हुआ, जो ईश्वरीय कृपा-प्राप्त महापुरुषों के जीवन में ही संभव होता है। संयोगवश उनकी पत्नी ईश्वरी देवी का तिरोधान भी इसी तिथि को हुआ।
न्यास के प्रमुख न्यासी एवं शास्त्री जी के पुत्र अभिजीत कश्यप ने न्यास की गतिविधियों पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। अतिथियों का स्वागत न्यास अध्यक्ष प्रो. रमेश चंद्र सिंहा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन पंकज कुमार ने किया। मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण कांत ओझा एवं गौरव सुंदरम ने संयुक्त रूप से किया।
समारोह में पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. के.सी. सिन्हा, सम्मेलन की उपाध्यक्ष डॉ. मधु वर्मा, डॉ. रत्नेश्वर सिंह, कुमार अनुपम, पारिजात सौरभ, डॉ. मेहता नागेंद्र सिंह, प्रो. आर.आर. सहाय, डॉ. नागेश्वर शर्मा, विभारानी श्रीवास्तव, इंदु भूषण सहाय, डॉ. मनोज कुमार सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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Author: AK

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