गुरु, जनवरी 15, 2026

स्वामीनाथन रिपोर्ट: पहले भारत रत्न का सम्मान,अब उन्हीं स्वामीनाथन की कृषि रिपोर्ट कृषि मंत्रालय की वेबसाइट से गायब, जानें कौन हैं स्वीनाथन क्या है इनकी रिपोर्ट

Bharat Ratna MS Swaminathan reports no longer available on Ministry of Agriculture & Farmers Welfare website

भारत के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन को केंद्र सरकार ने हाल ही में भारत रत्न (मरणोपरांत) से सम्मानित करने का ऐलान किया है। लेकिन एक ओर जहां उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर उनकी लिखी रिपोर्ट कृषि और किसान मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट से गायब हो गई है। इस बात की जानकारी इंडियन एक्सप्रेस के दिल्ली कॉन्फिडेंशियल में दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले मंत्रालय की वेबसाइट पर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के सभी खंड मौजूद थे लेकिन अब सब गायब हैं।

बता दें कि स्वामीनाथन ने ये रिपोर्ट राष्ट्रीय किसान आयोग के अध्यक्ष के पद पर रहकर लिखी थीं। स्वामीनाथन की रिपोर्ट के मंत्रालय की वेबसाइट से गायब होने की खबर ऐसे वक्त पर आई, जब MSP पर कानून समेत अपनी तमाम मांगों को लेकर पंजाब-हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान दिल्ली का रुख कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि उनकी फसलों की कीमत स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक तय की जानी चाहिए। अब ऐसे में स्वामीनाथ के इस रिपोर्ट का गायब हो जाना केंद्र सरकार पर बड़ा सवाल उठा रहा है।

कौन थे स्वामीनाथन, जिन्हें मिला भारत रत्न?

Bharat Ratna MS Swaminathan reports no longer available on Ministry of Agriculture & Farmers Welfare website

7 अगस्त 1925 को तमिलनाडु के कुंभकोणम में जन्में स्वामीनाथन भारत के आनुवांशिक-विज्ञानी (आनुवंशिक वैज्ञानिक) थे जिन्हें भारत की हरित क्रांति का जनक माना जाता है। उन्हें विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1972 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था और इस वर्ष भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है। स्वामीनाथन भारत में ‘हरित क्रांति’ के जनक माने जाते हैं। उन्होंने गेहूं और चावल की अधिक उपज देने वाली किस्मों को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने भारत में कृषि की प्रोडेक्टिविटी बढ़ाने के लिए के एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसे स्वामीनाथन रिपोर्ट कहा जाता है। हालांकि, इस रिपोर्ट को अब तक लागू नहीं किया गया है।

बता दें कि प्रोफेसर एम एस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में 2004 में राष्ट्रीय किसान आयोग (NCF) का गठन किया गया था। NCF ने 2004 और 2006 के बीच पांच रिपोर्टें पेश कीं। इन रिपोर्टों को स्वामीनाथन रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है।

स्वामीनाथन ने अपनी रिपोर्ट में देश में खाद्य और न्यूट्रिशन सिक्योरिटी के लिए रणनीति बनाने की सिफारिश की थी। इसके अलावा उनकी रिपोर्ट में सिफारिश थी कि फामिंग सिस्टम की प्रोडक्टिविटी और स्थिरता में सुधार किया जाए। रिपोर्ट में किसानों को मिलने वाले कर्ज का फ्लो बढ़ाने के लिए सुधार करने की बात कही गई थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में किसानों की फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने का सुझाव दिया था। इसे C2+50% फार्मूला भी कहा जाता है। रिपोर्ट में किसानों को उनकी फसल की औसत लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक एमएसपी देना का सुझाव दिया था।

स्वामीनाथन द्वारा प्राप्त किए गए सम्मान व पुरस्कार:

  • 1971 में सामुदायिक नेतृत्व के लिए ‘मैग्सेसे पुरस्कार’
  • 1986 में ‘अल्बर्ट आइंस्टीन वर्ल्ड साइंस पुरस्कार’
  • 1987 में पहला ‘विश्व खाद्य पुरस्कार’
  • 1991 में अमेरिका में ‘टाइलर पुरस्कार’
  • 1994 में पर्यावरण तकनीक के लिए जापान का ‘होंडा पुरस्कार’
  • 1997 में फ़्राँस का ‘ऑर्डर दु मेरिट एग्रीकोल’ (कृषि में योग्यताक्रम)
  • 1998 में मिसूरी बॉटेनिकल गार्डन (अमरीका) का ‘हेनरी शॉ पदक’
  • 1999 में ‘वॉल्वो इंटरनेशनल एंवायरमेंट पुरस्कार’
  • 1999 में ही ‘यूनेस्को गांधी स्वर्ग पदक’ से सम्मानित’

भारत सरकार ने एम. एस. स्वामीनाथन को:

  • ‘पद्मश्री’ (1967)’
  • पद्मभूषण’ (1972)’
  • पद्मविभूषण’ (1989)
  • भारत रत्न (2024)

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Abhishek Kumar
Author: Abhishek Kumar

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