सोम, अप्रैल 13, 2026

भारत रत्न दिए जाने की घोषणा के बाद जन नायक कर्पूरी ठाकुर के याद आए आदर्श-उसूल, राजनीति भी ईमानदारी से रही भरी

Bharat Ratna for Bihar's Ex-CM and OBC Leader 'Jan Nayak' Karpoori Thakur, Know about his Journey, Honesty and Values

मंगलवार देश शाम को केंद्र की मोदी सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री और जननायक कर्पूरी ठाकुर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने का एलान किया उसके बाद बिहार के अलावा पूरे देश भर में उनके आदर्शों और विचारों को याद किया जा रहा है। कर्पूरी ठाकुर ने बिहार के अलावा पूरे देश भर में जमीनी नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई। बिहार में सर्वाधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्री भी रहे। ‌सादा जीवन और ईमानदारी के लिए जाने जाने वाले कर्पूरी ठाकुर के जननायक बनने के पीछे उनका व्यक्तित्व और विचार थे। हाशिए के समाज को मुख्यधारा से जोड़ने में भी उनकी काफी अहम भूमिका रही। कर्पूरी ठाकुर बिहार की राजनीति के वास्तविक ‘जन नायक’ रहे हैं, जिनकी विरासत पर विचारधाराओं से परे सभी पार्टियां दावा करती रही हैं। केंद्र की ओर से कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ देने की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

Bharat Ratna for Bihar's Ex-CM and OBC Leader 'Jan Nayak' Karpoori Thakur, Know about his Journey, Honesty and Values
Bharat Ratna for Bihar’s Ex-CM and OBC Leader ‘Jan Nayak’ Karpoori Thakur, Know about his Journey, Honesty and Values

बता दें कि कर्पूरी ठाकुर दो बार बिहार के मुख्यमंत्री और एक बार डिप्टी सीएम रहे। वे बिहार के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे। उन्होंने देश में पहली बार ओबीसी आरक्षण दिया था। वो देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने अपने राज्य में मैट्रिक तक पढ़ाई मुफ्त कर दी थी। कर्पूरी ठाकुर को बिहार के सामाजिक न्याय का मसीहा माना जाता है। उन्होंने पढ़ाई में अंग्रेजी की अनिवार्यता को समाप्त किया, बिहार में उर्दू को दूसरी राजकीय भाषा का दर्जा भी दिया। पिछड़े ही नहीं, अगड़ों को भी 3% आरक्षण का प्रावधान किया। स्वतंत्रता का संघर्ष हो या जेपी का आंदोलन, कर्पूरी ठाकुर भूमिका हमेशा अग्रणी रही। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने के फैसले के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया। ठाकुर को उनकी 100वीं जयंती से एक दिन पहले देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए चुना गया है।

स्वतंत्रता आंदोलनों में भी कर्पूरी ठाकुर ने निभाई अहम भूमिका, जेल में भी रहे:

कर्पूरी ठाकुर का जन्म समस्तीपुर जिले के पितौझिया गांव में हुआ था। पटना से 1940 में उन्होंने मैट्रिक परीक्षा पास की और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। कर्पूरी ठाकुर ने आचार्य नरेंद्र देव के साथ चलना पसंद किया। इसके बाद उन्होंने समाजवाद का रास्ता चुना और 1942 में गांधी के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया। इसके चलते उन्हें जेल में भी रहना पड़ा। साल 1945 में जेल से बाहर आने के बाद कर्पूरी ठाकुर धीरे-धीरे समाजवादी आंदोलन का चेहरा बन गए, जिसका मकसद अंग्रेजों से आजादी के साथ-साथ समाज के भीतर पनपे जातीय व सामाजिक भेदभाव को दूर करने का था ताकि दलित, पिछड़े और वंचित को भी एक सम्मान की जिंदगी जीने का हक मिल सके। कर्पूरी ठाकुर 1952 में ताजपुर विधानसभा क्षेत्र से सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर जीतकर विधायक बने थे। 1967 के बिहार विधानसभा चुनाव में कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी बड़ी ताकत बन कर उभरी थी, जिसका नतीजा था कि बिहार में पहली बार गैर-कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी। महामाया प्रसाद सिन्हा मुख्यमंत्री बने तो कर्पूरी ठाकुर उप मुख्यमंत्री बने और उन्हें शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया था। कर्पूरी ठाकुर ने शिक्षा मंत्री रहते हुए छात्रों की फीस खत्म कर दी थी और अंग्रेजी की अनिवार्यता भी खत्म कर दी थी। कुछ समय बाद बिहार की राजनीति ने ऐसी करवट ली कि कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री बन गए। इस दौरान वो छह महीने तक सत्ता में रहे। उन्होंने उन खेतों पर मालगुजारी खत्म कर दी, जिनसे किसानों को कोई मुनाफा नहीं होता था, साथ ही 5 एकड़ से कम जोत पर मालगुजारी खत्म कर दी गई और साथ ही उर्दू को राज्य की भाषा का दर्जा दे दिया। इसके बाद उनकी राजनीतिक ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ और कर्पूरी ठाकुर बिहार की सियासत में समाजवाद का एक बड़ा चेहरा बन गए।उन्होंने मंडल आंदोलन से भी पहले मुख्यमंत्री रहते हुए पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण दिया था। लोकनायक जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया इनके राजनीतिक गुरु थे। उनका 17 फरवरी, 1988 को निधन हो गया । लेकिन आज भी राजनीति में कर्पूरी ठाकुर के आदर्श और विचार याद किए जाते हैं। बता दें कि ठाकुर से पहले 2019 में दिवंगत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था ।

कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने पर सीएम नीतीश, लालू और तेजस्वी ने आभार जताया:

कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किए जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट किया। उन्होंने लिखा- ‘पूर्व मुख्यमंत्री और महान समाजवादी नेता स्व. कर्पूरी ठाकुर जी को देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया जाना हार्दिक प्रसन्नता का विषय है। केंद्र सरकार का यह अच्छा निर्णय है। स्व. कर्पूरी ठाकुर जी को उनकी 100वीं जयंती पर दिया जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान दलितों, वंचितों और उपेक्षित तबकों के बीच सकारात्मक भाव पैदा करेगा। हम हमेशा से ही स्व. कर्पूरी ठाकुर जी को ‘भारत रत्न’ देने की मांग करते रहे हैं। वर्षों की पुरानी मांग आज पूरी हुई है। इसके लिए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद।

वहीं लालू यादव ने ‘एक्स’ पर लिखे पोस्ट में कहा- मेरे राजनीतिक और वैचारिक गुरु स्व. कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न अब से बहुत पहले मिलना चाहिए था। हमने सदन से लेकर सड़क तक ये आवाज उठायी लेकिन केंद्र सरकार तब जागी जब सामाजिक सरोकार की मौजूदा बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना करवाई और आरक्षण का दायरा बहुजन हितार्थ बढ़ाया। डर ही सही राजनीति को दलित बहुजन सरोकार पर आना ही होगा।

तेजस्वी ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर अपने एक पुराने भाषण का वीडियो साझा करते हुए कहा, वंचित, उपेक्षित और उत्पीड़ित वर्गों के पैरोकार, महान समाजवादी नेता एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर जी को ‘भारत रत्न’ देने की हमारी दशकों पुरानी मांग पूरी होने पर अपार खुशी हो रही है। इसके लिए केंद्र सरकार को साधुवाद। जननायक’ के रूप में मशहूर ठाकुर पहले गैर-कांग्रेसी समाजवादी नेता थे जो दिसंबर 1970 से जून 1971 तक और दिसंबर 1977 से अप्रैल 1979 तक दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। वहीं कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर ने कहा कि हमें 36 साल की तपस्या का फल मिला है। मैं अपने परिवार और बिहार के 15 करोड़ों लोगों की तरफ से सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं।

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Author: AK

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