
भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में 7 जनवरी को हुए आम चुनाव में आवामी लीग पार्टी ने शानदार प्रश्न करते हुए पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया । बांग्लादेश की वर्तमान पीएम शेख हसीना लगातार चौथी बार फिर प्रधानमंत्री बनने जा रहीं हैं। इस बड़ी जीत के बाद शेख हसीना एक सशक्त राजनेता के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरी हैं। इसके साथ शेख हसीना विश्व में पहली महिला नेता हैं जो लगातार प्रधानमंत्री पद पर काबिज होने जा रही हैं। प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश और भारत के रिश्ते भी मधुर हुए हैं। आम चुनाव में हसीना की पार्टी अवामी लीग ने संसद की 300 में 222 से ज्यादा सीटें जीत लीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शेख हसीना को ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी।

हसीना ने लगातार आठवीं बार चुनाव जीता। उन्होंने गोपालगंज-3 सीट से बांग्लादेश सुप्रीम पार्टी के कैंडिडेट को 2 लाख 49 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया। शेख हसीना पांचवीं बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं। वे 1996 से 2001 तक प्रधानमंत्री थीं। इसके बाद 2009 में फिर प्रधानमंत्री बनीं। तब से अब तक सत्ता पर काबिज हैं। हसीना बांग्लादेश के जनक बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी हैं। हसीना ने 1986 में पहली बार चुनाव जीता था। बता दें कि बांग्लादेश में 27 राजनीतिक दलों ने चुनाव लड़ा। उनमें विपक्षी जातीय पार्टी भी शामिल है। बाकी सत्तारूढ़ अवामी लीग की अगुवाई वाले गठबंधन के सदस्य हैं जिसे विशेषज्ञों ने ‘चुनावी गुट’ का घटक दल बताया है। देश के निर्वाचन आयोग के अनुसार, 42,000 से अधिक मतदान केंद्रों पर मतदान हुआ। चुनाव में 27 राजनीतिक दलों के 1,500 से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे और उनके अलावा 436 निर्दलीय उम्मीदवार भी थे । भारत के तीन पर्यवेक्षकों समेत 100 से अधिक विदेशी पर्यवेक्षक 12वें आम चुनाव की निगरानी में रहे। मतदान के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सुरक्षाबलों के 7.5 लाख से अधिक कर्मी तैनात किए गए हैं।
Spoke to Prime Minister Sheikh Hasina and congratulated her on her victory for a historic fourth consecutive term in the Parliamentary elections. I also congratulate the people of Bangladesh for the successful conduct of elections. We are committed to further strengthen our…
— Narendra Modi (@narendramodi) January 8, 2024
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि वे इस चुनाव में हिस्सा नहीं लेने वाली है। तर्क दिया गया था कि शेख हसीना की वजह से कोई भी चुनाव निष्पक्ष नहीं हो सकता और जब तक उनकी तरफ से इस्तीफा नहीं दिया जा सकता, किसी भी तरह के चुनाव का कोई फायदा नहीं। अब क्योंकि शेख हसीना ने इस्तीफा देने से मना कर दिया था, ऐसे में विपक्ष ने लोकतंत्र के उस पर्व में हिस्सा ही नहीं लिया और बड़े आराम से चौथी बार शेख हरीना पीएम बन गईं।
#WATCH | Dhaka: Bangladesh Prime Minister Sheikh Hasina speaks to ANI, she says "India is a great friend of Bangladesh. They have supported us in 1971 and 1975. We consider India as our next-door neighbour. I really appreciate that we have a wonderful relationship with India. In… pic.twitter.com/mfRBbBsb4p
— ANI (@ANI) January 8, 2024
बता दें कि अक्टूबर के महीने में बांग्लादेश में उस वक्त तनाव बढ़ गया था, जब राजधानी ढाका में बीएनपी की एक सरकार विरोधी रैली में हिंसक भड़क गई थी। इसमें पीएम शेख हसीना के इस्तीफे और चुनाव की निगरानी के लिए एक कार्यवाहक सरकार की मांग की गई थी। शेख हसीना के प्रशासन ने कहा कि इस तरह के कदम की अनुमति देने के लिए कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। जबकि आलोचकों ने शेख हसीना पर दमनकारी नीति लागू करके विपक्ष का गला घोंटने का आरोप लगाया था। जिया की पार्टी ने दावा किया कि 20,000 से अधिक विपक्षी समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन सरकार ने कहा कि ये आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए हैं। देश के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि करीब 3000 लोगों को अरेस्ट किया गया था, जबकि कानून मंत्री ने कहा था कि 10 हजार लोगों को अरेस्ट किया गया था।
बांग्लादेश के राष्ट्रपिता रहे शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी हैं शेख हसीना:

शेख हसीना आवामी लीग की सुप्रीम नेता हैं। वह 2009 से लगातार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हैं। इससे पहले वह 1996 से 2001 तक प्रधानमंत्री का पद संभाल चुकी हैं। रविवार को हुए मतदान में जीत के बाद शेख हसीना पांचवी बार बांग्लादेश का राष्ट्रपति पद संभालेंगी। शेख हसीना बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी हैं। हालांकि शेख हसीना को राजनीति का मोह नहीं था लेकिन हालातों की वजह से उन्हें सत्ता में आना पड़ा। साल 1971 में बांग्लादेश एक अलग देश बना। इससे पहले ये इलाका पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था और यहां पाकिस्तानी सरकार की हुकूमत चलती थी। इस नए देश के पहले नेता शेख मुजीबुर्रहमान हुए। लेकिन मुजीब रहमान को सत्ता में आए कुछ साल ही हुए थे कि देश में अस्थिरता फैल गई. कम्युनिस्ट आंदोलन के दौरान शेख की सरकार की सत्ता पलट दी गई। साल 1975 में सेना ने शेख मुजीबुर्रहमान के पूरे परिवार की हत्या कर दी थी, लेकिन शेख हसीना और उनकी बहन रेहाना बच गईं क्योंकि वह उस वक्त जर्मनी में थीं। बांग्लादेश अगले 15 सालों तक सेना के कब्जे में रहा।

शेख हसीना ने जर्मनी में बांग्लादेश के राजदूत हुमांयु रशीद चौधरी से संपर्क किया। हुमांयु का भारत के कई राजनयिकों के बीच अच्छी पैठ थी इसलिए एक बार उन्होंने भारत के राजदूत वाई के पुरी से शेख हसीना और उनकी बहन को राजनीतिक शरण देने की बात कही थी। इसकी भनक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिर गांधी को लगी और उन्होंने तुरंत शेख हसीना और उनकी बहन को एयर इंडिया के विमान से भारत बुला लिया। इसके अलावा शेख हसीना के पति डॉक्टर वाजेद को परमाणु ऊर्जा विभाग में फेलोशिप दी। भारत सरकार ने शेख हसीना को पंडारा रोड के पास एक फ्लैट दिया था। वह यहां करीब छह साल तक थी। छह साल तक भारत में रहने के बाद वह बांग्लादेश गई और बीटीपी की नेता खालिदा जिया के साथ राजनीति की शुरूआत की। साल 1991 में खालिदा जिया पहली महिला प्रधानमंत्री बनी। इसके पांच बाद ही शेख हसीना की अवामी पार्टी ने चुनाव में जीत दर्ज की। साल 1996 में शेख हसीना पहली बार प्रधानमंत्री बनी।
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Author: AK
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