गुरु, फ़रवरी 5, 2026

न्याय दिलाने के लिए कुर्सी पर बैठी महिला जज खुद ही यौन उत्पीड़न की हुई शिकार, सीजेआई को खुला पत्र लिखकर मांगी इच्छा मृत्यु

Banda Civil judge Arpita Sahu allegedly harassed by Sr Judge, seek permission for euthanasia, CJI DY Chandrachud sought a status report
Banda Civil judge Arpita Sahu allegedly harassed by Sr Judge, seek permission for euthanasia, CJI DY Chandrachud sought a status report
Banda Civil judge Arpita Sahu allegedly harassed by Sr Judge, seek permission for euthanasia, CJI DY Chandrachud sought a status report

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में तैनात एक युवा महिला जज ने गुरुवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु मांगी है। महिला जज के पत्र लिखने के बाद पूरे देश भर में न्याय व्यवस्था पर ही सवालिया निशान लग गया। महिला जज आम लोगों को न्याय दिलाने के लिए जानी जाती है। लेकिन जब यह महिला न्यायिक अधिकारी खुद ही पीड़िता के तौर पर अपने ऊपर हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रही है। ‌ बता दें कि गुरुवार को बांदा जिले में तैनात एक महिला जज ने चीफ जस्टिस को लेटर लिखकर इच्छा मृत्यु मांगी है। उनका कहना है कि नौकरी के शुरुआती दौर में उन्हें भरी अदालत में अपमानित किया गया, गालियां दी गईं। महिला जज का आरोप है कि अक्टूबर 2022 में बाराबंकी कोर्ट में उनके साथ बदसलूकी हुई। इसकी शिकायत अगले दिन अपने सीनियर जज से की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

पत्र में उन्होंने कहा कि न्याय तो दूर की बात है, उन्हें निष्पक्ष जांच होने की भी कोई उम्मीद नहीं है। दो पन्नों के पत्र में उन्होंने लिखा, मैं बहुत उत्साह और विश्वास के साथ न्यायिक सेवा में शामिल हुई थी। मुझे लगा था कि मैं आम लोगों को न्याय दिलाऊंगी। मुझे क्या पता था कि मैं जिस भी दरवाजे पर जाऊंगी, जल्द ही मुझे न्याय के लिए भिखारी बना दिया जाएगा। मेरी सेवा के थोड़े से समय में मुझे खुले दरबार में मंच पर दुर्व्यवहार सहने का दुर्लभ सम्मान मिला है। गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने पत्र में उन्होंने लिखा, मेरा यौन उत्पीड़न हद दर्जे तक किया गया है। मेरे साथ बिल्कुल कूड़े जैसा व्यवहार किया गया है। मैं एक अवांछित कीट की तरह महसूस करती हूं। और मुझे दूसरों को न्याय दिलाने की आशा थी। उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद नहीं थी कि मेरी शिकायतों और बयान को मूलभूत सत्य के रूप में लिया जाएगा। मैं बस निष्पक्ष जांच की कामना करती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें रात में अपने सीनियर से मिलने के लिए कहा गया था। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आत्महत्या करके जान देने की कोशिश की थी, लेकिन प्रयास सफल नहीं हुआ। उन्होंने सीजेआई को लिखा मुझे अब जीने की कोई इच्छा नहीं है। पिछले डेढ़ साल में मुझे चलती-फिरती लाश बना दिया गया है। इस निष्प्राण और निर्जीव शरीर को अब इधर-उधर ढोने का कोई प्रयोजन नहीं है। मेरी जिंदगी का कोई मकसद नहीं बचा है। कृपया मुझे अपना जीवन सम्मानजनक तरीके से खत्म करने की अनुमति दें। मेरी जिंदगी खारिज कर दी जाए।31 साल की महिला जज लखनऊ की रहने वाली हैं। 2019 में वे जज बनी थीं। उनकी पहली पोस्टिंग बाराबंकी में हुई थी। फिर मई 2023 में उनका ट्रांसफर बांदा हुआ था। इसके बाद से वे यहीं पर तैनात हैं।

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Abhishek Kumar
Author: Abhishek Kumar

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