बुध, फ़रवरी 4, 2026

Uttarakhand News: Ankita Bhandari Case – अंकिता भंडारी हत्याकांड – वीआईपी का रहस्य अब भी अनसुलझा

Ankita Bhandari Case: The VIP Mystery Remains Unsolved

अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन वीआईपी का रहस्य आज भी अधूरा है, जिससे लोगों में नाराजगी और सवाल कायम हैं।

Ankita Bhandari Case: The VIP Mystery Remains Unsolved


अंकिता भंडारी हत्याकांड: क्यों अब भी रहस्य बना है वीआईपी का नाम?

परिचय

उत्तराखंड की शांत और सुरम्य वादियों के बीच स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में 2022 में जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर दिया। यह मामला केवल एक हत्या नहीं था, बल्कि इसमें सत्ता, सिस्टम और समाज के कई सवाल जुड़े थे। अंकिता भंडारी की हत्या के पीछे छिपे तथाकथित “वीआईपी” का नाम अब तक सामने नहीं आया है, जिससे यह केस आज भी लोगों की चर्चा का विषय बना हुआ है।


घटना की पृष्ठभूमि

कब और कैसे हुई घटना?

18 वर्षीय अंकिता भंडारी श्रीनगर (गढ़वाल) की रहने वाली थी और ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्यरत थी। 17 सितंबर 2022 की रात वह रहस्यमयी ढंग से लापता हो गई। रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, जो एक पूर्व भाजपा नेता का बेटा है, ने 19 सितंबर को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

22 सितंबर को मामला राजस्व पुलिस से नियमित पुलिस को सौंपा गया, और जांच में यह सामने आया कि अंकिता की हत्या पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता द्वारा की गई थी।


एक्सट्रा सर्विस का दबाव और वीआईपी का रहस्य

वीआईपी कौन था?

सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि अंकिता पर कथित रूप से एक “वीआईपी गेस्ट” को एक्सट्रा सर्विस देने का दबाव डाला गया था। इस बात की पुष्टि अंकिता द्वारा अपने मित्र पुष्पदीप से की गई चैट में भी हुई थी, जिसमें उसने स्पष्ट रूप से बताया था कि एक वीआईपी गेस्ट आने वाला है और उससे गलत मांग की जा रही है।

किसने डाला दबाव?

आरोप है कि रिसॉर्ट के मैनेजर अंकित गुप्ता और मालिक पुलकित आर्य ने अंकिता को उस वीआईपी के लिए “स्पेशल सर्विस” देने को कहा, जिसके बदले 10,000 रुपये देने की पेशकश भी की गई थी। जब अंकिता ने इनकार किया, तब विवाद इतना बढ़ गया कि अगले ही दिन उसकी हत्या कर दी गई।


जांच और सबूतों की स्थिति

डीवीआर गायब, सबूत मिटाए गए

इस हत्याकांड में सीसीटीवी फुटेज बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता था, लेकिन पुलिस के अनुसार, 17 और 18 सितंबर की रिकॉर्डिंग गायब कर दी गई थी। पुलकित ने दावा किया कि डीवीआर खराब थी और रिपेयर के लिए भेजी गई थी। इससे स्पष्ट होता है कि यह साजिश पूर्व नियोजित थी और हत्या के बाद साक्ष्य को मिटाया गया।


कोर्ट की कार्रवाई और सजा

दोषियों को उम्रकैद

कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सभी को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया गया।

हालांकि, यह फैसला एक ओर न्याय की ओर कदम था, लेकिन लोगों की निगाहें अब भी उस वीआईपी पर टिकी हैं जिसकी वजह से यह सब शुरू हुआ।


सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया

सड़कों पर उतरे लोग

अंकिता की हत्या के बाद उत्तराखंड में जबरदस्त जन आक्रोश देखा गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक दलों और आम जनता ने वीआईपी का नाम उजागर करने की मांग की। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए, लेकिन फिर भी वीआईपी के नाम पर अब तक पर्दा पड़ा हुआ है।

सरकार पर सवाल

लोगों का मानना है कि इस वीआईपी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, इसीलिए उसका नाम न तो जांच में आया और न ही कोर्ट के दस्तावेजों में कोई खुलासा हुआ। इससे सरकार और पुलिस दोनों की भूमिका पर सवाल उठते हैं।


मीडिया की भूमिका

ट्रायल बाय मीडिया बनाम सच्चाई

मीडिया ने शुरू में इस केस को खूब प्रमुखता दी और अंकिता को न्याय दिलाने के लिए अभियान चलाए। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, वीआईपी के रहस्य को लेकर रिपोर्टिंग धीमी होती गई।

मीडिया का दायित्व है कि वह ऐसे मामलों में लगातार दबाव बनाए रखे ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषी चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, कानून के शिकंजे से न बच सके।


सवाल जो अब भी बाकी हैं

  1. वीआईपी कौन था?
    अब तक यह सवाल अनुत्तरित है।
  2. क्या सिस्टम ने जानबूझकर नाम छुपाया?
    साक्ष्य मिटाने और रिकॉर्डिंग गायब होने की घटनाएं इसी ओर इशारा करती हैं।
  3. क्या अंकिता को न्याय मिला?
    दोषियों को सजा मिलना अहम कदम है, लेकिन जब तक वीआईपी का नाम उजागर नहीं होता, न्याय अधूरा है।

निष्कर्ष

अंकिता भंडारी की हत्या ने न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया। यह मामला सत्ता, पितृसत्ता और भ्रष्ट सिस्टम के गठजोड़ की एक दुखद मिसाल बन गया है। दोषियों को सजा जरूर मिली है, लेकिन जिस वीआईपी के कारण यह पूरा मामला शुरू हुआ, उसका नाम अब भी एक रहस्य है।

जब तक उस रहस्य से पर्दा नहीं हटेगा, तब तक यह मामला अधूरा रहेगा और अंकिता को पूरा न्याय नहीं मिलेगा। समाज और न्याय प्रणाली की असली परीक्षा तभी होगी जब बिना डर और दबाव के हर दोषी को कानून के कठघरे में खड़ा किया जाएगा — चाहे वह कितनी भी ऊंची पहुंच वाला क्यों न हो।


हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम इस तरह की घटनाओं को लेकर आवाज उठाते रहें और न्याय की लड़ाई में चुप न रहें।

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Author: AK

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