
Actress-Turned-Spiritual Leader Mamta Kulkarni Becomes Mahamandaleshwar at Mahakumbh
90 के दशक में बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस रहीं ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni) आध्यात्म का सफर शुरू कर दिया है। एक दिन पहले शुक्रवार 24 जनवरी को अभिनेत्री ममता कुलकर्णी प्रयागराज के महाकुंभ में किन्नर अखाड़ा (Kinnar Akhada) की महामंडलेश्वर बन गई हैं। उन्होंने शुक्रवार को प्रयागराज में संगम तट पर पिंडदान किया। अब वह यामाई ममता नंद गिरि (Mamta Nand Giri) कहलाएंगी। ममता एक-दो फरवरी तक यहां कल्पवास और साधना करेंगी। महाकुंभ में संगम स्नान और पिंड दान के बाद किन्नर अखाड़े की आचार्य डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने ममता का पट्टाभिषेक करते हुए उन्हें नया नाम भी दिया।
ममता कुलकर्णी अब यामाई ममता नंद गिरि:
ममता कुलकर्णी अब यामाई ममता नंद गिरि कहलाएंगी। ममता वैसे तो करीब दो दशक से साध्वी जैसी ही जिंदगी जीने का दावा करती रही हैं। उन्होंने आज महामंडलेश्वर बनने से ठीक पहले भी कहा कि इस उपाधि को पाने से पहले उनकी परीक्षा भी ली गई है। 23 साल तक की गई तपस्या, साधना और ध्यान से संबंधित ढेर सारे सवाल पूछे गए। हर सवाल का सही जवाब देने और तरह तरह की परीक्षाओं में पास होने के बाद उन्हें यह उपाधि मिली है।







ममता एक दिन पहले ही महाकुंभ में पहुंची थीं। यहां आने से पहले उन्होंने अपना एक वीडियो भी इंस्टग्राम पर पोस्ट करते हुए कहा था कि वह महाकुंभ में मौनी अमावस्या के स्नान के लिए जाने वाली हैं। उससे पहले काशी विश्वनाथ और अयोध्या भी जाएंगी। लेकिन काशी के बजाए वह प्रयागराज आ गईं। यहां किन्नर अखाड़े की आचार्य लक्ष्मी नारायण के पास पहुंचीं और उनसे सनातन धर्म को आगे बढ़ाने के लिए काम करने की इच्छा जताई।
VIDEO | Prayagraj: Film actress Mamta Kulkarni to become Mahamandleshwar of Kinnar Akhara at Maha Kumbh.
— Press Trust of India (@PTI_News) January 24, 2025
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/J0lK8Z7fJ4
बता दें कि ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni) 25 साल से भारत में नहीं थी। वह 2024 दिसंबर में ही भारत लौटी हैं, जब उन्हें एयरपोर्ट पर देखा गया तो फैंस हैरान रह गए। इसके बाद ममता ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर अपने देश लौटने की खुशी जाहिर की थी। ममता ने कहा था कि वो साल 2000 से ही बाहर हैं और 25 साल बाद भारत लौटी हैं। उन्होंने कहा था कि वो अपनी मातृभूमि पर आकर काफी खुश हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वो इंडिया लौटने की खुशी को कैसे जाहिर करें। उन्होंने बताया था कि जब उनकी फ्लाइट भारत की धरती पर लैंड हुई तो उन्होंने आसपास देखा और वो बहुत भावुक हुईं। एक्ट्रेस ने कहा था कि वो आसमान से अपने देश को देखना बहुत खास था, ये देख उनकी आंखों में आसूं आ गए थे।
फिल्मी कैरियर की शुरुआत:
ममता ने 1991 में अपने करियर की शुरुआत तमिल फिल्म ‘ननबरगल’ से की। उन्होंने कुल 34 फिल्में की हैं। ममता को साल 1993 में फिल्म ‘आशिक आवारा’ के लिए बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था। इसके बाद वे ‘वक्त हमारा है’, ‘क्रांतिवीर’, ‘करण अर्जुन’, ‘बाजी’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। उनकी लास्ट फिल्म ‘कभी तुम कभी हम’ साल 2002 में रिलीज हुई थी।
महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया:
महामंडलेश्वर बनने की लंबी प्रक्रिया होती है। पहले अखाड़े को आवेदन करना होता है। संन्यास की दीक्षा देकर संत बनाते हैं। नदी किनारे मुंडन फिर स्नान कराते हैं। परिवार और खुद का तर्पण कराते हैं। पत्नी, बच्चों समेत परिवार का पिंड दान कर संन्यास परंपरा अनुसार विजय हवन संस्कार होता है। दीक्षा दी जाती है। गुरु बनाकर चोटी काटते हैं। अखाड़े में दूध, घी, शहद, दही, शक्कर से बने पंचामृत से पट्टाभिषेक होता है। अखाड़े की ओर से चादर भेंट की जाती है। जिस अखाड़े का महामंडलेश्वर बना है, उसमें प्रवेश होता है। साधु-संत, आम लोग और अखाड़े के पदाधिकारियों को भोजन करवाकर दक्षिणा दी जाती है। घर से संबंध खत्म करने होते हैं। संन्यास काल के दौरान जमा धन जनहित के लिए देना होगा। खुद का आश्रम, संस्कृत विद्यालय, ब्राह्मणों को नि:शुल्क वेद की शिक्षा देना होती है।
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Author: AK
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