
11 फरवरी से देश भर में नागरिकता संशोधन कानून लागू हो चुका है। सोमवार शाम सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट सीएए का नोटिफिकेशन गृह मंत्रालय ने जारी कर दिया। इसके तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश अफगानिस्तान से आए गैर- मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो गया है। CAA के ऑनलाइन पोर्टल को रजिस्ट्रेशन के लिए तैयार कर लिया गया है। भारतीय नागरिकों से इस कानून का कोई सरोकार नहीं है। यह कानून किसी की नागरिकता नहीं छीन सकता। केंद्र सरकार के जारी किए गए नोटिफिकेशन के बाद पश्चिम बंगाल और केरल के मुख्यमंत्रियों ने इस नए कानून पर कड़ी आपत्ति जताई है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि अगर नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के जरिये किसी की नागरिकता छीनी जाती है तो हम चुप नहीं बैठेंगे।
उन्होंने सीएए को बीजेपी का छल बताते हुए कहा है कि सीएए से किसी को भी डरने की कोई जरूरत नहीं है और वे पश्चिम बंगाल में किसी भी कीमत पर सीएए को लागू ही नहीं होने देंगी। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर हमलावर होते हुए कहा कि आपको छह महीने पहले नियमों को अधिसूचित करना चाहिए था। यदि कोई अच्छी चीजें हैं, तो हम हमेशा समर्थन और सराहना करते हैं लेकिन अगर कुछ भी किया जाता है जो देश के लिए अच्छा नहीं है, तो टीएमसी हमेशा अपनी आवाज उठाएगी और इसका विरोध करेगी। वहीं केरल के सीएम पिनाराई विजयन ने कहा कि हमारी सरकार कई बार दोहरा चुकी है कि हम सीएए को यहां लागू नहीं होने देंगे। जो मुस्लिम लोगों को दोयम दर्जे का नागरिक मानता है। इस सांप्रदायिक कानून के विरोध में पूरा केरल एक साथ खड़ा हुआ नजर आएगा। बता दें कि CAA 2019 से पहले भाजपा के प्रमुख चुनावी वादों में से एक था। लोकसभा चुनाव में (खासकर पश्चिम बंगाल में) भाजपा को इससे फायदा मिल सकता है। भाजपा CAA के जरिए पश्चिम बंगाल में मतुआ समुदाय के हिंदू वोटों को साधना चाहती है। मतुआ समुदाय मूलत: पूर्वी पाकिस्तान के रहने हैं। ये भारत-पाक विभाजन के दौरान और बांग्लादेश के निर्माण के बाद भारत आ गए थे। बंगाल में इनकी आबादी 30 लाख से ज्यादा है। बंगाल की 5 लोकसभा और 30 से अधिक विधानसभा सीटों पर इनका प्रभाव है। CAA लागू होने के बाद मतुआ समुदाय ने जश्न मनाया। उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में दावा किया कि यह उनका दूसरा स्वतंत्रता दिवस है।
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Author: AK
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