सोम, अप्रैल 6, 2026

जम्मू-कश्मीर में मोदी सरकार के आर्टिकल 370 हटाने का फैसला बरकरार रहेगा, कोर्ट के फैसले के बाद घाटी में बढ़ी हलचल

Abrogation of Article 370 by Modi Govt upheld by the Supreme Court unanimously by the Constitution Bench

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का फैसला बरकार रहेगा। सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने सोमवार को यह अहम फैसला सुनाया। इस पीठ में सीजेआई के अलावा, जस्टिस संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई और सूर्यकांत हैं। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं। इसकी कोई आंतरिक संप्रभुता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि संविधान सभा के भंग किए जाने के बाद भी राष्ट्रपति का अधिकार कायम है और मामले में राष्ट्रपति का आदेश जारी करने बिल्कुल सही है। मसलन, कोर्ट ने माना कि संविधान सभा की सिफारिश राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी नहीं थी। सीजेआई ने कहा कि 370 को हटाने का फैसला जम्मू-कश्मीर के एकीकरण के लिए है। सीजेआई ने माना कि धारा 370 को हटाने के लिए वैध प्रक्रिया अपनाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना संवैधानिक रूप से वैध है।

Abrogation of Article 370 by Modi Govt upheld by the Supreme Court unanimously by the Constitution Bench

इस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि केंद्र सरकार की तरफ से उठाया गया फैसला बिल्कुल ठीक था। चीफ जस्टिस ने कहा कि राष्ट्रपति के लिए यह जरूरी नहीं था कि वह जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की सिफारिश के बाद ही 370 पर कोई आदेश जारी करें। अनुच्छेद 370 को बेअसर कर नई व्यवस्था से जम्मू-कश्मीर को बाकी भारत के साथ जोड़ने की प्रक्रिया मजबूत हुई। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि केंद्र की तरफ से लिए गए हर फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसा करने से अराजकता फैल जाएगी। अगर केंद्र के फैसले से किसी तरह की मुश्किल खड़ी हो रही हो, तभी इसे चुनौती दी जा सकती है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सितंबर 2024 तक राज्य में चुनाव कराया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद जम्मू कश्मीर में हलचल बढ़ गई है। पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कश्मीर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए समूचे जम्मू-कश्मीर में कड़ी निगरानी की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि श्रीनगर शहर और उसके आसपास जांच चौकियां स्थापित की गई हैं और वाहनों, लोगों की तलाशी ली जा रही है। कश्मीर के अन्य जिलों में भी कुछ स्थानों पर जांच चौकियां स्थापित की गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि घाटी में कहीं भी लोगों की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अधिकारियों में से एक ने कहा, ‘‘जनजीवन सामान्य है। दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान सामान्य दिनों की तरह सुबह खुले। कहीं भी कोई प्रतिबंध नहीं है।’’ अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर कड़ी नजर रख रही हैं और शांति भंग करने की कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा।

LG #ManojSinha dismisses claims of house arrest or arrests in J&K prior to the Supreme Court’s #Article370 verdict.

साइबर पुलिस, कश्मीर ने सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया मंचों का जिम्मेदारी से उपयोग करें और अफवाहें, फर्जी खबर, नफरत भरे भाषण या आपत्तिजनक, हिंसक और अपमानजनक सामग्री साझा करने से बचें। अधिकारियों ने कहा कि एहतियात के तौर पर सोमवार को किसी भी काफिले की आवाजाही की अनुमति नहीं दी जाएगी। आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को नजरबंद किए जाने की खबरों पर जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने कहा, यह पूरी तरह से निराधार है। न तो किसी को नजरबंद किया गया है और न ही किसी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने पत्रकारों को नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला के गुपकर स्थित आवास के पास एकत्र होने की अनुमति नहीं दी। गुपकर रोड के प्रवेश स्थानों पर पुलिस कर्मियों का एक दल तैनात किया गया है और पत्रकारों को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं के आवास के आसपास जाने की अनुमति नहीं है।

SC to pronounce judgement on pleas challenging abrogation of Article 370 today
SC pronounces judgement on pleas challenging abrogation of Article 370 today

बता दें कि अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का एक प्रमुख प्रावधान था जो पूर्व राज्य जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता था। जुलाई 1949 में, जम्मू-कश्मीर के अंतरिम प्रधान मंत्री शेख अब्दुल्ला ने भारतीय संविधान सभा के साथ बातचीत का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप अंततः अनुच्छेद 370 को अपनाया गया। इस अनुच्छेद ने जम्मू और कश्मीर को कुछ स्वायत्तता प्रदान की, जैसे राज्य को अपना संविधान, एक अलग ध्वज और भारत सरकार के लिए सीमित क्षेत्राधिकार की अनुमति प्रदान की। अनुच्छेद 370(1)(सी) के तहत अनुच्छेद में एक प्रावधान था जिसमें कहा गया था कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1 अनुच्छेद 370 के माध्यम से कश्मीर पर लागू होता है। अनुच्छेद 1 संघ के राज्यों को सूचीबद्ध करता है। इसका मतलब यह है कि यह धारा 370 ही है जो जम्मू-कश्मीर राज्य को भारत से जोड़ती है। हालांकि अनुच्छेद 370 को राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से हटाया जा सकता है, लेकिन यह राज्य को भारत से स्वतंत्र कर देगा जब तक कि नए अधिभावी कानून नहीं बनाए जाते।

मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 खत्म कर दिया था। सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कुल 23 याचिकाएं दाखिल हुई थीं। पांच जजों की बेंच ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की थी। 16 दिन तक चली सुनवाई 5 सितंबर खत्म हुई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। यानी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के 96 दिन बाद केस पर फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का बचाव करने वालों और केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ताओं हरीश साल्वे, राकेश द्विवेदी, वी गिरि और अन्य की दलीलों को सुना था। याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल, गोपाल सुब्रमण्यम, राजीव धवन, जफर शाह, दुष्यंत दवे और अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने बहस की थी।

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Author: AK

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