गुरु, अप्रैल 2, 2026

संसद पर हमले के 22 साल| आज के दिन लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ था, सुरक्षा बलों ने जान पर खेल कर मंत्रियों-सांसदों की बचाई थी जान

22 Years of Parliament Attack | 13th November 2001- Black Day in the History of Indian Democracy

इन दिनों भी राजधानी दिल्ली में स्थित संसद का शीतकालीन सत्र आयोजित हो रहा है। 22 साल पहले आज की तारीख 13 दिसंबर को भी शीतकालीन सत्र चल रहा था। उस समय पक्ष और विपक्ष के अधिकांश सांसद सदन में मौजूद थे। सत्र शुरू हो चुका था। विपक्षी सांसद ताबूत घोटोले को लेकर कफन चोर, गद्दी छोड़, सेना खून बहाती है, सरकार दलाली खाती है, के नारे लगाकर राज्यसभा और लोकसभा में हंगामा काट रहे थे। सदन को 45 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया था। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी संसद से घर की ओर जा चुके थे। हालांकि, उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत अन्य सांसद संसद में ही मौजूद थे। तब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कुछ देर बाद ही भारत के इतिहास में लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आतंकी हमला होने वाला है। तभी सफेद एंबेसडर कार से जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के पांच आतंकी संसद भवन परिसर में प्रवेश करते हैं। एक आतंकी संसद भवन के गेट पर ही खुद को बम से उड़ा लेता है।

दरअसल, 13 दिसंबर 2001 की सुबह संसद में शीतकालीन सत्र चल रहा था। उस दिन संसद में ज्यादातर सांसद मौजूद थे और संसद के दोनों सदनों में ताबूत घोटाला को लेकर सदस्यों द्वारा हंगामा किया जा रहा था। तभी करीब 11 बजकर 29 मिनट पर एक सफेद एंबेसडर कार संसद भवन की ओर तेजी से आई और मेन एंट्रेंस पर लगे बैरिकेड को तोड़ते हुए अंदर घुस गई। बता दें कि सफेद एंबेसडर कार पर गृह मंत्रालय का स्‍टीकर भी लगा था। सफेद एंबेसडर कार में सवार जैश के पांचों आतंकियों ने एके-47 से गोलियों चलानी शुरू कर दी। गोलियों की आवाज सुन संसद परिसर में मौजूद सुरक्षा बल मुस्तैद हो गए।

आनन-फानन में सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाला और संसद के एंट्री का गेट बंद कर दिया। करीब 45 मिनट तक संसद में गोलियों की आवाज सुनाई देती रही। आमने-सामने की मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने सभी आतंकियों को मार गिराया। इस हमले में दिल्ली पुलिस के पांच जवान, सीआरपीएफ की एक महिला कांस्टेबल और संसद के दो गार्ड समेत कुल 9 लोग शहीद हुए थे। जबकि पांचों आतंकी भी मारे गए थे। दिल्ली पुलिस के अनुसार, मारे गए आतंकियों में हैदर उर्फ तुफैल, मोहम्मर राना, रणविजय, हमला शामिल थे। इसके अलावा सबसे पहले कांस्टेबल कमलेश कुमारी यादव शहीद हुईं। इसके बाद संसद का एक माली, दो सुरक्षाकर्मी और दिल्ली पुलिस के छह जवान भी शहीद हो गए। बता दें कि संसद पर जिस वक्त आतंकी हमले को अंजाम दिया गया। उस दौरान ज्यादातर सांसद सदन में मौजूद थे। जबकि हंगामे के चलते संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा था। जिसके चलते प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और और लोकसभा में विपक्ष की नेता सोनिया गांधी हमले से पहले अपने आवास के लिए निकल चुके थे। हालांकि, हमले के वक्त तत्कालीन गृहमंत्री लाल कृष्‍ण आडवाणी संसद भवन में ही थे। संसद भवन पर हुए इस हमले की साजिश अफजल गुरु ने रची खी। जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने संसद हमले के मुख्य आरोपी अफजल गुरु को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान पता चला था कि उसने पाकिस्तान में आतंकी ट्रेनिंग भी ली थी। बता दें कि साल 2002 में दिल्‍ली हाई कोर्ट और साल 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने उसको फांसी की सजा सुनाई थी। 9 फरवरी 2013 की सुबह अफजल गुरु को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई थी।

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AK
Author: AK

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