सोम, अप्रैल 13, 2026

एमपी, छत्तीसगढ़-राजस्थान के चुनाव नतीजों ने चौंकाया, भाजपा को भी इतनी बड़ी जीत की नहीं थी उम्मीद, ओवर कॉन्फिडेंस ने कांग्रेस के बिगाड़े समीकरण

BJP secures dominant 3-1 victory in Assembly elections
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3 दिसंबर रविवार का दिन सियासी बाजार को चौंका गया। चार राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में हुए विधानसभा चुनाव की अब तस्वीर साफ हो गई है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव नतीजे चौंकाने वाले रहे। इन तीनों राज्यों में जहां कांग्रेस बड़ी जीत को लेकर पूरी तरह कॉन्फिडेंस में थी। चुनाव नतीजे से पहले ही कांग्रेस हाईकमान ने तीनों राज्यों में जीतने वाले अपने-अपने विधायकों की बाड़ाबंदी भी शुरू कर दी थी। लेकिन चुनाव नतीजों ने कांग्रेस को आश्चर्य में डाल दिया है। ‌वहीं दूसरी ओर भाजपा को भी इतनी बड़ी जीत की उम्मीद नहीं थी। तीन राज्यों में प्रचंड जीत दर्ज करने के बाद बीजेपी में खुशी का माहौल है। वहीं कांग्रेस खेमे में मायूसी छाई हुई है। इस बार एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के आए चुनाव नतीजों को देखकर राजनीति के पंडित भी हैरान हैं। 6 महीने के भीतर होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले यह जीत भाजपा का उत्साह बढ़ा गई । वहीं कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों को एक सीख भी दे गई। भाजपा ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत के साथ हिंदी पट्टी में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। वहीं कांग्रेस ने तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति को सत्ता से बेदखल कर दिया है। मध्यप्रदेश ने भाजपा को दो तिहाई बहुमत देकर चौंकाया। छत्तीसगढ़ में पांच साल से सोई हुई भाजपा को स्पष्ट बहुमत देकर चौंकाया और राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तमाम योजनाओं को नकार कर भी चौंकाया। जहां तक तेलंगाना का सवाल है, वहां केसीआर सरकार के खिलाफ जो माहौल था, उसमें कांग्रेस के हाथ सत्ता लग गई। वैसे भी यहां भाजपा की जीत की आस किसी ने नहीं की थी।

किसी भी चुनावी पंडित ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार की आशंका नहीं जतायी थी। ऐसे राज्य में कांग्रेस का पीछे रहना और भाजपा की भारी बढ़त कुछ और संकेत देती है। कांग्रेस के भीतर इस तरह नाउम्मीदी है, कि 2024 के लोकसभा चुनावों में उसको कुछ नजर नहीं आ रहा। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू तीनों हिंदी प्रदेशों में खूब चला। कांग्रेस की खामी यह रही कि उसके पास कोई चुम्बकीय केंद्रीय नेता नहीं है। राजस्थान में आप कह सकते हैं कि यहां सत्ता बदलने का रिवाज है। सही भी है। लेकिन अशोक गहलोत, युवा सचिन पायलट से इस कदर चिढ़े हुए थे कि उन्होंने टिकटों में भी युवाओं को मौका देने से परहेज किया। ज्यादातर पुरानों को चुनाव लड़ाया। जनता ने अशोक गहलोत की यह रणनीति नकार दी। राजस्थान में 1993 से किसी भी पार्टी की सरकार रिपीट नहीं हुई है। चार राज्यों के जो चुनाव नतीजे आए हैं, उन्होंने कई चीजें साफ कर दी हैं। पहली ये कि हिंदी पट्टी राज्यों में अभी भी बीजेपी की लहर है, दूसरी बात ये कि कांग्रेस चाहकर भी उत्तर भारत में अपना विस्तार नहीं कर पा रही है। तीसरी बात ये है कि मोदी का चेहरा अभी भी बाकी सभी दूसरे फैक्टर पर भारी पड़ रहा है। अब ये संकेत तो नतीजों स्पष्ट हुए हैं, लेकिन चुनाव ना लड़ने वाले इंडिया गठबंधन के कई दलों के लिए भी बड़ी सीख छिपी हुई है। ये वो संकेत हैं 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर इन सभी दलों को मिल गए हैं। तीन राज्यों में कांग्रेस की हार इंडिया गठबंधन में उसकी छवि को धूमिल करेगा।

इसी बीच जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने बड़ा बयान दिया। त्यागी ने कहा, ‘कांग्रेस की हार इंडिया गठबंधन की हार नहीं है। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस अब भाजपा से मुकाबला नहीं कर सकती, कांग्रेस को इस सिंड्रोम से बाहर निकलना होगा। उन्होंने आगे कहा कि अच्छी बात है कि कांग्रेस ने पहले ही घटक दलों से खुद को दूर कर लिया। त्यागी ने कहा, ‘जब फसलें सूख गईं तो बारिश का क्या फायदा। एनसीपी चीफ शरद पवार ने भी इस पर अपनी सहमति जताते हुए इस फैसले का इंडिया गठबंधन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। शरद पवार ने कहा, ‘हम दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर बैठेंगे। हम लोगों से बात करेंगे जो जमीनी हकीकत जानते हैं। हम टिप्पणी करने में तभी सक्षम होंगे। बैठक के बाद इस पर चर्चा होगी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने चार राज्यों के नतीजों को अचंभित करने वाला बताया है। मायावती ने बसपा नेताओं की बैठक भी बुलाई है। अब आइए जान लेते हैं चारों राज्यों में किस पार्टी को कितनी सीटें मिली है। भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान की 199 में से 115 सीटों पर जीत दर्ज की है। यहां कांग्रेस को 69, जबकि अन्य पार्टियों और निर्दलियों को कुल 15 सीटें मिलीं। हार स्वीकार कर अशोक गहलोत ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया। राजस्थान में 200 में से 199 सीटों पर विधानसभा चुनाव हुआ था। मध्यप्रदेश में भाजपा ने दो तिहाई से ज्यादा सीटें जीती हैं। पार्टी को 230 में से 163 सीटों पर जीत मिली, जबकि कांग्रेस को 66 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों में से भाजपा को 54 पर, जबकि कांग्रेस को 35 सीटों पर जीत मिली है। 119 सीटों वाली तेलंगाना विधानसभा में कांग्रेस ने 64 सीटें जीती हैं, जबकि सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को 39 सीटें मिली हैं। भाजपा को 8, एआईएमआईएम को 7 और एक सीट सीपीआई के खाते में गई हैं।

कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों का ओबीसी जाति कार्ड नहीं आया काम-

चारों राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ओबीसी जाति का कार्ड खूब जमकर खेला। तीन राज्यों से इस बार जो नतीजे आए हैं, उन्होंने साफ कर दिया जनता जातियों में न बंटकर मुद्दों वाली राजनीति देखना ज्यादा पसंद करने वाली है। इंडिया गठबंधन जरूर ये सोच रहा था कि उन्होंने 2024 के चुनाव के लिए मास्टर स्ट्रोक मिल गया है। वे ओबीसी कार्ड के जरिए बीजेपी को इस बार परास्त कर देंगे। लेकिन कांग्रेस ने ये एक्सपेरिमेंट करके देख लिया है- राजस्थान से लेकर छत्तीसगढ़ तक पार्टी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। खुद राहुल गांधी ने एमपी में जातिगत जनगणना का वादा तक कर दिया। लेकिन पीएम मोदी के पास इसका काउंटर पहले से मौजूद था।उन्होंने जातियों के फेर में न फंसते हुए अपनी विचारधारा के लिहाज से खुद ही चार जातियां निकाल दीं- किसान शक्ति, महिला शक्ति, युवा शक्ति और गरीब शक्ति। यानी कि पीएम मोदी ने जातियों से ऊपर उठकर लाभर्थी वोटबैंक पर फोकस किया और इसका सीधा फायदा पार्टी को चुनाव में मिल गया। रविवार शाम को चुनाव परिणाम के बाद राजधानी दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओबीसी जाति कार्ड को लेकर कांग्रेस समेत विपक्ष पर करारा प्रहार किया।

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इस जीत को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि उनके देश के हर नागरिक का सपना उनका अपना संकल्प है और वे हर कीमत पर उन्हें पूरा करेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि आज विकसित भारत के आह्नान की जीत हुई है। आज मिली ये जीत हर मायने में ऐतिसाहिक है। आज भारत के विकास के लिए, राज्यों के विकास के लिए, इस वाली सोच की जीत हुई है। आज ईमानदारी, पारदर्शिता की जीत हुई है। मेरे लिए सिर्फ चार ही जातियां मायने रखती हैं- नारी शक्ति, युवा शक्ति, किसान शक्ति और गरीब परिवार। बड़ी बात ये रही कि अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने 2024 चुनाव में जीत की गारंटी भी दे दी। उन्होंने कहा कि आज की हैट्रिक ने 2024 की हैट्रिक की भी गारंटी दे दी। यानी कि पीएम मोदी ने सीधे-सीधे एक और कार्यकाल को लेकर भविष्यवाणी कर दी है। पीएम ने इस बात पर भी जोर दिया कि ये जीत जो मिली है, ये सिर्फ बीजेपी या उनकी नहीं है, बल्कि इस जीत से हर गरीब खुश है, वो इसे अपनी जीत मानता है, इस जीत से हर किसान खुश है, उसे लग रहा है कि वो खुद जीता है, फर्स्ट टाइम वोटर गर्व से कह रहा है कि वो जीता है। 2047 में विकसित भारत का सपना देखने वाला हर देशवासी इस समय खुश है। पीएम ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि बीजेपी इस समय युवाओं की आकाक्षांओं को पूरा करने वाली पार्टी है। युवा भी ये बात समझ चुका है कि युवाओं के लिए नए अवसर सिर्फ बीजेपी बना सकती है। मौजूदा हालात को देंखे तो इंडिया गठबंधन को भी अपनी रणनीति पर पुन: विचार करना होगा। क्योंकि हिंदी पट्टी में कांग्रेस की हार यह भी संकेत दे सकती है कि उसकी जाति जनगणना का मुद्दा हिंदी पट्टी के मतदाताओं को पसंद नहीं आया।

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AK
Author: AK

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