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नई आबकारी नीति के बाद भाजपा लगातार केजरीवाल पर आरोप लगा रही थी कि एक तो इसमें भारी भ्रष्टाचार हुआ है और साथ ही ड्राई डे की संख्या कम करके हिंदुओं के पर्व पर पूरे दिल्ली में शराब बांटने के कारण हिंदुओं के धार्मिक आस्था के साथ केजरीवाल सरकार खिलवाड़ कर रही है। आबकारी नीति में से पहले ड्राई डे की संख्या 21 हुआ करती थी लेकिन भाजपा के आरोप के मुताबिक शराब माफियाओं के चंगुल में फंसकर और उन्हें सीधे तौर पर मुनाफा पहुंचाने के लिए केजरीवाल सरकार ने इसकी संख्या घटाकर तीन कर दी।
अब ऐसा नहीं है कि ड्राई डे सिर्फ उन दिनों को ही खत्म करती है जो हिंदुओं के त्यौहार है बल्कि सिख, ईसाई समुदाय के त्योहारों को भी इसमें शामिल किया गया। हालांकि इस पूरे मामले में जब छठ आया है तो और तेजी से इस बात को उठाना शुरू कर दिया गया कि ड्राय डे की संख्या तीन की गई है लेकिन छठ पूजा के दिन को ड्राई डे घोषित करने की मांग भाजपा उठाई तो उपराज्यपाल ने इसको मंजूरी दे दी।
भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने इसके लिए सीएम केजरीवाल को लेटर लिखा तो उसी वक़्त उपराज्यपाल इसे ड्राई डे घोषित कर दिए। अब इसके दो मायने निकलते हैं। पहला उपराज्यपाल वी के सक्सेना के पास अधिकार है जो उन्होंने ड्राई डे घोषित कर दिया और दूसरी अगर उपराज्यपाल पहले से ही घोषित करने का मन बना लिए थे तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता को सिर्फ इस मांग का स्वागत करना चाहिए ना कि इसमें सीएम केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर इसकी मांग करनी चाहिए।
दिल्ली में छठ पूजा को लेकर अभी और कितने मुद्दे देखने होंगे यह शायद किसी को नहीं पता। फिलहाल एलजी ने छठ पूजा को लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को एक पत्र के माध्यम से कई सारे निर्देश दे डाले हैं। निर्देश के साथ चिंता इस बात की भी है कि आखिर 36 घण्टों तक महिलाएं यमुना में तैरती झाग में कैसी खड़ी रह पाएगी। कल 30 अक्टूबर को छठ पूजा मनाई जाएगी। इसलिए कल दिल्ली में ड्राई डे रहेगा. दिल्ली में शराब की दुकानें बंद रहेंगी. बता दें कि दिल्ली में पहली बार छठ पूजा पर ड्राई डे घोषित किया है।
तीसरे दिन छठ यानी पहला अर्घ्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। उगते सूरज के साथ ड्राई डे में बदलाव कितना रंग लाएगा फिलहाल यह पता नहीं लेकिन राजनीतिक पार्टियां आम आदमी पार्टी (AAP) और बीजेपी (BJP), छठ पर्व की आड़ में दिल्ली में निवास कर रहे बिहार-झारखंड और पूर्वी यूपी के वोटरों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहीं। वहीं भाजपा और आप एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।
Author: AK
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