एमपी, यूपी और गुजरात सरकार ने किए लेबर कानून में कई बदलाव….

कोरोना से निपटने के लिए आज भारत ही नहीं पूरा विश्व लड़ाई लड़ रहा है, एक संक्रमण का तो दूसरा अर्थव्यवस्था पर चोट का। इस महामारी से निपटने के लिए विश्व भर में लोग समाधान में लगे है कि आखिर किस तरह से इन दोनों समस्याओं का समाधान निकाला जाए क्यों की देश को चलाने के लिए अर्थ्यवस्था अहम स्थान रखती है।
भारत भी इस से निपटने के लिए लगातार कोशिशें का रहा है लेकिन लंबे समय से चल रहे लॉक डाउन की वज़ह से आज स्थिति एकदम विपरीत नजर आ रही है। अर्थशास्त्रियों का मानना है इस दौरान देश की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ जीरो पर ठहर सकती है।
आर्थिक रेटिंग एजेंसी मूडीज के अनुसार भारत को लॉक डाउन के कारण बड़ी आर्थिक मार झेलनी पड़ सकती है लेकिन 2021-22 में स्थिति बदल सकती है।इस आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की और चर्चा किया की किस तरह इस समय सावधानी पूर्वक फिर से काम सुरू किया जा सके।पीएम ने मुख्यमंत्रियों को यह सलाह भी दी कि भारत के पास एक बेहतरीन मौका है उन कंपनियों को जैसे जापान,कोरिया,अमेरिकी,यूरोपीय कंपनी जो पहले चीन के साथ व्यापार कर रहे थें उन्हें अपने पास लाने की।इस विचार विमर्श के बाद मध्यप्रदेश,गुजरात और उत्तरप्रदेश ने लेबर कानून में कई बदलाव लाने की घोषणा भी कर दी।
इस कानून के तहत उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में ढाई साल यानी 1000 दिन और गुजरात में तीन साल दो महीने यानी 1200 दिन समय तक यह बदलाव किए गए हैं। इन तीनों राज्यों ने तीन वर्ष के लिए उद्योगों में ही नहीं बल्कि लेबर कानून में भी छूट दी है। इसके साथ साथ उनके रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को भी ऑनलाइन और सरल कर दिया है। मजदूरों को अपने उद्योगों के लिए इस से पहले लेबर कानून की विभिन्न धाराओं के तहत पंजीकरण कराने और लाइसेंस प्राप्त करने में 30 दिन का वक्त लगता था,लेकिन अब यह प्रक्रिया 1 दिन में पूरी होगी और इन्हें उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने के लिए शिफ्ट में परिवर्तन करने, श्रमिक यूनियनों को मान्यता देने जैसी कई छूट दी गई हैं।
इन बदलावों से राज्य सरकार का मानना है कि इस से उद्योगों को राहत मिलेगी, साथ ही प्रदेश में नए उद्योगों को लाना आसान होगा। प्रदेश में नए उद्योग आएंगे तो इससे लोगों के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे। विशेष तौर पर अन्य राज्यों से पलायन कर अपने घरों को वापस लौटने वाले श्रमिकों को उनके गृह जनपद में रोजगार की संभावना बढ़ेगी।
आशा है अब इस संशोधन से देश की आर्थिक स्थिति के साथ साथ मजदूरों और श्रमिकों की स्थिति में बदलाव आए और देश की अर्थ्यवस्था फिर से पटरी पर आ जाए।
Author: AK
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