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Happy International Workers’ Day 2022-अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस।

Happy International Workers' Day 2022
Happy International Workers’ Day 2022

आज ही के दिन दुनिया के मजदूरों ने अपने काम के समय निर्धारण के लिए पहली आवाज उठाई थी। इस से पहले  पूरे दुनिया भर में मजदूरों के काम करने की कोई समय सीमा नहीं होती थी।कोई भी मालिक अपने मजदूर से कितने भी समय तक काम ले सकता था। तब अमेरिका के मजदूर संघों ने मिलकर निश्‍चय किया कि वे 8 घंटे से ज्‍यादा काम नहीं करेंगे।

1 मई 1886 को सबसे पहले अपनी मांग को लेकर संगठनों ने हड़ताल किया था। लेकिन इस हड़ताल के दौरान शिकागो की हेमार्केट में बम ब्लास्ट हो गया जिससे निपटने के लिए पुलिस ने मजदूरों पर गोली चला दी।इस दौरान कई मजदूरों की मौत हो गई और 100 से ज्‍यादा लोग घायल हो गए।इसके बाद 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में ऐलान किया गया कि हेमार्केट नरसंघार में मारे गये निर्दोष लोगों की याद में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन सभी कामगारों और श्रमिकों का अवकाश रहेगा।

Happy International Workers’ Day 2022

भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत।भारत में मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत सबसे पहले चेन्नई में 1 मई 1923 को हुई थी। उस समय इसको मद्रास दिवस के तौर पर प्रामाणित कर लिया गया था। इस की शुरुआत भारतीय मजदूर किसान पार्टी के नेता कामरेड सिंगरावेलू चेट्यार ने शुरू की थी।उस समय मद्रास हाईकोर्ट सामने मजदूरों ने एक बड़ा प्रदर्शन किया  और मांग की ,की एक संकल्प पास करके यह सहमति बनाई जाए और इस दिवस को भारत में भी मजदूर दिवस के तौर पर मनाया जाए। मजदूरों की यह मांग भी थी कि इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाए।

भारत में उस दिन से मजदूर दिवस के दिन सार्वजनिक अवकाश होता है और इसे यहां अंतरराष्‍ट्रीय श्रमिक दिवस के रूप में मनाया जाता है।एक मई को दुनिया के कई देशों में लेबर डे मनाया जाता है और इस दिन देश की लगभग सभी कंपनियों में छुट्टी होती है।भारत ही नहीं दुनिया के करीब 80 देशों में इस दिन राष्‍ट्रीय छुट्टी होती है।

Happy International Workers’ Day 2022

भारत में मजदूरों के हित को लेकर कई कानून बनाए गए जिसमें जटिल श्रम कानूनों को सरल बनाने के लिए वेजेज कोड बिल लाये गए। जिनमें पेमेंट ऑफ वेजेस एक्ट (1936), मिनिमम वेजेस एक्ट (1948), पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट (1965) और समान पारिश्रमिक एक्ट (1976) को शामिल थें। इसके अलावा सरकार ने मजदूरों की स्थिति देखते हुए कई योजनाएं लाए गए जिनमें पेंशन योजना, श्रमयोगी मानवधन योजना और भी कई योजनाएं हैं।



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Author: AK

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