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उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की वोटों की गिनती जारी है । लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी परंपरागत खटीमा सीट से विधानसभा चुनाव हार गए हैं। सीएम धामी को कांग्रेस प्रत्याशी भुवन चंद कापड़ी ने 5,180 वोटों से हरा दिया है। सबसे खास बात यह है कि भाजपा राज्य में शानदार जीत की ओर आगे बढ़ रही है लेकिन इस जीत के नायक पुष्कर सिंह धामी नहीं बन सके। 70 सदस्यीय विधान सभा वाले राज्य में भाजपा 40 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं कांग्रेस 16 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। दूसरी और आम आदमी पार्टी का खाता नहीं खुल सका। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लाल कुआं और आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरा कर्नल अजय कोठियाल गंगोत्री सीट से अपनी सीट गंवा बैठे। यहां हम आपको बता दें कि पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री होने के चलते ये सीट हॉट बनी हुई थी। यह सीट किसान आंदोलन से भी प्रभावित रही है। पुष्कर सिंह धामी युवा चेहरा हैं। मुख्यमंत्री बनने से पहले वह केवल विधायक ही थे। उनके हारने से उनके सियासी करियर पर असर पड़ेगा। हालांकि, उनका सियासी सफर अभी लंबा है। साथ ही पार्टी के फैसले का संदेश अच्छा नहीं जाएगा। अगर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भाजपा हाईकमान के ऊपर पूरी तरह से निर्भर हो गए हैं। अब देखना होगा भाजपा उन्हें हार के बाद मुख्यमंत्री बनाती है या किसी नए नेता का चुनाव करती है ? सबसे खास बात यह है कि उत्तराखंड में विधान परिषद नहीं है। ऐसे में अगर हाईकमान पुष्कर सिंह धामी को राज्य की सत्ता दोबारा सौंपता है तो पुष्कर सिंह धामी को 6 महीने के अंदर उत्तराखंड की किसी भी सीट से विधानसभा का चुनाव जीतना होगा। पिछली बार तीरथ सिंह रावत के साथ यही हुआ था वह लोकसभा सदस्य थे लेकिन 6 महीने के अंदर विधानसभा चुनाव नहीं लड़ सके। जिसके बाद हाईकमान ने उन्हें मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया था। जिसके बाद भाजपा केंद्रीय आलाकमान ने पुष्कर सिंह धामी को राज्य की सत्ता सौंपी थी। लेकिन इस चुनाव में मुख्यमंत्री धामी लगातार खटीमा सीट से तीसरी बार हैट्रिक नहीं बना सके।
Author: AK
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