कमजोर मानसून, एल नीनो प्रभाव और 51°C गर्मी से बढ़ी चिंता। जानिए क्या भारत में सूखे का खतरा बढ़ रहा है और राज्यों पर इसका असर।
India Drought Risk: Weak Monsoon Raises Concerns
क्या इस साल पड़ेगा सूखा? कमजोर मानसून और भीषण गर्मी से बढ़ी चिंता

भारत में मानसून केवल बारिश का मौसम नहीं होता, बल्कि यह देश की कृषि, अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ा हुआ है। ऐसे समय में जब देश के कई हिस्से बारिश का इंतजार कर रहे हैं, मानसून की धीमी रफ्तार और लगातार बढ़ती गर्मी ने चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली में जहां उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान कर दिया है और फील्स लाइक तापमान 51 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और कई अन्य राज्यों में बारिश की कमी दर्ज की गई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार मानसून पर कई वैश्विक मौसम प्रणालियों का प्रभाव पड़ रहा है। एल नीनो की स्थिति और भारतीय महासागर डाइपोल (IOD) की तटस्थ स्थिति के कारण मानसून कमजोर रहने की संभावना जताई जा रही है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी इस मानसून सीजन में सामान्य से कम बारिश की आशंका व्यक्त की है।
अगर बारिश में बड़ी कमी बनी रहती है तो इसका असर खेती, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
कमजोर मानसून के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?
एल नीनो का बढ़ता प्रभाव
भारत के मानसून को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में एल नीनो एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एल नीनो प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान में होने वाला बदलाव है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है।
आमतौर पर एल नीनो भारत में कमजोर मानसून से जुड़ा माना जाता है। जब प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक गर्म होता है, तो मानसूनी हवाओं की गति और दिशा प्रभावित हो सकती है, जिससे बारिश कम हो सकती है।
हालांकि कई बार भारतीय महासागर डाइपोल यानी IOD की सकारात्मक स्थिति एल नीनो के प्रभाव को कम कर देती है। उदाहरण के तौर पर 2023 में सकारात्मक IOD के कारण मजबूत एल नीनो के बावजूद भारत में लगभग सामान्य बारिश हुई थी।
लेकिन इस बार स्थिति अलग है। IOD अभी तटस्थ स्थिति में है, जिसका अर्थ है कि यह मानसून को मजबूत करने में बड़ी भूमिका नहीं निभा रहा है। ऐसे में एल नीनो का प्रभाव अधिक महसूस किया जा सकता है।
IMD की भविष्यवाणी और सूखे की आशंका
भारतीय मौसम विभाग ने जून से सितंबर तक चलने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई है।
मौसम विभाग के अनुसार, इस बार बारिश में 10 प्रतिशत से अधिक कमी रहने की संभावना बढ़ गई है। यदि मानसून की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
भारत की बड़ी आबादी अभी भी कृषि पर निर्भर है। देश के कई किसान खरीफ फसलों के लिए मानसून की बारिश का इंतजार करते हैं। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी फसलों की पैदावार सीधे तौर पर बारिश से प्रभावित होती है।
कम बारिश होने पर:
- फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है।
- उत्पादन कम हो सकता है।
- किसानों की आय प्रभावित हो सकती है।
- खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
दिल्ली में गर्मी का रिकॉर्ड स्तर
51 डिग्री से अधिक पहुंचा फील्स लाइक तापमान
देश की राजधानी दिल्ली इस समय भीषण गर्मी और उमस से जूझ रही है। शनिवार दोपहर दिल्ली में फील्स लाइक तापमान 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
हालांकि वास्तविक अधिकतम तापमान लगभग 41.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन अधिक नमी के कारण शरीर को महसूस होने वाला तापमान काफी अधिक रहा।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, जब तापमान के साथ हवा में नमी अधिक होती है तो शरीर का पसीना आसानी से नहीं सूख पाता। इससे गर्मी का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
दिल्ली जैसे बड़े शहरों में इसका असर और ज्यादा महसूस होता है क्योंकि यहां कंक्रीट की इमारतें, वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण और कम हरियाली गर्मी को बढ़ाने में योगदान देते हैं।
किन राज्यों में बारिश की कमी सबसे ज्यादा?
कई राज्यों में मानसून की स्थिति चिंताजनक
1 जून से 27 जून तक के आंकड़ों के अनुसार देश के कई राज्यों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है।
कुछ प्रमुख राज्यों की स्थिति इस प्रकार है:
- मेघालय में लगभग 82 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई।
- गुजरात में करीब 79 प्रतिशत कमी रही।
- मणिपुर में लगभग 71 प्रतिशत कम बारिश हुई।
- छत्तीसगढ़ में 68 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
- झारखंड में 66 प्रतिशत कमी रही।
- महाराष्ट्र में करीब 59 प्रतिशत बारिश कम हुई।
- उत्तर प्रदेश में लगभग 56 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
- ओडिशा में 52 प्रतिशत और बिहार में करीब 50 प्रतिशत बारिश की कमी रही।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि मानसून की धीमी गति का प्रभाव देश के कई हिस्सों में दिखाई दे रहा है।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
किसानों के सामने बढ़ सकती हैं चुनौतियां
भारत में खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर करता है। खासकर छोटे और सीमांत किसान बारिश की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
यदि समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। इससे खेती की लागत बढ़ सकती है।
इसके अलावा जलाशयों में पानी की कमी होने पर बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर मानसून का असर केवल गांवों तक सीमित नहीं रहता। कृषि उत्पादन कम होने से बाजार में खाद्य वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं।
चार बड़े क्षेत्रों में बारिश की स्थिति
देश के अलग-अलग मौसम क्षेत्रों में भी बारिश की कमी दर्ज की गई है।
- मध्य भारत में लगभग 57 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।
- पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में करीब 44 प्रतिशत कमी है।
- दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में लगभग 30 प्रतिशत कमी दर्ज की गई।
- उत्तर-पश्चिम भारत में करीब 27 प्रतिशत कमी रही।
मध्य भारत को मानसून का महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में किसान वर्षा आधारित खेती करते हैं।
जलवायु परिवर्तन भी बढ़ा रहा है चुनौती
बदलते मौसम पैटर्न का असर
पिछले कुछ वर्षों में मौसम के पैटर्न में बड़े बदलाव देखे गए हैं। कहीं अत्यधिक बारिश हो रही है तो कहीं लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनी रहती है।
जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी की लहरें अधिक तीव्र और लंबे समय तक चलने लगी हैं। इसी कारण Delhi Heatwave और अन्य क्षेत्रों में बढ़ता तापमान चिंता का विषय बन रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर जल प्रबंधन, आधुनिक कृषि तकनीक और मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करना होगा।
क्या भारत में सूखे का खतरा बढ़ रहा है?
फिलहाल पूरे देश में सूखे की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बारिश की कमी और कमजोर मानसून के संकेत चिंता बढ़ा रहे हैं।
यदि आने वाले महीनों में मानसून सक्रिय होता है और अच्छी बारिश होती है तो स्थिति सुधर सकती है। लेकिन यदि बारिश लगातार कम रहती है तो कई क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।
सरकार और मौसम एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। किसानों और आम लोगों के लिए समय पर जानकारी और उचित तैयारी बेहद जरूरी होगी।
निष्कर्ष
भारत में इस साल मानसून की स्थिति कई चुनौतियां लेकर आई है। एल नीनो प्रभाव, IOD की तटस्थ स्थिति और बारिश की कमी ने सूखे की आशंका को बढ़ाया है। वहीं दिल्ली सहित कई शहरों में बढ़ती गर्मी ने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को साफ दिखाया है।
हालांकि मानसून अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले महीनों में स्थिति बदल सकती है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि जल संरक्षण, बेहतर कृषि योजना और मौसम के प्रति सतर्कता अब पहले से अधिक जरूरी हो गई है।
Author: AK
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