जहानाबाद में एटीएम कार्ड फंसाकर अज्ञात युवक ने ₹85,500 की ठगी की। पीड़ित ने थाने में दर्ज कराई शिकायत, पुलिस ने जांच शुरू की।
Cyber Fraud in Jehanabad: ₹85,500 Withdrawn from ATM
एटीएम कार्ड फंसाकर ठगी: जहानाबाद में साइबर अपराध का नया रूप
बैंकिंग तकनीक ने जहां आम लोगों के जीवन को सरल बनाया है, वहीं इसके साथ साइबर अपराधियों को भी नए रास्ते मिल गए हैं। बिहार के जहानाबाद जिले से एक साइबर ठगी का ताजा मामला सामने आया है, जिसने यह दिखाया कि सावधानी और जागरूकता की कमी किस हद तक आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।
नगर थाना क्षेत्र के अम्बेडकर चौक स्थित एटीएम बूथ पर घटित इस घटना ने न सिर्फ पीड़ित को आर्थिक रूप से झटका दिया, बल्कि पूरे शहर में चिंता और असुरक्षा का माहौल भी पैदा कर दिया है।
मामला क्या है? – पीड़ित ने सुनाई अपनी आपबीती
पीड़ित ब्रजेश कुमार की शिकायत
पीड़ित ब्रजेश कुमार, पिता विजेंद्र प्रसाद सुधाकर, निवासी मोहल्ला देवरिया, थाना नगर, जहानाबाद, ने नगर थाना में दर्ज की गई अपनी शिकायत में बताया कि 20 जुलाई 2025 को दोपहर 12 बजे वे अपनी माता के आधार कार्ड के साथ पैसे निकालने के लिए अम्बेडकर चौक स्थित एटीएम बूथ पहुंचे।
₹20,000 की नकद निकासी के बाद उनका एटीएम कार्ड मशीन में फंस गया। तभी एक अज्ञात युवक वहां आया और खुद को एटीएम सहायता कर्मी बताते हुए मदद की पेशकश की।
पीड़ित ने उसे कार्ड निकालने में मदद करने दिया, लेकिन कुछ ही देर में वह युवक अचानक गायब हो गया और पीड़ित का मोबाइल नेटवर्क भी बंद हो गया।
खाते से अवैध निकासी
बाद में ब्रजेश कुमार को पता चला कि उनके खाते से कुल ₹85,500 की रकम अवैध रूप से निकाल ली गई है।
चार बार में हुई ये ट्रांजैक्शन निम्नलिखित हैं:
- ₹10,000
- ₹10,000
- ₹20,500
- ₹45,000
ये सभी लेन-देन 11:40 बजे से 12:15 बजे के बीच की गई थीं, यानी घटना के कुछ ही मिनटों के अंदर।
सुनियोजित साइबर ठगी या लापरवाही का फायदा?
अपराधियों की नई चालें
यह मामला दर्शाता है कि साइबर अपराधी नई-नई तकनीकों और रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
एटीएम कार्ड को जानबूझकर फंसाना, मदद के बहाने कार्ड बदलना या जानकारी चुराना, और फिर तेजी से राशि निकालना—यह सब सुनियोजित योजना का हिस्सा लगता है।
पीड़ित ने बैंक और एटीएम सेवा प्रदाता से सीसीटीवी फुटेज की जांच और लेन-देन का विवरण प्राप्त करने की अपील की है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और जांच की दिशा
नगर थाना की प्रतिक्रिया
नगर थाना, जहानाबाद की पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, और जिस समय ट्रांजैक्शन हुए, उस दौरान एटीएम बूथ में कौन-कौन मौजूद था, उसकी पड़ताल की जा रही है।
तकनीकी सहायता की मांग
पुलिस ने बताया कि इस तरह की घटनाओं की तकनीकी जांच के लिए साइबर सेल से मदद ली जाएगी। जरूरत पड़ने पर बैंक अधिकारियों से भी संपर्क कर संदिग्ध ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया जाएगा।
आम नागरिकों के लिए चेतावनी और सुझाव
बैंकिंग लेन-देन में सतर्कता अत्यावश्यक
इस घटना के बाद, स्थानीय लोगों में भय और गुस्सा दोनों है। वे एटीएम बूथों में सुरक्षा बढ़ाने, गार्ड की तैनाती और निगरानी प्रणाली को बेहतर करने की मांग कर रहे हैं।
पुलिस प्रशासन ने भी नागरिकों को सावधान रहने की अपील की है।
कुछ जरूरी सुझाव:
- एटीएम बूथ में लेन-देन के समय किसी अनजान व्यक्ति की मदद न लें।
- कार्ड फंसने जैसी स्थिति में तुरंत बैंक हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
- एटीएम बूथ से निकासी करने के तुरंत बाद ट्रांजैक्शन अलर्ट पर ध्यान दें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी पुलिस को दें।
- मोबाइल नेटवर्क बंद होने पर तुरंत SIM को ब्लॉक कराएं।
क्या कहता है साइबर कानून?
बैंक जिम्मेदारियों से नहीं बच सकता
भारतीय साइबर कानून और आरबीआई के निर्देशों के अनुसार, यदि किसी ग्राहक ने समय पर धोखाधड़ी की सूचना दी है, तो बैंक उसकी भरपाई के लिए जिम्मेदार हो सकता है।
ब्रजेश कुमार जैसे मामलों में, यदि यह साबित हो जाए कि ग्राहक की गलती नहीं थी, तो बैंक को राशि लौटानी होती है।
आरबीआई गाइडलाइन:
- ग्राहक की सूचना के बाद बैंक को 7 कार्यदिवस में जांच पूरी करनी होती है।
- अगर ग्राहक निर्दोष है, तो राशि वापस करनी होती है।
देशभर में बढ़ते साइबर फ्रॉड के आंकड़े
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) के अनुसार, 2024 में केवल बिहार में 3000+ से अधिक साइबर ठगी के मामले दर्ज हुए।
इनमें सबसे ज्यादा मामले एटीएम फ्रॉड, UPI धोखाधड़ी और फर्जी कॉल से जुड़े थे।
बढ़ते डिजिटल लेन-देन के साथ-साथ अपराधियों के तौर-तरीकों में भी तेजी से बदलाव आ रहा है।
निष्कर्ष: डिजिटल लेन-देन में सुरक्षा जरूरी
जहानाबाद की यह घटना यह साबित करती है कि डिजिटल लेन-देन जितना सरल हुआ है, उतना ही असुरक्षित भी हो गया है यदि सतर्कता न बरती जाए।
ब्रजेश कुमार का मामला हमें यह सिखाता है कि तकनीक के युग में सिर्फ सुविधा नहीं, सजगता भी अनिवार्य है।
जब तक हर नागरिक, बैंक और प्रशासन मिलकर सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देंगे, साइबर अपराधों पर लगाम लगाना मुश्किल होगा।
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Author: AK
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