“कविता थी जिनका धर्म, मगही जिनकी आत्मा थी”
जहानाबाद, बिहार मगही भाषा और लोक-संस्कृति के मूर्धन्य कवि, शिक्षाविद् और समाजप्रेमी श्री राम विनय शर्मा का आज प्रातः 90 वर्ष की आयु में उनके पैतृक गांव अलगना (जहानाबाद) में निधन हो गया। वे विगत कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से मगही साहित्यिक परिवार में शोक की गहन लहर दौड़ गई है।
बाबा राम विनय शर्मा, जैसा उन्हें स्नेहपूर्वक कहा जाता था, मगही भाषा के ऐसे सशक्त हस्ताक्षर रहे, जिन्होंने अपने रचनाकर्म के माध्यम से गांव, किसान, खेत-खलिहान और प्रकृति को जीवंत कर दिया। उनकी कविताएं आज भी मगही जनमानस की संवेदनाओं को गहराई से छूती हैं।
जीवन परिचय
श्री शर्मा का जीवन एक आदर्श शिक्षक और सच्चे लोककवि का था। वे करीब दो दशक पूर्व शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए थे, पर साहित्य और सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी जीवनपर्यंत बनी रही। उन्होंने मगही भाषा को केवल लेखन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि जीवन का साधन और साध्य बनाया।
सादा जीवन, उच्च विचार उनके व्यक्तित्व की विशेषता थी। वे सभी कार्य अपने हाथों से करना पसंद करते थे, और वृद्धावस्था में भी प्रतिदिन कई किलोमीटर पैदल चलते थे। उनका व्यवहार बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों में अत्यंत आत्मीय और स्नेहमयी रहा।
साहित्यिक योगदान
उनकी कविताओं में किसानों की पीड़ा, प्रकृति का सौंदर्य, गांव की सादगी और लोकसंस्कृति की गहराई उभरती थी। उनकी रचनाएं मगही कविता को एक नया स्वर, नई दिशा और नई गरिमा देने वाली मानी जाती हैं। उन्होंने जीवन भर मगही भाषा की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखा।
लोकप्रिय उद्धरण
“धनमा के बलिया निहुकी झुकी झाँकई , अरिया पर विहसे किसान …… ” – राम विनय शर्मा
शोक संदेश
उनके निधन पर मगही साहित्य-जगत के अनेक विद्वानों, लेखकों, पत्रकारों एवं सांस्कृतिक संगठनों ने शोक प्रकट किया है। सबका यही कहना है कि “राम विनय शर्मा जैसे लोग यों ही नहीं जन्म लेते, वे समय की कोख से चुनकर आते हैं।”
हम सब इस महान आत्मा को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं और उनके साहित्य, जीवन-मूल्यों एवं कार्यों को स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
Jehanabad News: Poet Ram Vinay Sharma, the pillar of Magahi literature, is no more
Author: AK
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