पटना के PMCH अस्पताल से इलाज के दौरान एक बंदी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। घटना के बाद सिपाही निलंबित, प्रशासन ने शुरू की जांच।
Prisoner Escapes During Treatment at PMCH, Questions Raised on Police
बिहार के सबसे बड़े अस्पताल PMCH में फिर सुरक्षा में चूक
राजधानी पटना के प्रतिष्ठित अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) से एक बार फिर ऐसी घटना सामने आई है, जिसने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाज के नाम पर अस्पताल लाया गया एक कैदी पुलिस की निगरानी में से फरार हो गया। यह मामला जहां प्रशासन की सतर्कता पर सवाल उठाता है, वहीं इससे यह भी जाहिर होता है कि अपराधी किस तरह सिस्टम की खामियों का फायदा उठा रहे हैं।
लूटकांड में पकड़ा गया था आरोपी
महिला से छीने थे ढाई लाख रुपये
फरार हुआ कैदी जहानाबाद जिले के घोसी बाजार का निवासी है। वह एक लूट की वारदात में शामिल था जिसमें अपराधियों ने एक महिला से ढाई लाख रुपये छीन लिए थे। घटना के समय अपराधी बाइक पर सवार थे और भागने की कोशिश कर रहे थे।
जनता ने पकड़ा, हुई जमकर पिटाई
भागते वक्त उनकी बाइक की टक्कर एक अन्य वाहन से हो गई, जिससे संतुलन बिगड़ने पर अपराधी गिर पड़े। मौके पर मौजूद भीड़ ने एक आरोपी को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई की। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और घायल आरोपी को जहानाबाद सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
PMCH में इलाज के दौरान रची फरारी की साजिश
हालत बिगड़ी तो भेजा गया पटना
जहानाबाद अस्पताल में आरोपी की हालत बिगड़ने पर उसे बेहतर इलाज के लिए PMCH, पटना रेफर किया गया। यहाँ उसे पुलिसकर्मियों की निगरानी में भर्ती कराया गया था।
सुरक्षा को चकमा देकर हुआ फरार
इलाज के दौरान आरोपी ने पुलिसकर्मियों की लापरवाही का फायदा उठाते हुए चुपचाप अस्पताल से फरार होने की योजना बनाई और उसे अंजाम भी दे दिया। बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों का ध्यान भटकते ही वह मौके से निकल भागा।
पुलिस पर उठे गंभीर सवाल
सिपाही निलंबित, जांच शुरू
घटना के तुरंत बाद संबंधित पुलिस सिपाही को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इतनी सुरक्षा के बावजूद आरोपी कैसे फरार हो गया।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ महीने पहले पीरबहोर थाना क्षेत्र में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जब एक बंदी इलाज के नाम पर लाया गया था और वह भी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। वह आज तक पकड़ा नहीं जा सका है।
PMCH में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में भी चूक
PMCH को राजधानी का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल माना जाता है, जहां आए दिन VIP से लेकर गंभीर अपराधियों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में यहाँ पर सुरक्षा का खास ख्याल रखा जाना चाहिए, लेकिन हालिया घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर चूक हो रही है।
बंदियों की निगरानी के लिए क्या हैं उपाय?
अस्पतालों में बंदियों की निगरानी के लिए आमतौर पर दो से तीन सशस्त्र जवान तैनात किए जाते हैं। लेकिन कई बार स्टाफ की कमी या लापरवाही के कारण सुरक्षा कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में अपराधी मौका पाकर भाग निकलते हैं।
प्रशासन की कार्रवाई और जनता की उम्मीद
छापेमारी जारी, जल्द गिरफ्तारी का दावा
फरार बंदी की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। प्रशासन का कहना है कि आरोपी को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा और इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जनता में आक्रोश
इस तरह की घटनाओं से आम जनता का पुलिस प्रशासन पर से भरोसा कम होता है। एक तरफ सरकार अपराध पर नियंत्रण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसी लापरवाहियाँ कानून व्यवस्था की पोल खोल देती हैं।
निष्कर्ष
बिहार में अपराध पर काबू पाने के लिए सिर्फ सख्त कानून बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे लागू करने वाली एजेंसियों की ज़िम्मेदारी भी तय करना जरूरी है। PMCH जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा में कोई चूक नहीं होनी चाहिए। हर ऐसी घटना से न सिर्फ पुलिस की साख पर बट्टा लगता है, बल्कि पूरे प्रशासन पर सवाल उठते हैं।
सरकार को चाहिए कि वह अस्पतालों में बंदियों की सुरक्षा के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी करे और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। तभी ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकेगी।
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Author: AK
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