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Bihar News: बिहार में महिला और बाल श्रमिक आयोग का पुनर्गठन, जानिए कौन बने अध्यक्ष और सदस्य

Bihar Restructures Women and Child Labour Commissions

बिहार सरकार ने महिला और बाल श्रमिक आयोग का पुनर्गठन किया है। जानें किन नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को मिली नई जिम्मेदारी।

Bihar Restructures Women and Child Labour Commissions


बिहार में महिला और बाल श्रमिक आयोग का पुनर्गठन: कौन कहां, किस पद पर

बिहार सरकार ने एक बार फिर प्रदेश के सामाजिक न्याय और कल्याण को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के आदेश पर दो महत्वपूर्ण आयोगों — महिला आयोग और बाल श्रमिक आयोग — का पुनर्गठन किया गया है। यह निर्णय न केवल प्रशासनिक दृष्टि से अहम है, बल्कि इससे सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों पर कार्य तेज़ी से आगे बढ़ने की उम्मीद है।

इस नए पुनर्गठन में विभिन्न जिलों से नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है, जिससे इन आयोगों की ज़मीनी पकड़ मजबूत होने की संभावना है। खास बात यह है कि इनमें भाजपा विधायक श्रेयसी सिंह और सामाजिक कार्यकर्ता अप्सरा को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।


बाल श्रमिक आयोग में अरवल और जमुई को मिली प्रमुख जिम्मेदारी

श्रम संसाधन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग का पुनर्गठन बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग अधिनियम की धारा 4(1) के अंतर्गत किया गया है।

इस आयोग का उद्देश्य है कि राज्य में बाल श्रमिकों की स्थिति में सुधार लाया जाए, उन्हें शिक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था दी जाए और शोषण से सुरक्षा प्रदान की जाए।

इस बार आयोग के अध्यक्ष बनाए गए हैं पूर्णिया के अशोक कुमार। उनके अनुभव और सामाजिक सरोकार के चलते उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वे आयोग को सशक्त नेतृत्व देंगे।

उपाध्यक्ष के रूप में अरवल जिले से अरविंद कुमार सिंह को चुना गया है। यह नियुक्ति इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि अरवल जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े जिले को मुख्यधारा में प्रतिनिधित्व मिला है। अरविंद कुमार सिंह की पहचान सामाजिक कार्यों और श्रमिक हितों की आवाज़ उठाने वाले एक सशक्त चेहरा के रूप में है।

इस आयोग में सदस्य के रूप में कई राजनीतिक प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • जमुई से भाजपा विधायक श्रेयसी सिंह
  • बरारी से विधायक विजय सिंह
  • पिपरा से विधायक रामविलास कामत
  • बिहार विधान परिषद के सदस्य अनिल कुमार और रवींद्र प्रसाद सिंह

इन सभी को आयोग के कार्यों में सक्रिय भागीदारी करनी होगी और अपने-अपने क्षेत्र की बाल श्रमिक समस्याओं को आयोग के सामने रखना होगा।


महिला आयोग में गया और समस्तीपुर को नेतृत्व का अवसर

बिहार सरकार ने समाज कल्याण विभाग के माध्यम से महिला आयोग के पुनर्गठन की अधिसूचना भी जारी की है।

महिला आयोग का कार्य है राज्य की महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करना और उनकी समस्याओं का समाधान खोजना।

इस बार महिला आयोग की अध्यक्ष नियुक्त की गई हैं समस्तीपुर निवासी अप्सरा। वे सामाजिक कार्यों से लंबे समय से जुड़ी रही हैं और महिला सशक्तिकरण के लिए सक्रिय रही हैं।

आयोग में जो सदस्य नियुक्त किए गए हैं, उनमें विभिन्न जिलों की प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है:

  • बांका से शीला टुड्डू
  • रोहतास से रजिया कामिल अंसारी
  • लखीसराय से पिंकी कुमार
  • पटना से सजल झा और रश्मि रेखा सिन्हा
  • गया से श्यामा सिंह

गया से सदस्य बनीं श्यामा सिंह का नाम इस लिए उल्लेखनीय है क्योंकि गया जिले में महिलाओं की स्थिति सुधारने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उनके अनुभव और सामाजिक गतिविधियों से उम्मीद है कि वे जिले की महिलाओं की आवाज़ को राज्य स्तर तक पहुंचाने में सक्षम होंगी।


पदेन सरकारी सदस्यों की भूमिका

महिला आयोग में दो पदेन सरकारी सदस्यों को भी शामिल किया गया है:

  • समाज कल्याण विभाग के प्रतिनिधि
  • गृह विभाग के प्रतिनिधि

साथ ही, बिहार राज्य महिला एवं बाल विकास निगम के प्रबंध निदेशक को पदेन सदस्य सह सचिव बनाया गया है। इससे आयोग और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की संभावना है।


क्यों अहम है यह पुनर्गठन?

बिहार में बाल श्रम और महिलाओं से जुड़े मुद्दे वर्षों से चिंता का विषय रहे हैं। चाहे वह बाल मजदूरी हो, या घरेलू हिंसा या यौन उत्पीड़न — इन सभी मामलों में प्रभावी हस्तक्षेप और नीतिगत प्रयासों की जरूरत है।

नई नियुक्तियों से स्पष्ट होता है कि सरकार सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर गंभीर है और वह प्रतिनिधित्व को व्यापक बनाना चाहती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आयोगों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी यह सुनिश्चित करेगी कि जमीनी स्तर की समस्याएं सीधे सरकारी तंत्र तक पहुंचें और उनके समाधान के लिए त्वरित कदम उठाए जाएं।


निष्कर्ष

बिहार सरकार द्वारा महिला आयोग और बाल श्रमिक आयोग का पुनर्गठन राज्य में सामाजिक सुरक्षा और न्याय की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इसमें अरवल और गया जैसे जिलों से प्रतिनिधियों की नियुक्ति इस बात की ओर इशारा करती है कि सरकार अब क्षेत्रीय संतुलन और समावेशी विकास पर जोर दे रही है।

अब यह देखने की बात होगी कि ये आयोग आने वाले समय में कितनी सक्रियता से कार्य करते हैं और क्या वास्तव में ये उन समस्याओं को हल कर पाते हैं जिनके लिए इनका गठन किया गया है।


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AK
Author: AK

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