जहानाबाद में एक दरोगा पर शराब पीकर ड्यूटी करने का आरोप लगा है। वायरल वीडियो में ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक दिख रही है।
Jehanabad Cop Accused of Drinking on Duty, Video Viral
जहानाबाद में पुलिसकर्मी पर शराब पीकर ड्यूटी करने का आरोप, बढ़ा विवाद
घटना ने मचाई सनसनी
बिहार का जहानाबाद जिला एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला पुलिस विभाग से जुड़ा है। एक वायरल वीडियो में एक पुलिस अधिकारी पर शराब पीकर ड्यूटी करने का आरोप लगाया गया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों और पुलिसकर्मी के बीच नोकझोंक का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
इस वीडियो में पुलिसकर्मी से सवाल किए जा रहे हैं कि क्या उन्होंने ड्यूटी के दौरान शराब पी रखी है। वहीं, पुलिस अधिकारी कुछ भी साफ तौर पर जवाब नहीं देते, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा और भड़कता है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह मामला उस समय का है जब पुलिस गश्त पर निकली थी। इसी दौरान एक पिकअप वाहन को रोका गया, जिस पर चारे की बोरियां लदी थीं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस द्वारा वाहन चालक से अवैध वसूली की मांग की गई। जब चालक ने पैसे देने से इनकार किया, तो उसके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई।
डरा-सहमा चालक वहां से भागकर गांव पहुंचा और स्थानीय लोगों को पूरी जानकारी दी। इसके बाद कई ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे। तभी यह आरोप सामने आया कि पुलिसकर्मी शराब के नशे में थे।
वीडियो में क्या देखा गया?
वीडियो में एक सब-इंस्पेक्टर की हालत देखकर लोग हैरान रह गए। वर्दी के बटन खुले हुए थे, आंखें लाल थीं और बातचीत का तरीका असामान्य था। ग्रामीण लगातार सवाल कर रहे थे – “दारू पिए हो?”, “बिहार में दारू बंद है, फिर दारू कहां से आई?”
पुलिस अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आए और बस इतना कहते रहे, “थाने पर आइए, वहां बात करते हैं।” वहीं, वीडियो में एक अन्य सिपाही चुपचाप बैठा हुआ दिख रहा था।
बिहार में शराबबंदी और सवाल
बिहार में 2016 से शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद कई बार शराबबंदी कानून की धज्जियां उड़ती रही हैं। अब जब खुद पर कानून लागू कराने वाले अधिकारी पर ही शराब पीने का आरोप लगे, तो यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या शराबबंदी केवल आम लोगों के लिए है?
इस घटना ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि क्या पुलिस महकमे में भी शराबबंदी को लेकर गंभीरता है? अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ एक अधिकारी पर बल्कि पूरे विभाग पर सवालिया निशान होगा।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना के सामने आते ही वरिष्ठ अधिकारी हरकत में आए। संबंधित पुलिसकर्मी की जांच करवाई गई। प्रशासन की ओर से कहा गया कि ब्रेथ एनालाइजर से जांच की गई, जिसमें शराब की पुष्टि नहीं हुई।
हालांकि यह भी एक अहम सवाल बना रहा कि जांच उसी समय क्यों नहीं हुई जब घटना घटी? क्या वीडियो सामने आने के बाद ही जांच की गई? इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
ग्रामीणों का गुस्सा क्यों भड़का?
ग्रामीणों का मानना है कि अगर एक आम व्यक्ति शराब पीकर सार्वजनिक जगह पर मिलता है तो उसके खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई होती है। वहीं, जब एक पुलिसकर्मी पर ऐसा आरोप लगे, तो उसे इतनी सहजता से क्यों छोड़ा जाए?
इस मामले में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। गांव के लोगों ने मांग की है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो और यदि पुलिस अधिकारी दोषी पाए जाएं, तो उन पर कड़ी कार्रवाई हो।
क्या होना चाहिए आगे?
इस घटना के बाद तीन बड़े सवाल खड़े होते हैं:
- क्या शराबबंदी कानून सभी के लिए समान है?
- क्या पुलिसकर्मी भी कानून के पालन में उतने ही जवाबदेह हैं जितना आम जनता?
- क्या पुलिस विभाग में शराबबंदी के पालन की निगरानी के लिए कोई आंतरिक तंत्र है?
इन सभी सवालों का जवाब प्रशासन को देना होगा। यदि इस पर सख्ती नहीं की गई, तो जनता का कानून व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा।
निष्कर्ष
जहानाबाद की यह घटना सिर्फ एक वीडियो या एक विवाद नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतिनिधित्व करती है जहां कानून को लागू करने वाले ही सवालों के घेरे में आ जाते हैं। शराबबंदी जैसे सामाजिक निर्णय तभी प्रभावी होंगे जब वे बिना पक्षपात और बिना अपवाद के लागू किए जाएं।
पुलिस विभाग को चाहिए कि ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच करे और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करे। साथ ही जनता और पुलिस के बीच विश्वास बहाली के प्रयास किए जाएं। तभी समाज में कानून का डर और न्याय की उम्मीद कायम रह सकेगी।
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Author: AK
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