
इस बार संसद के शीतकालीन सत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच वह सब हुआ जो एक हिंदी फिल्मों में देखने को मिलता है। सदन में पहले अडानी के मुद्दे और संविधान को लेकर गरमा-गरम बहस, उपराष्ट्रपति और सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस। फिर “एक देश एक चुनाव” का विधेयक पेश करने के दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया। गृहमंत्री अमित शाह की राज्यसभा में भीमराव अंबेडकर को लेकर की गई टिप्पणी सदन से निकलकर सड़क तक आ गई। बात धक्का-मुक्की और हाथापाई तक पहुंच गई। भाजपा और कांग्रेस की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। संविधान पर चर्चा करते-करते बात बाबा साहेब अंबेडकर को लेकर एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच संग्राम खड़ा हो गया। दोनों पार्टियों की ओर से अंबेडकर के सम्मान को लेकर विरोध-प्रदर्शन किए गए और आरोप प्रत्यारोप लगाए गए। संसद में हुई धक्का-मुक्की के दौरान भाजपा के दो सांसद घायल हो गए।
संसद के शीतकालीन सत्र में इस बार खूब सियासत देखने को मिली। यह सत्र लंबे समय तक याद रखा जाएगा। शुक्रवार को दोनों लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित कर दी गई। 25 नवंबर से शुरू हुआ संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को समाप्त हो गया। शीतकालीन सत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच वह सब हुआ जो एक हिंदी फिल्मों में देखने को मिलता है। संसद के शीतकालीन सत्र में 105 घंटे कार्यवाही चली, 4 बिल पेश हुए, लेकिन कोई पास नहीं हुआ ।

सत्र में कुल 20 बैठकें हुईं। इस दौरान दोनों सदनों में 105 घंटे कार्यवाही चली। 4 बिल पेश हुए, लेकिन कोई पास नहीं हो सका। लोकसभा की प्रोडक्टिविटी 57.87%, राज्यसभा की 41% रही। सबसे चर्चित ‘एक देश, एक चुनाव’ बिल पेश हुआ, जिसे 39 सदस्यीय जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) को भेज दिया गया। सदन में पहले अडानी के मुद्दे और संविधान को लेकर गरमा-गरम बहस, आरोप-प्रत्यारोप, उपराष्ट्रपति और सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस दिया गया, हालांकि वह पूरा नहीं हो पाया। फिर “एक देश एक चुनाव” का विधेयक पेश करने के दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया।
मीडिया से लेकर सोशल मीडिया को संसद में पक्ष और विपक्ष के बीच नोक-झोंक से भरा सियासत का मसाला छापने को मिला। देशभर के मीडिया समूहों में भीमराव अंबेडकर को लेकर विवाद सुर्खियों में बना । कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी के फिलिस्तीन समर्थन में बैग को लेकर संसद में आने पर भाजपा सांसदों ने विरोध जताया। उसके बाद संविधान पर चर्चा के दौरान भाजपा के साथ कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेता आपस में भिड़ गए। फिर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की राज्यसभा में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर को लेकर की गई टिप्पणी सदन से निकलकर सड़क तक आ गई।
बात धक्का-मुक्की और हाथापाई तक पहुंच गई। भाजपा और कांग्रेस की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। संविधान पर चर्चा करते-करते बात बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर तक ही पहुंच गई। जिस पर चर्चा होनी थी उस पर पूरी नहीं हो पाई और अंबेडकर को लेकर एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच संग्राम खड़ा हो गया। काफी दिनों से विपक्ष भाजपा को संविधान को लेकर घेरने में लगा हुआ था। आखिरकार गृहमंत्री अमित शाह के बयान के बाद इन्हें मुद्दा मिल गया। 17 दिसंबर शाम को राज्यसभा सदन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मान्यवर अभी एक फैशन हो गया है। अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर।
इतना नाम अगर भगवान का लेते, तो 7 जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता। अमित शाह के इस बयान पर पूरे देश की सियासत गरमा गई है। बयान पर हंगामा मचने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया। पीएम मोदी ने लिखा, ‘कांग्रेस अब अंबेडकर पर नाटक कर रही है। पंडित नेहरू ने चुनाव में अंबेडकर के खिलाफ प्रचार किया था। उन्हें भारत रत्न देने से कांग्रेस ने इनकार किया। एसपी-एसटी पर सबसे ज्यादा नरसंहार कांग्रेस के शासन काल में हुए हैं। अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, नड्डा ट्वीट पर सफाई दी और भाजपा कार्यकर्ता हर जगह शाह का पूरा बयान शेयर कर रहे हैं।
बाबासाहेब आंबेडकर से संबंधित मुद्दे पर विपक्ष और सत्तापक्ष के सदस्यों ने गुरुवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया और इस दौरान उनकी कथित तौर पर धक्का-मुक्की भी हुई। बीजेपी का आरोप है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने धक्का-मुक्की की जिस वजह से उसके बुजुर्ग सांसद प्रताप सारंगी चोटिल हुए। सारंगी को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी अमित शाह के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। दोनों पार्टियों ने एक दूसरे के खिलाफ दिल्ली पुलिस से शिकायत भी दर्ज कराई है।
कांग्रेस ने दावा किया कि बीजेपी सदस्यों ने संसद परिसर में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी समेत कई महिला सांसदों के साथ धक्का-मुक्की की। वहीं नगालैंड की बीजेपी सदस्य फान्गनॉन कोन्याक ने आरोप लगाया कि वह जब संसद के मकर द्वार के पास अन्य सांसदों के साथ प्रदर्शन कर रही थीं तभी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी उनके समीप आ गये और उन पर चिल्लाने लगे। कोन्याक ने आसन की अनुमति से अपनी बात रखी और यह आरोप लगाया। संसद में हुई हाथापाई के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। खरगे ने आरोप लगाया कि बीजेपी सांसदों ने उन्हें धक्का दिया और वो गिर गए।
वहीं राहुल गांधी ने कहा बीजेपी-आरएसएस की सोच हमेशा से आंबेडकर के खिलाफ है। संसद भवन में जो कुछ हुआ वो भी मुख्य मुद्दे से हटाने के लिए था। मुख्य मुद्दा मोदी के दोस्त अडानी पर लगे आरोपों से ध्यान हटाना है। बीजेपी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी पर निशाना साधा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी पर संसद भवन परिसर में सत्ता पक्ष के विरोध प्रदर्शन में जानबूझकर पहुंचने और धक्कामुक्की के साथ-साथ ‘गुंडागर्दी’ करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके जैसा व्यक्ति नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहने के लायक नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के व्यवहार के कारण ‘हमारे बुजुर्ग, गरीब और शालीन’ सांसद प्रताप सारंगी गिर गए और गिरने के कारण उनके माथे पर गंभीर चोट लगी है।
वहीं मुकेश राजपूत भी घायल हैं। गृहमंत्री अमित शाह के अंबेडकर पर दिए गए बयान के बाद गुरुवार को महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई, भोपाल, लखनऊ, राजस्थान, बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में भाजपा और कांग्रेस दोनों कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी संसद के शीतकालीन सत्र में अडानी मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार को घेरने में लगे हुए थे। अंबेडकर के अपमान के मुद्दे पर राहुल गांधी को विपक्ष का साथ मिल गया । देखा जाए तो अडानी के मुद्दे से अंबेडकर के अपमान के मुद्दे पर पहुंच चुकी कांग्रेस के लिए फिर से संभलने का मौका आ गया है।
अडानी के मुद्दे पर भले ही विपक्षी दलों के नेताओं ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था, लेकिन अंबेडकर की बात पर भला ऐसी हिम्मत कौन जुटा सकता है । अडानी के मुद्दे पर कांग्रेस अकेली पड़ रही थी। तृणमूल कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी और दूसरे दलों ने भी साथ छोड़ दिया था, और ममता बनर्जी को इंडिया ब्लॉक का नेता बनाने की मांग शुरू हो चुकी थी। लालू यादव से लेकर शरद पवार तक ममता बनर्जी के सपोर्ट में खड़े हो गये थे। ऐसे में आंबेडकर के बहाने कांग्रेस को अचानक सपोर्ट सिस्टम मिल गया है। फिलहाल देखना होगा कि आने वाले दिनों यह विवाद क्या मोड़ लेता है।
Author: AK
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