
उत्तर प्रदेश विधानसभा का सत्र सोमवार से शुरू हुआ। पहले दिन सदन में गरजते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों संभल पर हुए दंगों का जिक्र किया। सीएम योगी ने कहा- संभल में 1947 से अब तक हुए दंगों में 209 हिंदू मारे गए हैं। किसी ने एक बार भी उन निर्दोष लोगों के लिए संवेदना व्यक्त नहीं की। ये लोग हाल ही में हुए संभल दंगे पर आंसू बहा रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि संभल में दो दिन शांति से एएसआई सर्वे किया गया। लेकिन जुमे की नमाज से पहले और बाद में मस्जिद से तकरीरें की गईं, जिससे माहौल गरम हुआ। सीएम योगी ने बताया कि अलग-अलग समय पर यूपी में दंगे सुनियोजित तरीके से कराया गया। हिन्दुओं के मोहल्ले से मुस्लिम धार्मिक जुलूस शांति से निकल जाते हैं, लेकिन हिन्दुओं की शोभायात्रा क्यों शांतिपूर्ण तरीके से मुस्लिम इलाकों से क्यों नहीं निकल पाती। विधानसभा में सीएम योगी ने कहा, ‘1947 से लेकर अब तक हिंसा का सिलसिला चलता आ रहा है। 1978 में 184 हिंदुओं को सामूहिक रूप से जला दिया गया था। हिंदुओं की हत्या हुई थी। आप उस सच्चाई को स्वीकार नहीं करेंगे। 1980 में फिर दंगा हुआ था। लंबे समय तक कर्फ्यूं रहा। 1986 में चार लोग मारे गए। 1990, 1992,1996 में मौतें हुईं। संभल के अंदर 209 हिंदुओं की हत्या हुई है। एक भी बार किसी ने इन 209 हिंदुओं के लिए दो शब्द नहीं कहे। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनाएं नहीं जताईं। ये आज घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।उन्होंने कहा, ‘संभल में जो दंगा हुआ था। उसमें एक वैश्य ने सभी समुदायों को पैसा उधार दिया था। दंगा होने के बाद लोग उनके घर में एकत्र हुए। एकत्र होने के बाद उन्हें घेर लिया जाता है। व्यापारी से कहा जाता है कि इन हाथों से पैसा मांगोंगे इसलिए तुम्हारे हाथ काट दिए जाते हैं। फिर उसका गला रेत दिया गया। ये लोग सौहार्द की बात करते हैं। इन्हें शर्म नहीं आती। 1978 से इन लोगों ने उस मंदिर को खोलने नहीं दिया। वहां अब बजरंग बली का मंदिर निकल रहा है। इन लोगों ने वहां 22 कुओं को बंद कर दिया। ये पत्थरबाज कौन हैं। एक भी गिरफ्तारी बिना साक्ष्य के नहीं हो रही है। इतना याद रखना जिसने पत्थरबाजी की होगी, माहौल खराब किया होगा, उसमें से एक भी बचने वाला नहीं है। हम माननीय उच्चतम न्यायालय का सम्मान करते हैं। क्या आप लोग संविधान को मान रहे हैं। सीएम ने कहा, ‘भारत की समृद्ध परंपरा का दर्शन संविधान में होते हैं। संविधान की प्रति आपको दी गई है, उसका अवलोकन करिए। हम तो राम, कृष्ण को मानते हैं, बुद्ध पर विश्वास करते हैं। संभल की घटना और कुंदरकी की जीत जैसे ही असलिय सामने आई है। जनता ने कहा सफाचट। करहल में चाचा जी ने थीड़ी कृपा कर दी, नहीं तो वहां भी सफाचट हो गया होता। सीसामऊ में भी बाल-बाल बच गए। लोगों को अपनी जड़ें यादें आने लगी हैं। इन विदेशियों से पिंड छुड़ाना है। संभल में वर्चस्व की लड़ाई है। महोदय, मैं उनसे कहूंगा कि वह एक बार बाबरनामा को जरूर पढ़ें। 1972 में आगरा में दंगा हुआ 19 लोग मरे थे, 972 में आजमगढ़ में तीन लोग, 1973 में बहराइच में एक की मौत, 1973 गोंडा में एक की मौत, 1973 में प्रयागराज में तीन लोगों की मौत हुई।’
Author: AK
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