
राजधानी दिल्ली में एक बार फिर किसान संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर डेरा जमा दिया है। नोएडा और दिल्ली के आसपास क्षेत्र में हजारों की संख्या में किसानों का हल्ला बोल शुरू है। जिसकी वजह से दिल्ली एनसीआर में जाम की स्थिति शुरू हो गई है। किसान संसद को घेरने के लिए निकले हैं। इन दिनों संसद का शीतकालीन सत्र भी आयोजित हो रहा है। इसे देखते हुए दिल्ली-यूपी पुलिस सतर्क हो गई। दिल्ली जाने वाले रास्तों पर भारी जाम लग गया है। किसान दिल्ली कूच पर अड़े हैं। दिल्ली-नोएडा और चिल्ला बॉर्डर पर किसानों को रोकने के लिए पुलिस मुस्तैद की गई है। यहां सुबह से ही भारी जाम देखने को मिल रहा है। नोएडा में धारा-163 लगा दी गई। दिल्ली-यूपी को जोड़ने वाले चिल्ला बॉर्डर पर जगह-जगह बैरिकेडिंग कर दी गई है। वज्र वाहन और आरएएफ के जवान तैनात हैं। ड्रोन से निगरानी की जा रही है। वाहनों की चेकिंग के चलते 4-5 किलोमीटर का लंबा जाम लग गया है।



इससे पहले कल किसानों ने अपनी मांगों को लेकर नोएडा डीएम मनीष वर्मा और ग्रेटर नोएडा, यमुना, नोएडा अथॉरिटी के सीईओ के साथ बैठक की थी। 3 घंटे तक बैठक चली थी, लेकिन बेनतीजा साबित हुई थी। नए कृषि कानूनों के तहत मुआवजे और लाभ की अपनी पांच प्रमुख मांगों को लेकर किसान संगठन विरोध मार्च निकाल रहे हैं। इनके विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए हैं और मार्गों को डायवर्ट किया है। विरोध मार्च ऐसे वक्त पर निकाला जा रहा है, जब संसद में इन दिनों शीतकालीन सत्र चल रहा है। किसान पुराने अधिग्रहण कानून के तहत 10 प्रतिशत भूखंडों के आवंटन और 64.7 प्रतिशत बढ़े हुए मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जो बाजार दर के मुआवजे से चार गुना है। वे यह भी चाहते हैं कि भूमिहीन किसानों के बच्चों को रोजगार और पुनर्वास का लाभ दिया जाए, उच्चाधिकार समिति द्वारा पारित मुद्दों पर सरकारी आदेश और आबादी वाले क्षेत्रों का उचित निपटान किया जाए।
प्रदर्शनकारी किसान भारतीय किसान परिषद और किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े हुए हैं। इसको लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 5000 जवानों की तैनाती की कई है. किसानों के कूच को लेकर नोएडा में कई जगहों पर जाम लगा है। महामाया फ्लाईओवर के नीचे किसान एकजुट होंगे। हर तरफ निगरानी रखी जा रही है। कई रूट को किया गया डायवर्ट किया गया है। वहीं किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, सरकार किसानों की बात सुनने और उनसे बात करने के लिए तैयार है। पिछली बार भी सरकार ने बिना किसी शर्त के उन कानूनों को वापस ले लिया था जिन पर उन्हें आपत्ति थी। इससे सरकार की मंशा का पता चलता है कि केंद्र में हमारी एनडीए पूरी तरह से किसानों की भावनाओं के साथ काम करने की कोशिश कर रही है। सरकार ने बातचीत का रास्ता खुला रखा है। मुझे लगता है कि पहले बातचीत होनी चाहिए।
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !












