
दो दिनों से अचानक तेज ठंड शुरू हो गई है। इसकी वजह है पहाड़ों पर बर्फबारी का होना। जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग-गुलमर्ग समेत कई इलाकों में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों पर भी देखने को मिल रहा है। राजधानी दिल्ली में तो और बुरा हाल है।


दिल्ली-एनसीआर में फिर प्रदूषण की स्थिति खराब है। दमघोंटू हवाएं चल रही हैं। सोमवार सुबह से घना कोहरा और प्रदूषण की वजह से धुंध छाई है। ठंड ने भी जबरदस्त दस्तक दी है। कई जगहों पर विजिबिलिटी शून्य रिकॉर्ड की जा रही है। खराब मौसम के साथ ठंड लोगों को और परेशान करने लगी है। पहाड़ों पर शुरू हुई बर्फबारी से दिल्ली, यूपी, बिहार, हरियाणा व उत्तर भारत के अन्य कई राज्य में सुबह-शाम के समय ठिठुरन वाली ठंड की शुरुआत हो गई है। ठंड के साथ कई राज्यों में कोहरे ने भी दस्तक दे दी है। उत्तराखंड में पहाड़ों के साथ राजधानी देहरादून में भी दो दिनों से तेज ठंड पड़ रही है। दिल्ली, यूपी और बिहार के कई जिले कोहरे की चादर में लिपटे हुए हैं। कोहरे के कारण विजिबिलिटी पर भी असर देखने को मिल रहा है। इससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण कोहरा और स्मॉग की चादर छा गई है।

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि सुबह और शाम को घना कोहरा छाया रह सकता है। तापमान में लगातार गिरावट जारी है और आने वाले दिनों में और ठंड बढ़ने की संभावना है। 22 नवंबर से तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आ सकती है, जिसके कारण गर्म कपड़ों की आवश्यकता महसूस होगी। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों यानी 19, 20 और 21 नवंबर को दिल्ली का मौसम साफ रहेगा। हालांकि, सुबह और शाम को हल्का से मध्यम घना कोहरा छाया रह सकता है। वहीं दिल्ली में पॉल्यूशन पिछले छह दिनों से बेहद खतरनाक लेवल पर बना हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी का औसत एक्यूआई 481 दर्ज किया गया। अशोक विहार और बवाना इलाके में एक्यूआई 495 रहा। नोएडा में भी प्रदूषण खतरनाक लेवल पर पहुंच गया है। नोएडा में औसत एक्यूआई 384, गाजियाबाद में 400, गुरुग्राम में 446 और फरीदाबाद एक्यूआई 320 रहा है।आज से दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का चौथा चरण लागू हो गया है। लगातार बढ़ रहे पॉल्यूशन को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने यह फैसला लिया है। आज से ग्रैप-4 लागू हो जाने के बाद में 10वीं और 12वीं क्लास के अलावा सभी स्टूडेंट्स के लिए ऑफलाइन क्लासेस बंद कर दी गई हैं। इसके अलावा और भी प्रतिबंध रहेंगे। ग्रैप चार लागू होने के बाद में दूसरे राज्यों से आने वाले ट्रकों की दिल्ली में एंट्री नहीं होगी। सीएनजी और इलेक्ट्रिक ट्रकों और जरूरी सामान ले जा रहे ट्रकों को छूट दी जाएगी। दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड लाइट कमर्शियल वाहन की एंट्री पर भी बैन है।ग्रैप-4 में ग्रैप-3 वाले नियम भी लागू रहेंगे। जैसे कि दिल्ली-एनसीआर में तोड़फोड़ करने वाली साइट्स पर सख्त पाबंदियां लागू रहेंगी। तोड़फोड़ और कंस्ट्रक्शन के काम पर रोक रहेगी। सीमेंट, प्लास्टर, टाइल्स की कटिंग जैसे कामों पर भी बैन रहेगा। सड़कों की मरम्मत का काम और सड़क को बनाने का काम दोनों ही बंद रहेंगे। इन सब के अलावा बच्चों, बुजुर्गों और सांस से संबंधित मरीजों और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों से जितना संभव हो सके घर के अंदर रहने के लिए ही कहा गया है और बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई है। दिल्ली में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर हर साल चिंता जताई जाती है। प्रबंधन को लेकर नियम भी बनाए जाते हैं और सुप्रीम कोर्ट भी निर्देश देता है. लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होता है। इसका प्रमुख कारण दिल्ली-एनसीआर में खराब प्रबंधन को जिम्मेदार माना जाता है। दिल्ली में वैसे तो लोगों को पूरे साल जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर होना पड़ता है, लेकिन नवंबर आते ही सभी को एहसास होने लगता है कि हालात कितने बदतर हो गए हैं। दिल्ली स्थित पर्यावरण थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट’ की एक नई स्टडी में कहा गया है कि दिल्ली के वायु प्रदूषण में पराली जलाने की भूमिका सिर्फ 8 प्रतिशत है। दिल्ली को गैस चैंबर बनाने में यहां वाहन ही सबसे बड़ी मुसीबत बन गए हैं। इन वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन से प्रदूषण फैल रहा है और लोग बीमार पड़ रहे हैं।
Author: AK
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