
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के बीच सोमवार रात लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता के नाम से देश भर में फेमस सोनम वांगचुक की दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सोनम को हिरासत में लिए जाने पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला है। लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर 700 किमी की पदयात्रा करके दिल्ली पहुंचे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक समेत लद्दाख के करीब 120 लोगों को दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी के सिंघू बॉर्डर पर हिरासत में ले लिया है। ये लोग लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और केंद्र शासित प्रदेश को छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं।
I AM BEING DETAINED…
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) September 30, 2024
along with 150 padyatris
at Delhi Border, by a police force of 100s some say 1,000.
Many elderly men & women in their 80s and few dozen Army veterans…
Our fate is unknown.
We were on a most peaceful march to Bapu’s Samadhi… in the largest democracy… pic.twitter.com/iPZOJE5uuM
पुलिस अधिकारी ने बताया कि वांगचुक और अन्य लोग सीमा पर रात बिताना चाहते थे। दिल्ली में निषेधाज्ञा लागू होने के कारण उन्हें पहले वापस जाने के लिए कहा गया, लेकिन जब वे नहीं रुके तो सीमा पर पहले से तैनात पुलिसकर्मियों ने वांगचुक समेत करीब 120 लोगों को हिरासत में ले लिया।
The detention of Sonam Wangchuk ji and hundreds of Ladakhis peacefully marching for environmental and constitutional rights is unacceptable.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 30, 2024
Why are elderly citizens being detained at Delhi’s border for standing up for Ladakh’s future?
Modi ji, like with the farmers, this…
बता दें, सोनम वांगचुक लद्दाख के करीब 120 कार्यकर्ताओं के साथ 700 किलोमीटर लंबी दिल्ली चलो पदयात्रा कर रहे हैं। वह हरियाणा के रास्ते जैसे ही दिल्ली में दाखिल हुए, पुलिस ने उन्हें रोक लिया और हिरासत में ले लिया। वहीं लोकसभा में विपक्ष नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, शांतिपूर्वक मार्च कर रहे सोनम वांगचुक जी और सैकड़ों लद्दाखियों को हिरासत में लेना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने मोदी सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि उन्हें लद्दाख के लोगों की आवाज सुननी होगी और यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक मार्च कर रहे सोनम वांगचुक जी और सैकड़ों लद्दाखियों को हिरासत में लेना अस्वीकार्य है। लद्दाख के भविष्य के लिए खड़े होने वाले बुजुर्गों को दिल्ली की सीमा पर क्यों हिरासत में लिया जा रहा है? राहुल गांधी ने आगे कहा, मोदी जी, किसानों की तरह यह चक्रव्यूह भी टूटेगा और आपका अहंकार भी टूटेगा। आपको लद्दाख की आवाज सुननी होगी।
#WATCH | Delhi: On Activist Sonam Wangchuk's detention, Ladakh MP Haji Hanifa Jan says, "For the last three years, we have been raising our concerns in a very peaceful manner…several rounds of discussions were also held with the government…we hoped that the talks would… pic.twitter.com/gxQ2T6osGV
— ANI (@ANI) October 1, 2024
बता दें कि सोनम वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य बनाने, स्थानीय लोगों के लिए नौकरी में आरक्षण, लेह और कारगिल के लिए एक-एक संसदीय सीट और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर काफी समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी साल मार्च में सोनम ने 21 दिन की भूख हड़ताल की थी। भूख हड़ताल खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने कहा था- ये आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अपनी मांगों को लेकर हमें जब तक आंदोलन करना पड़े, हम करेंगे। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाकर पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बना। लेह और कारगिल को मिलाकर लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश बना था। इसके बाद लेह और कारगिल के लोग खुद को राजनीतिक तौर पर बेदखल महसूस करने लगे। उन्होंने केंद्र के खिलाफ आवाज उठाई। बीते दो साल में लोगों ने कई बार विरोध-प्रदर्शन कर पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा मांगते रहे हैं, जिससे उनकी जमीन, नौकरियां और अलग पहचान बनी रही, जो आर्टिकल 370 के तहत उन्हें मिलता था। केंद्र ने मांगें मानने से इनकार किया था इस साल की शुरुआत में बौद्ध बहुल लेह और मुस्लिम बहुल कारगिल के नेताओं ने लेह स्थित एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के बैनर तले हाथ मिलाया। इसके बाद लद्दाख में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन और भूख हड़ताल होने लगीं।
केंद्र ने मांगों पर विचार करने के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत सफल नहीं हुई। 4 मार्च को लद्दाख के नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और बताया कि केंद्र ने मांगें मानने से इनकार दिया है। इसके दो दिन बाद वांगचुक ने लेह में अनशन शुरू किया था।
Author: AK
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