
कोरोना काल में स्थिर हुई वायु प्रदूषण की स्थिति अब एक बार फिर से चिंता जनक बनने जा रही है।
एक बार फिर से दिल्ली के आस पास इलाकों में वायु प्रदूषण की स्थिति बन रही है और मौसम के साथ पांच राज्यों की बैठक के बाद वायु प्रदूषण की स्थितियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों ने प्रयास तेज कर दी है। केंद्र का कहना है कि इस मौसम में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण की वजह केवल पराली नहीं है, बल्कि वहां के उद्योगों में प्रदूषण मानकों की अनदेखी और अन्य कारणों से होता है। पराली चालीस फीसदी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है।
वायु प्रदूषण को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर समग्रता से काम करने की जरूरत है। सार्वजनिक स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्य में मानकों का पालन और टूटी सड़कों की मरम्मत के साथ सड़कों की मशीनों से सफाई व छिड़काव का काम शुरू कर दिया है। 12 दिन बाद ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान-ग्रेप लागू किया जाएगा।
इसके तहत बड़े निर्माण, डीजल से चलने वाले जेनरेटर, कोयला का उपयोग और तंदूरों पर रोक समेत अनेक पाबंदियां लगा दी जाएंगी, जो अगले साल 2021 के 15 मार्च तक प्रभावी रहेगी। एक मुश्त कार्ययोजना को लागू करने के साथ इसकी निगरानी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा 50 टीमों का गठन किया गया है। वायु प्रदूषण के अध्ययन और अनुसंधान के लिए सीपीसीबी ने टेरी संस्थान को अध्ययन का जिम्मा सौंपा है।
Author: AK
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